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श्री राम मंदिर का डिजाइन दिव्यांगों के लिए भी हो अनुकूल, निर्माण समिति के अधिकारियों को लिखा पत्र

Wed, 19 Aug 2020 03:45 AM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 19 Aug 2020 03:45 AM IST
सार

  • कोई भी धार्मिक स्थल ‘पब्लिक प्लेस’ की परिभाषा में आता है जिसे नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए भी सुलभ बनाना है अनिवार्य 
  • दिल्ली के निःशक्त जन आयुक्त ने सभी धार्मिक स्थलों को दिव्यांग जन सुलभ बनाने के दिए थे निर्देश, कुछ ही खरे उतरे मानकों पर

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Sri Ram Temple Design Should Be Favorable For Differently Abled Too, Letter Written To Officials Of Construction Committee
ram temple ayodhya - फोटो : पीएमओ ट्विटर अकाउंट

विस्तार

अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। दिल्ली के पूर्व निःशक्त जन आयुक्त टीडी धारियाल ने मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख पदाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि राम मंदिर को दिव्यांगजनों के लिए भी सुलभ बनाया जाए। 

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उन्होंने कहा है कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद देश-विदेश से करोड़ों लोग राम मंदिर का दर्शन करने आएंगे, जिनमें विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगजन भी शामिल हो सकते हैं। इसे देखते हुए इस भव्य भवन को सभी दिव्यांगों के लिए सुलभ होना आवश्यक है। 
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सभी धार्मिक स्थल ‘पब्लिक प्लेस’ की परिभाषा में आते हैं जिन्हें ‘दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016’ के अंतर्गत सभी दिव्यांगों के लिए सुलभ बनाया जाना अनिवार्य होता है। सेंटर फॉर एक्सेसिबिलिटी इन बिल्ट एनवायरमेंट फाउंडेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर टीडी धारियाल ने कहा कि इसके पूर्व एक निरीक्षण में यह बात सामने आई थी कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में स्थित ज्यादातर धार्मिक स्थल दिव्यांगों के लिए अनुकूल नहीं बने हुए हैं। 
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इनका दौरा करने के बाद उन्होंने पाया था कि कई धार्मिक स्थलों के निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया था। इसके बाद उन्होंने सभी धार्मिक स्थलों को दिव्यांगों के लिए अनुकूल बनाए जाने का निर्देश दिया था। गुरुद्वारा बांग्लासाहिब और गुरुद्वारा शीश गंज दिव्यांगजनों के लिए पूर्ण अनुकूल पाए गए थे। 

क्या है दिव्यांगों के लिए सार्वजनिक भवनों का अनुकूलन 
कुछ दिव्यांगजन सामान्य लोगों की तरह सीढ़ियां चढ़ने में सक्षम नहीं होते हैं तो कुछ को भारतीय डिजाइन में बने बाथरूम के उपयोग में परेशानी होती है। इसे देखते हुए नियम बनाया गया है कि सार्वजनिक भवनों के प्रवेश द्वार से लेकर स्थल की सभी प्रमुख जगहों तक रैंप बनाया जाना चाहिए।


लिफ्ट भी दिव्यांगजनों के सुगम प्रवेश और निकास में सक्षम होने चाहिए। शौचालयों के निर्माण में भी विशेष तकनीकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे दिव्यांगजनों को कोई असुविधा न हो। ऐसे शौचालयों के निर्माण के दौरान सपोर्टिंग रॉड का होना भी अनिवार्य होता है।

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