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सोनिया ने पार्टी को फिर याद दिलाया, राहुल ही कांग्रेस के असली बॉस
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Feb 2018 09:08 AM IST
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सोनिया गांधी, राहुल गांधी
- फोटो : PTI
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राजनीति में बहुत कुछ कहा नहीं जाता। बस संदेश ही काफी है। शनिवार को हुई कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में यूपीए चेयरपर्सन और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बार फिर इशारों इशारों में पूरा संदेश दे दिया है। नये और पुराने सभी कांग्रेसियों को सोनिया ने इसका एहसास करा दिया है कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के असली बॉस हैं।
सोनिया सिर्फ विरोध दर्ज करा सकती हैं
इससे पहले भी सोनिया ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना भी बॉस बताया था। कुल मिलाकर कवायद पार्टी, इसके संगठनों, विभागों, नेताओं, कार्यकताओं और देश के अन्य राजनीतिक दलों को भी संदेश देने की है। संदेश का पर्याय यह है कि राहुल गांधी ही मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस का नेतृत्व करेंगे। सोनिया सिर्फ उन्हें सलाह, सुझाव ही दे सकती है। मानना और न मानना दोनों राहुल के हाथ में है। सोनिया उनसे सिर्फ शिकायत या अपना विरोध ही दर्ज करा सकती हैं। इसका एक संदेश यह भी है कि कांग्रेस अब बदलने जा रही है। यह बदलाव आमूल-चूल हो सकता है और इसके लिए सभी को मानसिक रुप से अपनी तैयारी कर लेनी चाहिए।
स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में
स्टीयरिंग कमेटी की बैठक का आयोजन ताजा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ 16-18 मार्च को प्रस्तावित प्लेनरी सेशन पर चर्चा के लिए हुए था। इस में नीरव मोदी धोखाधड़ी प्रकरण, किसान, जम्मू-कश्मीर में सीमा की स्थिति, पाकिस्तान, चीन और पड़ोसी देशों के साथ संबंध समेत अन्य पर चर्चा हुई। बजट अवकाश के बाद मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हो रहे संसद के सत्र पर भी चर्चा हुई। इससे पहले राहुल गांधी ने भावी कांग्रेस का खाका खींचना शुरू किया। बैठक में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ और कुछ युवाओं नेताओं को बताया कि आने वाले समय में युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति समेत अन्य वर्ग को प्राथमिकता देनी चाहिए। राहुल बोल रहे थे कि इस बीच सोनिया अपने अंदाज में मुस्कराते हुए उन्हें टोका। सोनिया ने कहा कि यहां तो सब पुराने चेहरे ही दिखाई दे रहे हैं। जब सोनिया यह कह रही थी तो उनके कहने के भाव में कौतूहल के साथ-साथ सहजता भी थी। लेकिन कई कांग्रेस के मठाधीश किस्म के नेताओं के लिए यह बहुत बड़ा संदेश था। बात यहीं खत्म नहीं हुई। राहुल ने लगे हाथ सौम्यता और चतुराई के साथ अनुमति भी ले ली। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह नए चेहरों के साथ पुराने चेहरों का तालमेल बनाए रखेंगे।
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क्या होगी सोनिया की भूमिका
भाजपा ने मार्गदर्शक मंडल बनाया लेकिन वह अभी तक अपना सही संदेश देने में नाकाम रहा है। कांग्रेस इसे सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की भूमिका के जरिए चरितार्थ करना चाहती है। वह भी बिना कोई मार्ग दर्शक मंडल बनाए। हर अवसर पर जहां भी डा. मनमोहन सिंह मौजूद होते हैं, उन्हें उनके सम्मान के अनुरुप सोनिया और राहुल सम्मान देते हैं। कल की बैठक के नतीजे से यह संदेश साफ है कि डा. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी इसी भूमिका में रहेंगे। दोनों का काम राहुल गांधी को टोकना, उनसे पार्टी के कामकाज की शिकायत करना, विरोध दर्ज कराना, सुझाव देना, पार्टी के हित में आगे की दशा-दिशा को लेकर योजना बनाने तक सीमित रहने वाला है। इसके अलावा सोनिया गांधी राहुल गांधी की सहायता करने के साथ-साथ उनके और पार्टी के हित में अन्य राजनीतिक दलों तथा पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच में सेतु का काम कर सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के विभागों तथा पदों पर नये चेहरों के जिम्मेदारी संभालने के बाद पुराने, वरिष्ठ और घुटे राजनीतिक नेताओं को पार्टी इस तरह से साध सकती है।
