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Kharif: मानसून के आगमन से कपास-सोयाबीन की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार; पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है कुल रकबा
Fri, 10 Jul 2026 04:58 AM IST
अमन तिवारी
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 10 Jul 2026 04:58 AM IST
सार
दक्षिण पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंचने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ गई है। कपास और सोयाबीन की खेती ने रफ्तार पकड़ी है। कृषि मंत्रालय और सोपा के अनुसार, अच्छी बारिश से किसानों का रुझान बढ़ा है और उत्पादन संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दक्षिण पश्चिम मानसून अब पूरे देश में पहुंच गया है। 9 जुलाई को यह राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के शेष हिस्सों और उत्तरी अरब सागर में आगे बढ़ गया, जिससे इसका देशव्यापी प्रसार पूरा हो गया। इसके साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
अच्छी बारिश के चलते पिछले साल से 23 फीसदी पीछे चल रही कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। पांच जुलाई तक कपास का कुल रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो गई थी। बीते हफ्ते तक पिछड़ने के बाद अब गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कपास की बुवाई में तेजी आई है। कुछ इलाकों में किसान धान छोड़कर कपास और दालों की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इनमें बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, साल 2025-26 के लिए कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की) रहा, जो 2024-25 में हुए 297.24 लाख गांठ के उत्पादन से कम है।
सोयाबीन का 90 फीसदी क्षेत्र कवर
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक, मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन का रकबा 1.003 करोड़ हेक्टेयर होने का अनुमान है। इसने प्रमुख राज्यों में कुल लक्ष्य क्षेत्र के करीब 80 से 90 फीसदी हिस्से को कवर कर लिया है।
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अच्छी बारिश के चलते पिछले साल से 23 फीसदी पीछे चल रही कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। पांच जुलाई तक कपास का कुल रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो गई थी। बीते हफ्ते तक पिछड़ने के बाद अब गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कपास की बुवाई में तेजी आई है। कुछ इलाकों में किसान धान छोड़कर कपास और दालों की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इनमें बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, साल 2025-26 के लिए कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की) रहा, जो 2024-25 में हुए 297.24 लाख गांठ के उत्पादन से कम है।
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सोयाबीन का 90 फीसदी क्षेत्र कवर
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक, मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन का रकबा 1.003 करोड़ हेक्टेयर होने का अनुमान है। इसने प्रमुख राज्यों में कुल लक्ष्य क्षेत्र के करीब 80 से 90 फीसदी हिस्से को कवर कर लिया है।
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- सरकारी अनुमानों के अनुसार, अब तक 57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई पूरी की जा चुकी है।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान में करीब 90 फीसदी हिस्से में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। महाराष्ट्र में यह लक्षित क्षेत्र के लगभग 80-90 फीसदी तक पहुंच गई है। सोपा का मानना है कि 2026 खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन का कुल रकबा पिछले साल के स्तर को पार करने की संभावना है।