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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक नस दबाते ही तिलमिला उठी केंद्र सरकार

Mon, 04 May 2020 10:47 PM IST
मुकेश कुमार झा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Mon, 04 May 2020 10:47 PM IST
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Sonia Gandhi attacks Centre over migrants train fare
सोनिया गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : social media

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा के बाद गरीब, मजदूर का रेलवे और बस का किराया पार्टी की तरफ से देने का निर्णय लिया। सकारात्मक पहल के साथ सोनिया गांधी ने परोक्ष रूप से एक नस क्या दबाई, केन्द्र पूरी केन्द्र सरकार तिलमिला उठी। सोनिया गांधी की पहल पर शनिवार को ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार एक करोड़ रु. का चेक मुख्य सचिव को दे आए। रविवार सुबह पार्टी के संगठन महासचिवों ने सभी महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों से बात की और मुख्य सचिव के पास गरीबों, मजदूरों का किराया देने का पत्र देने, चेक देने को कहा। सोनिया, राहुल, प्रियंका, अहमद पटेल, रणदीप सुरजेवाला के ट्वीट आते गए और सोशल मीडिया पर केन्द्र सरकार पर दबाव बढ़ता चला गया।

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सुब्रामण्यम स्वामी......आनन-फानन में केन्द्र सरकार ने बदला निर्णय
कांग्रेस पार्टी के इस निर्णय की गंभीरता भाजपा के राज्यसभा सुब्रामण्यम स्वामी को समझते देर नहीं लगी। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री पीयुष गोयल से बात की। पीयुष गोयल से मंत्रणा के बाद स्वामी ने जानकारी सार्वजनिक की कि गरीब, मजदूरों के किराए का 85 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार, 15 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। भाजपा के तेज तर्रार प्रवक्ता सांबित पात्रा भी सक्रिय हुए। भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने तत्काल संज्ञान में लिया। सूत्र बताते हैं कि फोन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास भी पहुंचा। पार्टी के नेताओं ने मंत्रणा की। ऐसा माना जा रहा है कि अमित भाई (केन्द्रीय मंत्री) ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से भी चर्चा की। इसके बाद सभी भाजपा राज्य सरकारों ने निर्णय लेना शुरू कर दिया। 04 मई को म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आदेश जारी किया कि राज्य सरकार 15 प्रतिशत किराए का वहन करेगी। हालांकि कांग्रेस शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री ने दावे के साथ कहा कि पहले तो यह किराया गरीब, मजदूरों को ही भरने की जानकारी थी। खैर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान की सरकारों ने भी गरीब, मजदूरों के किराए का खर्च वहन करने की घोषणा कर दी।
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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का बयान महत्वपूर्ण है
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने गरीब, मजदूरों से किराया वसूलने के सवाल पर शनिवार को ही एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र को बताया था कि वह(रेलवे) मुफ्त यात्रा की आदत नहीं डालना चाहता। समझा जा रहा है कि विनोद कुमार यादव का यह निर्णय केवल उनके बस की बात नहीं है। इसमें रेलमंत्री पीयुष गोयल और उच्च स्तर पर मिली अनुमति जरूर शामिल रही होगी। रविवार को सुबह से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और रेल मंत्री पीयुष गोयल से संपर्क की हर कोशिश बेकार गई। यहां तक कि केन्द्र  सरकार ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को नहीं घेरा।

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कांग्रेस के लिए राहत भरा दिन

रविवार को सुबह कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से सरकार के निर्णय को लेकर काफी तीखे सवाल हुए, लेकिन वेणुगोपाल ने कहा कि यह समय सरकार की आलोचना का नहीं है। उन्होंने केवल इतना कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। उन्होंने इस प्रयास को कांग्रेस पार्टी के रचनात्मक, सकारात्मक सहयोग से जोडऩे की कोशिश की। मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने जरूर रेलवे द्वारा पीएम केयर फंड में रेलवे द्वारा दिए 151 करोड़ रुपये का तंज कसा, वेणुगोपाल ने भी इसकी याद दिलाई, लेकिन बहुत आलोचनात्मक नहीं हुए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का संदेश भर पढ़कर सुनाया। थोड़ी देर बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने वीडियो संदेश भी दे दिया।

सरकार के मंत्रियो ने अढ़ी खामोशी.....नहीं मिली राहुल को ट्यूशन पढऩे की सलाह
बड़े दिन बाद कांग्रेस पार्टी के पास इतना सुंदर दिन आया। गरीब, मजदूर का किराया भरने का निर्णय लेकर पार्टी ने सत्ता पक्ष का मुंह बंद करा दिया। राहुल गांधी के आक्रामक ट्वीट पर भी केन्द्र सरकार के मंत्री आज खामोश रहे। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को कोई ट्यूशन पढऩे की सलाह नहीं दी। केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अपने चित परिचित अंदाज में नहीं आए। भाजपा के नेताओं ने भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कोई बड़ा मोर्चा नहीं खोला। सोशल मीडिया पर भाजपा ब्रिगेड पूरी तरह से रक्षात्मक बनी रही। पहली बार सत्ता पक्ष की तरफ से बहुत रचनात्मक सुझाव आया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष से अपील की कि वह अपनी राज्य सरकारों से किराए का 15 प्रतिशत हिस्सा देकर सहयोग देने को कहे।

जीएसटी का भुगतान मिला नहीं.....15 प्रतिशत का अर्थ क्या है?
कांग्रेस शासित राज्य के एक मुख्यमंत्री की सुन लीजिए। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने फैसला लिया है। पार्टी गरीब, मजदूरों के किराए का खर्च वहन करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी गरीब, मजदूरों के लिए हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन केन्द्र का किराए का 15 प्रतिशत हिस्सा मांगना अनुचित है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सभी राज्य तीन-चार बार प्रधानमंत्री जीएसटी का पिछला भुगतान मांग रहे हैं, राज्यों में कोई व्यवसायिक गतिविधियां चल नहीं रही हैं, सरकारी कर्मियों को तनख्वाह देने, कोविड-19 संक्रमण से निबटने का फंड नहीं है, ऊपर से केन्द्र सरकार नया बोझ डाल रही है?

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