{"_id":"5b70c1bf42c7923975625031","slug":"soon-internet-domain-names-in-indian-regional-languages","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत में जल्द मिलने लगेंगे क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट डोमेन नेम ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत में जल्द मिलने लगेंगे क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट डोमेन नेम
ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता
Updated Mon, 13 Aug 2018 04:54 AM IST
विज्ञापन
i
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में इंटरनेट के डोमेन नेम अब तक अंग्रेजी में ही होते हैं लेकिन अब जल्दी ही भारतीय भाषाओं में भी ये उपलब्ध होंगे। इसके लिए पूरी दुनिया में इंटरनेट डोमेन नेम प्रणाली का प्रबंधन देखने वाला निगम ‘द इंटरनेट कारपोरेशन फार एसाइंड नेम्स एंड नंबर्स’ (आईसीएएनएन) भारतीय भाषाओं में डोमेन नेम विकसित करने की तैयारियों में जुटा है। इनमें देश की 22 आधिकारिक भाषाएं भी शामिल हैं।
विज्ञापन
भारत में आईसीएएनएन के प्रमुख समीरन गुप्ता ने बताया कि नौ भारतीय लिपियों बांग्ला, देवनागरी, गुजराती, गुरुमुखी, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, तमिल एवं तेलुगू पर काम चल रहा है। इन लिपियों से कई अन्य भाषाओं को भी कवर किया जा सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि निगम दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली लिपियों के लिए शीर्ष डोमेन को सुरक्षित और स्थिर रूप से परिभाषित करने के लिए नियम तय करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मकसद है कि अंग्रेजी नहीं जानने वाले लोग भी आनलाइन जाकर अपनी भाषा में डोमेन नेम लिखकर वांछित वेबसाइट को देख पाएं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि अभी भी दुनिया की 52 फीसदी आबादी तक ही इंटरनेट की पहुंच है। निगम इस डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिन 48 फीसदी लोगों की इंटरनेट तक पहुंच नहीं है उनमें से ज्यादातर गैर अंग्रेजी भाषी हैं। ये लोग अंग्रेजी में टाइप नहीं कर सकते हैं। जल्द ही ऐसे लोगों के लिए अपनी भाषा में काम करना आसान होगा।
भारत के अलावा दूसरे देशों के 60 से ज्यादा विशेषज्ञ जुटे
समीरन गुप्ता ने बताया कि क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट के डोमेन नेम के लिए काम करने वालों के गठित समूह में भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और सिंगापुर के 60 से ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञ और भाषाविद् शामिल हैं।