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SSC GD 2018 पैदल मार्च: UP में दरोगा ने डंडे से उतरवाया तिरंगा, रात के अंधेरे में सड़क पर चलने को किया मजबूर!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 27 Jul 2022 06:51 PM IST
सार

SSC GD 2018: एसएससीजीडी 2018 के मेडिकल पास अभ्यर्थियों का कहना है कि हमें तो सिपाही बनना था, इसलिए सारा जोर एसएससीजीडी 2018 पर लगा दिया। अब रिजल्ट का इंतजार इतना लंबा हो गया है। अभ्यर्थी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं...

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SSC GD 2018: UP police misbehaved with candidates marching from Nagpur to Delhi for recruitment in CAPF
SSC GD 2018: प्रदर्शन करते अभ्यर्थी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

'एसएससी जीडी' 2018 (SSC GD 2018) के मेडिकल पास अभ्यर्थियों का 'नागपुर से दिल्ली' पैदल मार्च शांत तरीके से चल रहा था। मध्यप्रदेश पुलिस ने भी इन्हें परेशान नहीं किया। जैसे ही ये अभ्यर्थी, उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने लगे, इन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। भूखे प्यासे, पांव में छाले और हाथ में तिरंगा लिए इन अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इन्हें बसों में बैठाकर पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर छोड़ा। पुलिस (UP Police) का मकसद था कि ये अभ्यर्थी जब अलग हो जाएंगे, तो पैदल मार्च भी नहीं कर सकेंगे। मथुरा में तो पुलिस ने सारी हदें पार कर दीं। पहले इन्हें सड़क पर ही धूप में बैठाए रखा। रात को एकाएक फरमान जारी कर दिया कि अब चलना शुरू करो।

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एसएससीजीडी 2018 (SSC GD 2018) के मेडिकल पास अभ्यर्थी, अंधेरे में सड़क पर चलने के लिए मजबूर हो गए। महिला अभ्यर्थियों ने गुहार लगाई कि सुबह होते ही चले जाएंगे, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्हें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) में भर्ती होना है। वे सभी योग्यताओं के मापदंड पार कर चुके हैं। सरकार की लेट-लतीफी के चलते अब हमारे पास भर्ती का दूसरा चांस भी नहीं है।

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2018 में शुरू हुई अनूठे संघर्ष की कहानी

इस संघर्ष की कहानी, 2018 में शुरू हुई थी। सीएपीएफ में सिपाही भर्ती के लिए लगभग साठ हजार वैकेंसी निकाली गईं। यह प्रक्रिया तय समय पर पूरी नहीं हो सकी। साल 2021 में इसका फाइनल रिजल्ट घोषित किया गया। इनमें बहुत से अभ्यर्थी, जो मेडिकल प्रक्रिया पास कर चुके थे, उनका नाम सूची में नहीं आया। अभ्यर्थी, वीरू, प्रदीप, विशाल, अमिता सलाम, काजल और पुष्पम का कहना है, हमारा एक ही सपना था कि सीएपीएफ में भर्ती होकर देश सेवा करनी है। अधिकांश उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जो बहुत ही साधारण परिवारों से आते हैं। पहले मां-बाप ने पढ़ाई-लिखाई के लिए कष्ट उठाया। उसके बाद सिपाही भर्ती की तैयारी के लिए उन्हें तैयार किया। दिन-रात मेहनत कर शारीरिक परीक्षा पास की। मेडिकल भी पास हो गया।

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रिजल्ट का इंतजार इतना लंबा हो गया था

