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BRS-BJP Tie-Up Speculation: क्या तेलंगाना में होने जा रहा बीआरएस-भाजपा का गठबंधन? KCR के रुख के बाद अटकलें तेज

Sat, 24 May 2025 09:45 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 24 May 2025 09:45 AM IST
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BRS-BJP Tie-Up Speculation: Telangana Heading Towards BRS and BJP Alliance News in Hindi
केसीआर और के.कविता - फोटो : ANI
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भारत राष्ट्र समिति के नेता के. कविता ने अपने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को एक पत्र लिखा। आमतौर पर एक बेटी का अपने पिता को पत्र लिखा सामान्य सी बात है, लेकिन इस स्थिति ने तेलंगाना की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया। कहा जा रहा है कि कविता ने केसीआर को एक हस्तलिखित फीडबैक पत्र लिखा था। इसमें पार्टी की हालिया बैठक को लेकर फायदेमंद और नुकसानदायक पहलुओं को उजागर किया गया था। इसमें भाजपा और बीआरएस के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों का भी जिक्र था। अब इस पत्र लीक होने से तेलंगाना के राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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पहले जानिए कविता के खत में क्या?
कविता ने तेलुगु और अंग्रेजी में लिखे पत्र में लिखा, 'जैसा कि आपने (केसीआर) सिर्फ दो मिनट बात की और भाजपा पर भी चुप ही रहे, इससे कुछ लोगों ने अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि भविष्य में पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन होगा। मुझे तो यहां तक लगा कि आपको भाजपा के खिलाफ मजबूती से बोलना चाहिए था। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि मुझे भाजपा के कारण तकलीफ हुई है, आपको भाजपा पर और निशाना साधना चाहिए था, डैडी।' 
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खत के बाद अटकलें क्यों लगने लगीं?
इस पूरे वाकये के के सामने आने के कई घंटे बीत जाने के बावजूद विपक्षी पार्टी ने इसका खंडन नहीं किया। बीआरएस एमएलसी कविता के कार्यालय की ओर से भी तत्काल टिप्पणी नहीं की गई। चूंकि, कविता वर्तमान में अपने बेटे के स्नातक समारोह में भाग लेने के लिए अमेरिका में थीं, इस वजह से उनकी प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि, देर रात देश वापस लौटते ही उन्होंने पत्र लीक होने पर आश्चर्य जताया और कहा कि केसीआर भगवान जैसे हैं, जो शैतानों से घिरे हुए हैं। पार्टी को सही दिशा में लाने के लिए जरूरी कदमों की जरूरत है।
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कविता को क्यों लिखना पड़ा खत?
दरअसल, बीआरएस ने 27 अप्रैल को वारंगल में अपनी रजत जयंती मनाई। इस दौरान केसीआर से कुछ मिनटों में ही अपना संबोधन खत्म कर दिया। इस दौरान उन्होंने कई अहम मुद्दों पर बात नहीं की। उन्होंने भाजपा पर भी खुलकर हमला नहीं बोला।

केसीआर की चुप्पी पर कविता ने क्या कहा? 

  • कविता ने बैठक में पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण, वक्फ संशोधन अधिनियम और अपने संबोधन में उर्दू को शामिल न करने जैसे प्रमुख मुद्दों पर के. चंद्रशेखर राव की चुप्पी पर सवाल उठाए।
  • पत्र में उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार ने जमीनी स्तर पर अपना समर्थन खो दिया है और कुछ बीआरएस कार्यकर्ता अब भाजपा को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखते हैं।
  • कविता ने कहा कि जब बीआरएस ने हाल ही में एमएलसी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया, तो इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को एक मजबूत संकेत गया कि वे भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं।
  • उन्होंने पूर्व सीएम से निर्णायक रूप से कार्य करने का आग्रह करते हुए कहा कि सभी को उम्मीद थी कि आप राजनीतिक परिदृश्य को संबोधित करने के लिए विशिष्ट कार्यक्रम या दिशा-निर्देश देंगे। कम से कम अब हम एक या दो दिनों के लिए पूर्ण अधिवेशन आयोजित कर सकते हैं। कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक राय लें और उन्हें दिशा-निर्देश दें। 
  • पत्र में यह भी चिंता व्यक्त की गई कि कुछ तेलंगाना आंदोलन कार्यकर्ताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया और वारंगल कार्यक्रम के दौरान उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। 
  • उन्होंने अपने पिता की 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए उनके रुख के लिए प्रशंसा की और पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के लिए मौन रखने के पल को सराहा। उन्होंने वारंगल बैठक की सफलता पर उन्हें बधाई देकर समापन किया।


बीआरएस एमएलसी ने क्या कहा?
इस बीच बीआरएस एमएलसी श्रवण दासोजू ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि कविता ने वर्तमान में पत्र लिखा है या नहीं। भले ही उन्होंने इसे लिखा हो, लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि पत्र प्रतिक्रिया था। उन्होंने कहा कि बेटी की ओर से पिता को या नेता की ओर से सर्वोच्च नेता को दिया जाने वाला यह एक बहुत ही सामान्य फीडबैक है। यह पत्र लोगों से मिले फीडबैक को एकत्र करने और आगे बढ़ाने जैसा है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कि पत्र पार्टी में आंतरिक दरार का संकेत देता है? दासोजू ने कहा कि धान खरीद और बेरोजगारी जैसे अन्य मुद्दे भी हैं, जो लोगों के लिए अधिक प्रासंगिक हैं। 

सत्तारूढ़ कांग्रेस का रुख, बीआरएस और भाजपा के बीच मौन सहमति को उजागर
कविता के कथित पत्र के बारे में बोलते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायक बीरला इलैया यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कविता ने स्वीकार किया है कि केसीआर ने अपने भाषण में अल्पसंख्यकों और उर्दू भाषा को नजरअंदाज किया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा करके उन्होंने बीआरएस और भाजपा के बीच मौन सहमति को उजागर किया है। इलैया यादव ने संवाददाताओं से पूछा, 'पिछली बीआरएस सरकार के दौरान पिछड़े वर्गों, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों की अनदेखी किए जाने पर कविता चुप क्यों रहीं?' 



भाजपा ने क्या कहा?
इस बीच विधानसभा में भाजपा के नेता ए. महेश्वर रेड्डी ने एक वीडियो बयान में दावा किया कि कविता का पत्र केसीआर के परिवार के भीतर गलत तरीके से अर्जित धन और सत्ता के वितरण को लेकर विवाद का परिणाम है।

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