नया ठिकाना: तिहाड़ की जेल नंबर-सात में कटी चिदंबरम की रात, खाई दाल-रोटी
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आईएनएक्स मीडिया मामले में आरोपी पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल संख्या सात के सेल नंबर 15 में रखा गया है। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बृहस्पतिवार शाम वह तिहाड़ जेल पहुंचे। जेल संख्या चार के रास्ते उन्हें तिहाड़ जेल परिसर में दाखिल कराया गया। मेडिकल जांच से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें जेल संख्या सात के सेल में भेज दिया गया।
जेल नियम के अनुसार सुबह सात से आठ बजे उन्हें नाश्ता दिया जाएगा। 12 बजे खाना व चार बजे चाय और सात से आठ के बीच रात का खाना दिया जाएगा। दिन में उन्हें सिर्फ डेढ़ घंटे तक टीवी देखने की इजाजत होगी।
बृहस्पतिवार रात चिदंबरम ने जेल में दाल रोटी खाया। तिहाड़ जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक राजकुमार ने बताया कि अदालत से मिले निर्देश के अलावा चिदंबरम को सामान्य कैदी की तरह ही जेल में रखा गया है। सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें बैरक की जगह सेल में रखा गया है। फिलहाल वह सेल में अकेले रहेंगे।
रात करीब पौने आठ बजे दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन चिदंबरम को वैन में लेकर तिहाड़ के मुख्य परिसर में दाखिल हुई। जेल परिसर पहुंचने के बाद उन्हें सबसे पहले मेडिकल के लिए ले जाया गया। तमाम प्रक्रिया को पूरा करने के बाद उन्हें करीब नौ बजे उनके सेल में भेजा गया। सेल में फिलहाल उनके साथ किसी अन्य कैदी को नहीं रखा गया है। सेल में ही एक बाथरूम है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो दो और कैदियों को सेल में जगह दी जा सकती है। जेल संख्या सात में सात सौ कैदी है।
पहले से जेल प्रशासन ने कर रखी थी तैयारी
जेल के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक चिदंबरम को तिहाड़ जेल में रखने की तैयारी पहले से कर ली गई थी। शुरूआत में प्रशासन ने उन्हें रोहिणी जेल भेजने का फैसला किया था। लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए उन्हें तिहाड़ जेल संख्या सात में रखने का फैसला किया गया।ईडी को भी नोटिस जारी
अदालत ने चिदंबरम की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय को भी नोटिस जारी किया। इस याचिका में एजेंसी की ओर से दर्ज किये गए धन शोधन के मामले में कांग्रेस नेता ने आत्मसमर्पण करने की मांग की थी । इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने, दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले को चुनौती देने वाली चिदंबरम की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया गया था ।सीबीआई की दो दिन की हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद गुरूवार को चिदंबरम (73) को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया था।
कांग्रेस नेता की 15 दिन की सीबीआई हिरासत की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही थी। विशेष अदालत ने उन्हें पांच चरणों में 15 दिनों के लिए सीबीआई हिरासत में भेजा था, जो 21 अगस्त की रात को उनकी गिरफ्तारी के साथ शुरू हुआ था।
चिदंरबम के अधिवक्ता ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की सीबीआई की दलीलों का विरोध किया और कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता घोटाले के कारण पैदा हुए धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में जाने के लिए तैयार हैं, जिसमें शीर्ष अदालत ने गुरुवार को उन्हें अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है ।
चिदंबरम को आज विशेष अदालत में पेश किया गया। इससे कुछ ही घंटे पहले कांग्रेस नेता ने उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली थी । गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के बाद चिदंबरम को सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था।
चिदंबरम के वकील उन्हें जेल नहीं भेजने की दलील दे रहे थे लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के बाद चिदंबरम ने जेल में अलग सेल की मांग की। इसके अलावा उन्होंने बेड और अलग बाथरूम की भी मांग की जिन्हें मान लिया गया। उन्हें सात नंबर सेल में रखा जाएगा।
चिदंबरम की जेड सुरक्षा का ख्याल रखते हुए अदालत ने उन्हें अलग कोठरी में रखने के निर्देश दिए। सॉलिसीटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जेल में चिदंबरम के लिए पर्याप्त सुरक्षा होगी।