अभ्यर्थियों ने सवाल भरे लहजे में कहा, हमें तो सिपाही बनना था, इसलिए सारा जोर एसएससीजीडी 2018 पर लगा दिया। अगर हमारी मेहनत में कमी होती, तो मेडिकल पास करने के पड़ाव तक नहीं पहुंचते। अब रिजल्ट का इंतजार इतना लंबा हो गया कि बहुत से अभ्यर्थी, भर्ती के लिए तय आयु सीमा से ऊपर चले गए। ऐसे में उनके पास दूसरा चांस भी नहीं बच सका। अमिता सलाम, काजल और पुष्पम ने कहा, हमारा क्या कसूर था। दूसरा चांस होता तो हम कोशिश भी करते। दो साल से सड़कों पर हैं। एक ही मांग है कि मेडिकल पास अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाए। पहले दिल्ली में आंदोलन किया। पुलिस की मार पड़ी। थाने में बैठाया गया। खास बात यह है कि ये सब तब हुआ, जब यह आंदोलन शांतिपूर्वक तरीके से किया जा रहा था। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर सांसदों तक को ज्ञापन सौंपा गया।

SSC GD 2018: UP police misbehaved with candidates marching from Nagpur to Delhi for recruitment in CAPF
SSC GD 2018: प्रदर्शन करते अभ्यर्थी - फोटो : Amar Ujala

हम 140 साथी हैं, इनमें 24 लड़कियां भी हैं…

उम्मीद थी कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, न्याय दिलाएंगे। जब ये नहीं हुआ तो नागपुर में आमरण अनशन पर बैठ गए। भूख से जब दर्जनों साथियों की हालत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। किसी तरफ जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो एक बार फिर से आंदोलन की राह पकड़ ली। इस बार नागपुर से दिल्ली तक पैदल मार्च है। शरीर को जला देने वाली 47 डिग्री गर्मी में अभ्यर्थी एक जून से पैदल चल रहे थे। तमाम मुसीबतें झेलते हुए आगे बढ़ रहे थे। हम 140 साथी हैं। इनमें 24 लड़कियां भी हैं। आगरा पुलिस ने हमें बहुत परेशान किया। पांच-छह दिन तक इधर-उधर दौड़ाते रहे। वहां से छूटे तो मथुरा में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

तिरंगा झंडा नहीं उठाना है, इसे अंदर रख लो…

पुलिस ने कहा, तिरंगा झंडा हाथ में नहीं उठाना है। इसे अंदर रख लो। घंटों तक धूप में बैठाए रखा। रात हुई तो कहा, अब चलना शुरू करो। महिला अभ्यर्थियों ने पुलिस से कहा, वे रात को कैसे चलेंगे। दिन में कुछ खाया नहीं और अब कह रहे हैं कि सुबह होने से पहले यूपी की सीमा से पार हो जाओ। अगर हमारे पास वाहन होता तो वह भी सोचा जा सकता था, लेकिन अभ्यर्थियों को तो पैदल दिल्ली तक जाना है। पुलिस ने उन्हें रात में पैदल चलने को मजबूर किया।

मथुरा में पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें रोक कर कहा, ये उत्तर प्रदेश है, यहां से पूरा देश चलता है। यहां 80 सीटें हैं। यहीं राम जन्मभूमि है, यहीं कृष्ण जन्मभूमि है। यहां का माहौल भी अलग है। तुम्हारे यहां की पुलिस तो हमारे यहां होमगार्ड है। हम इंस्पेक्टर हैं। यहां सब कानून के अनुसार ही होता है, ये सब कह कर अभ्यर्थियों को डराया धमकाया गया।

विपक्ष भी उठा रहा अभ्यर्थियों की आवाज

विपक्षी दलों के अनेक नेताओं, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, जयंत चौधरी, दीपेंद्र हुड्डा समते कई लोगों ने एसएससीजीडी 2018 के अभ्यर्थियों की आवाज बुलंद की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। वे अपने शरीर को ही कष्ट दे रहे हैं। दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। उम्मीद है कि वे अभ्यर्थियों के हालात देखकर उन्हें सीएपीएफ की वर्दी प्रदान करेंगे। बीच में कई बार पुलिस ने भी इन अभ्यर्थियों की बात गृह मंत्रालय में कराने का कोरा आश्वासन दिया था। अगले सप्ताह तक इन अभ्यर्थियों के दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।

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