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श्रीलंका: संसद के उपाध्यक्ष पद के लिए हुए गुप्त मतदान में विपक्ष की हार, राजपक्षे सरकार हुई और मजबूत
Thu, 05 May 2022 09:17 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 05 May 2022 09:17 PM IST
सार
श्रीलंका में बृहस्पतिवार को संसद के उपाध्यक्ष पद के लिए गुप्त मतदान के जरिये हुए चुनाव में सरकार समर्थित उम्मीदवार को जीत मिली। डिप्टी स्पीकर पद के चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार की हार के बाद श्रीलंका की राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार और मजबूत हुई है।
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महिंदा राजपक्षे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीलंका में संकटों का सामना कर रहे राजपक्षे परिवार के नेतृत्व वाली सरकार को डिप्टी स्पीकर चुनाव में मजबूती मिली है। गुरुवार को संसद में उपसभापति के पद के लिए हुए चुनाव में सरकार समर्थित उम्मीदवार ने अहम वोट हासिल किया। इसे संकटग्रस्त राजपक्षे परिवार के लिए अहम जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
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इस जीत से सत्तारूढ़ एसएलपीपी गठबंधन की संसद में बहुमत साबित करने की क्षमता भी प्रतिबिंबित होती है। गौरतलब है कि इस समय श्रीलंका आर्थिक संकटों का सामना कर रहा है। जिसके लिए श्रीलंका में सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं।
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संसद के उपाध्यक्ष पद के लिए गुप्त मतदान के जरिये हुए चुनाव में सांसद रंजीत सियामबालापितिया को फिर से उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया। इस चुनाव में 225 में से 148 सांसदों ने उनके पक्ष में मतदान किया, जबकि उनके विरोधी इम्तियाज बाकीर मरकर को केवल 65 वोट मिले।
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सियामबालापितिया पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) के सदस्य हैं। जब उनकी पार्टी ने सरकार से अलग होने का फैसला किया था। तब उन्होंने अपने पद से इसलिए इस्तीफा दे दिया था। चुनाव के बाद संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अबेयावर्दने ने घोषणा की कि सियामबालापितया को संसद के उपाध्यक्ष पद पर 65 के मुकाबले 148 मतों से चुना गया है जबकि तीन मतों को अमान्य करार दिया गया। साथ ही असंतुष्ट सरकार के सदस्य विमल वीरावांसा सहित छह सांसद वोट के दौरान अनुपस्थित रहे।
एसएलएफपी के सरकार से अलग होने के बावजूद सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदजना पेरामुना (एसएलपीपी) ने सियामबालापितिया का समर्थन किया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार का सदन में बहुमत बरकरार है। उपाध्यक्ष पद पर दोबारा निर्वाचित होने के बाद सियामबालापितिया ने कहा कि उन्हें पहले से ही सर्वसम्मति से निर्वाचित होने की उम्मीद थी।
इस दोरान मुख्य विपक्षी नेता सजीथ प्रेमदासा ने कहा कि उन्होंने इम्तियाज बाकीर मरकर को अपना प्रत्याशी बनाने का फैसला किया क्योंकि उन्हें पता था कि सत्तारूढ़ एसएलपीपी सियामबालापितिया का गुप्त मतदान के दौरान समर्थन करेगी। इस दौरान प्रेमदासा ने सियामबालापितिया पर आरोप भी लगाए। उन्होंने सियामबालापितिया को 'सरकार की कठपुतली' बताया। वहीं राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि उपाध्यक्ष पद के चुनाव से महिंदा राजपक्षे की स्थिति दोबारा मजबूत हुई है।