ISRO: 'लॉन्च पैड पर ले जाया गया स्पैडेक्स मिशन का प्रक्षेपण यान', जानें इसरो के इस मिशन का क्या है उद्देश्य?
ISRO: 9 दिसंबर को पीएसएलवी-सी59/प्रोबास-3 मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद, इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव, एस सोमनाथ ने कहा कि दिसंबर में ही पीएसएलवी-सी60 के प्रक्षेपण के साथ एक समान मिशन आने वाला है। सोमनाथ ने कहा, 'यह (पीएसएलवी-सी60 मिशन) स्पैडेक्स नामक अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन करने जा रहा है।
विस्तार
🚀 PSLV-C60/SPADEX Update:
— ISRO (@isro) December 21, 2024
The launch vehicle has been integrated and now moved to the First Launch Pad, for further integration of satellites and launch preparations.
Stay tuned for updates on #PSLV-C60 and watch this space for exciting info on the upcoming PSLV-C60/SPADEX… pic.twitter.com/HNUW1SnUdG
दो छोटे अंतरिक्ष यान का किया जाएगा इस्तेमाल
इसरो ने कहा कि स्पैडेक्स मिशन पीएसएलवी की तरफ से प्रक्षेपित दो छोटे अंतरिक्ष यान का उपयोग करके 'अंतरिक्ष में डॉकिंग' के प्रदर्शन के लिए एक लागत प्रभावी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन है। इसरो ने कहा कि यह तकनीक भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं जैसे कि चंद्रमा पर भारतीय मिशन, चंद्रमा से नमूना वापस लाना, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) का निर्माण और संचालन के लिए आवश्यक है।
🚀 SpaDeX Mission: A Leap Towards India's Space Ambitions 🌌
— ISRO (@isro) December 21, 2024
ISRO’s SpaDeX mission, launching with PSLV-C60, will demonstrate in-space docking using two small spacecraft. This groundbreaking technology is key to future lunar missions, building Bharatiya Antariksh Station (BAS),… pic.twitter.com/hEHZ7M0zi2
अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन के लिए मिशन
अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक तब आवश्यक होती है जब सामान्य मिशन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कई रॉकेट लॉन्च की आवश्यकता होती है। इस मिशन के माध्यम से, भारत अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक रखने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है। 9 दिसंबर को पीएसएलवी-सी59/प्रोबास-3 मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद, इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव, एस सोमनाथ ने कहा कि दिसंबर में ही पीएसएलवी-सी60 के प्रक्षेपण के साथ एक समान मिशन आने वाला है। सोमनाथ ने कहा, 'यह (पीएसएलवी-सी60 मिशन) स्पैडेक्स नामक अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन करने जा रहा है। रॉकेट अब तैयार है और हम प्रक्षेपण की ओर ले जाने वाली गतिविधियों के अंतिम चरण के लिए तैयार हो रहे हैं, संभवतः दिसंबर में ही।'
गोलाकार कक्षा में लॉन्च किया जाएगा मिशन
इसरो के अनुसार, स्पैडेक्स मिशन में दो छोटे अंतरिक्ष यान (प्रत्येक लगभग 220 किलोग्राम) शामिल हैं जिन्हें पीएसएलवी-सी60 की तरफ से स्वतंत्र रूप से और एक साथ, 55 डिग्री झुकाव पर 470 किमी की गोलाकार कक्षा में लॉन्च किया जाएगा, जिसमें लगभग 66 दिनों का स्थानीय समय चक्र होगा। स्पष्टीकरण में कहा गया कि स्पैडेक्स मिशन को दो छोटे अंतरिक्षयानों (एसडीएक्स01, जो कि चेजर है, और एसडीएक्स02, जो कि नाममात्र का टारगेट है) के पृथ्वी की निचली वृत्ताकार कक्षा में मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी को विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए शुरू किया गया था।