Delhi: Police bus parked inside Rouse Avenue Court, P Chidambaram is expected to be taken in this bus to Tihar Jail. Chidambaram is still inside Court. The Court has remanded him to judicial custody till September 19 in CBI case in INX media matter pic.twitter.com/2lxXKp06Nd
— ANI (@ANI) September 5, 2019
जेल भेजने का किया विरोध
पेशी के दौरान सीबीआई ने उन्हें जेल भेजने की मांग की थी। सरकारी वकील ने कहा कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। सीबीआई ने कहा कि चिदंबरम एक तकतवर नेता हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए ।चिदंबरम की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायिक हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि जांच को प्रभावित करने या उसमें किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने का कोई आरोप नहीं है। चिदंबरम के वकील ने कहा कि वह आईएनएक्स मीडिया से संबंधित धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में जाने के लिए तैयार हैं।
चिदंबरम और कार्ति को मिली राहत
इससे पहले आज पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को दिल्ली की विशेष अदालत से राहत मिली है। उन्हें एयरसेल-मैक्सिस मामले में अग्रिम जमानत मिल गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच कर रहे हैं। हालांकि इस राहत से चिदंबरम को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वह पहले से ही आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई की हिरासत में हैं। वहीं उनके बेटे से कोई भी जांच एजेंसी इस समय पूछताछ नहीं कर रही है। इसलिए अग्रिम जमानत मिलना कार्ति के लिए राहत वाली बात है।
क्या है एयरसेल-मैक्सिस मामला
2006 में 3500 करोड़ रुपये की एफडीआई वाली एयरसेल-मैक्सिस डील को पी. चिदंबरम की मंजूरी मिल गई। बताया जाता है कि यह सूचना कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स, सेबी और डायरेक्टर ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस से होती हुई पीएमओ तक बात पहुंच गई थी। इनमें से किसी ने भी डील पर सवाल नहीं उठाया। इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एक साल बाद 2007 में आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपए के विदेशी फंड लेने की एफआईपीबी मंजूरी देने में कथित रूप से अनियमित्ताएं सामने आ गई।सुब्रमण्यम स्वामी ने किया था खुलासा
साल 2015 में जब सुब्रमण्यम स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की विभिन्न कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया, तो इस मामले से भी पर्दा उठ गया। स्वामी ने सार्वजनिक तौर पर पी. चिदंबरम पर यह आरोप लगा दिया कि उन्होंने बतौर वित्तमंत्री रहते हुए अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को एयरसेल-मैक्सिस डील के जरिए फायदा लेने में मदद की है। इसके लिए न केवल दस्तावेजों की प्रक्रिया रोकी गई, बल्कि कुछ समय के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया को भी नियंत्रित कर दिया गया। यह सब इसलिए किया गया ताकि कार्ति चिदंबरम को अपनी कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने का वक्त मिल जाए।जहां एयरसेल मैक्सिस मामले में चिदंबरम को राहत मिली उच्चतम न्यायालय से उन्हें झटका मिला। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज आईएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत नहीं देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली चिदंबरम की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा, 'प्रारंभिक चरण में अग्रिम जमानत देने से जांच पर विपरीत असर पड़ सकता है। यह अग्रिम जमानत देने के लिए सही केस नहीं है। आर्थिक अपराध अलग-अलग स्तर पर हैं और इसे अलग दृष्टिकोण के साथ निपटाना चाहिए। जांच एजेंसी को मामले की छानबीन करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।'
याचिका ली वापस
याचिका खारिज होने के बाद चिदंबरम ने सीबीआई द्वारा दर्ज आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में निचली अदालत के गैर जमानती वारंट, हिरासत संबंधी आदेशों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। उनके वकील एएम सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि हमने बिना शर्त याचिका वापस लेने का निर्णय किया है।