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रजनीकांत ने फिर किया इशारा, कहा- राजनीति में आने का हूं इच्छुक
amarujala.com- Presented by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 19 Jun 2017 06:27 PM IST
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साउथ की फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने चेन्नई स्थित अपने निवास पोएस गार्डन में हिंदू मक्काल काची के नेता अर्जुन संपथ और जनरल सेक्रेटरी रविकुमार से मुलाकात की। सोमवार को हुई यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रजनीकांत के लंबे समय से चली आ रही राजनीति में शामिल होने की चर्चा अब हकीकत में बदलने वाली है। संपथ ने इस बैठक के बाद बताया कि रजनीकांत राजनीति में कदम रखने के इच्छुक हैं।
एंक घंटे चली इस बैठक में संपथ ने कहा कि तमिलनाडु की जनता द्रविड़ों के पिछले 50 सालों के अत्याचारों के तले दबी हुई है। उन्होंने कहा, "हम रजनीकांत का समर्थन कर रहे हैं। हमारी अपील है कि वह राजनीति में आएं और तमिलनाडु का भला करें।"
वहीं, एक्टर रजनीकांत ने कहा कि वे भी राजनीति में आने के लिए लंबे समय से विचार कर रहे थे। रजनीकांत ने आगे कहा कि अगर वे राज्य के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे तो वे खुद को इसका दोषी मानेंगे। इसलिए वे कहते है कि वे अपनी हिमालय और प्रायद्वीपीय नदियों को जोड़ने की परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहते हैं लेकिन ऐसा राजनीति में आने के बाद ही संभव हो पाएगा।
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बैठक में रजनीकांत और संपत के बीच अध्यात्मिकता को लेकर भी बात चली जिसमें तमिल संतों (नयरनार और अलवर) पर चर्चा हुई। स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती और दयानंद सरस्वती के बारें में भी बाते की और कहा कि रजनीकांत दयानंद के बहुत बड़े शिष्य हैं।
बता दें कि इससे पहले रजनीकांत से मुलाकात के बाद हिंदू मक्काल काची के नेता पिछले दिनों से हो रही है चर्चा और फैन्स से मुलाक़ात में रजनीकांत के बयान के बाद इस बात को और बल मिला। बाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा था कि तमिलनाडु में भाजपा कमजोर है यदि रजनीकांत राजनीति में आना चाहें तो पार्टी में उनका स्वागत है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा था कि पार्टी में रजनीकांत के लिए पहले से ही जगह तय है।
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एंक घंटे चली इस बैठक में संपथ ने कहा कि तमिलनाडु की जनता द्रविड़ों के पिछले 50 सालों के अत्याचारों के तले दबी हुई है। उन्होंने कहा, "हम रजनीकांत का समर्थन कर रहे हैं। हमारी अपील है कि वह राजनीति में आएं और तमिलनाडु का भला करें।"
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वहीं, एक्टर रजनीकांत ने कहा कि वे भी राजनीति में आने के लिए लंबे समय से विचार कर रहे थे। रजनीकांत ने आगे कहा कि अगर वे राज्य के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे तो वे खुद को इसका दोषी मानेंगे। इसलिए वे कहते है कि वे अपनी हिमालय और प्रायद्वीपीय नदियों को जोड़ने की परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहते हैं लेकिन ऐसा राजनीति में आने के बाद ही संभव हो पाएगा।
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बैठक में रजनीकांत और संपत के बीच अध्यात्मिकता को लेकर भी बात चली जिसमें तमिल संतों (नयरनार और अलवर) पर चर्चा हुई। स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती और दयानंद सरस्वती के बारें में भी बाते की और कहा कि रजनीकांत दयानंद के बहुत बड़े शिष्य हैं।
बता दें कि इससे पहले रजनीकांत से मुलाकात के बाद हिंदू मक्काल काची के नेता पिछले दिनों से हो रही है चर्चा और फैन्स से मुलाक़ात में रजनीकांत के बयान के बाद इस बात को और बल मिला। बाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा था कि तमिलनाडु में भाजपा कमजोर है यदि रजनीकांत राजनीति में आना चाहें तो पार्टी में उनका स्वागत है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा था कि पार्टी में रजनीकांत के लिए पहले से ही जगह तय है।