भरपूर दिया संदेश
राहुल कांग्रेस मुख्यालय बाद में आए। उनसे पहले पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पहुंच गई। लेकिन सोनिया गांधी ने राहुल के आने के बाकायदा इंतजार किया। स्टीयरिंग कमेटी की बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन ने डा. मनमोहन सिंह को विदा किया। इसके बाद सोनिया गांधी कांग्रेस मुख्यालय से अपने आवास दस जनपथ जाने वाले रास्ते पर खड़ी होकर कांग्रेस अध्यक्ष के आने का इंतजार करती रही। राहुल के आने के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष उनके साथ अपने आवास में चली गई। मकसद साफ है कि कोई मुगालता न पाले। यहां तक कि अब पार्टी के भीतर पुराने ड्रामे, मठाधीशी के दिन भी लद गए हैं। यह अब युवाओं की भविष्य की कांग्रेस है।
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सोनिया सिर्फ विरोध दर्ज करा सकती हैं
इससे पहले भी सोनिया ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना भी बॉस बताया था। कुल मिलाकर कवायद पार्टी, इसके संगठनों, विभागों, नेताओं, कार्यकताओं और देश के अन्य राजनीतिक दलों को भी संदेश देने की है। संदेश का पर्याय यह है कि राहुल गांधी ही मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस का नेतृत्व करेंगे। सोनिया सिर्फ उन्हें सलाह, सुझाव ही दे सकती है। मानना और न मानना दोनों राहुल के हाथ में है। सोनिया उनसे सिर्फ शिकायत या अपना विरोध ही दर्ज करा सकती हैं। इसका एक संदेश यह भी है कि कांग्रेस अब बदलने जा रही है। यह बदलाव आमूल-चूल हो सकता है और इसके लिए सभी को मानसिक रुप से अपनी तैयारी कर लेनी चाहिए।
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स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में
स्टीयरिंग कमेटी की बैठक का आयोजन ताजा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ 16-18 मार्च को प्रस्तावित प्लेनरी सेशन पर चर्चा के लिए हुए था। इस में नीरव मोदी धोखाधड़ी प्रकरण, किसान, जम्मू-कश्मीर में सीमा की स्थिति, पाकिस्तान, चीन और पड़ोसी देशों के साथ संबंध समेत अन्य पर चर्चा हुई। बजट अवकाश के बाद मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हो रहे संसद के सत्र पर भी चर्चा हुई। इससे पहले राहुल गांधी ने भावी कांग्रेस का खाका खींचना शुरू किया। बैठक में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ और कुछ युवाओं नेताओं को बताया कि आने वाले समय में युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति समेत अन्य वर्ग को प्राथमिकता देनी चाहिए। राहुल बोल रहे थे कि इस बीच सोनिया अपने अंदाज में मुस्कराते हुए उन्हें टोका। सोनिया ने कहा कि यहां तो सब पुराने चेहरे ही दिखाई दे रहे हैं। जब सोनिया यह कह रही थी तो उनके कहने के भाव में कौतूहल के साथ-साथ सहजता भी थी। लेकिन कई कांग्रेस के मठाधीश किस्म के नेताओं के लिए यह बहुत बड़ा संदेश था। बात यहीं खत्म नहीं हुई। राहुल ने लगे हाथ सौम्यता और चतुराई के साथ अनुमति भी ले ली। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह नए चेहरों के साथ पुराने चेहरों का तालमेल बनाए रखेंगे।
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क्या होगी सोनिया की भूमिका
भाजपा ने मार्गदर्शक मंडल बनाया लेकिन वह अभी तक अपना सही संदेश देने में नाकाम रहा है। कांग्रेस इसे सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की भूमिका के जरिए चरितार्थ करना चाहती है। वह भी बिना कोई मार्ग दर्शक मंडल बनाए। हर अवसर पर जहां भी डा. मनमोहन सिंह मौजूद होते हैं, उन्हें उनके सम्मान के अनुरुप सोनिया और राहुल सम्मान देते हैं। कल की बैठक के नतीजे से यह संदेश साफ है कि डा. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी इसी भूमिका में रहेंगे। दोनों का काम राहुल गांधी को टोकना, उनसे पार्टी के कामकाज की शिकायत करना, विरोध दर्ज कराना, सुझाव देना, पार्टी के हित में आगे की दशा-दिशा को लेकर योजना बनाने तक सीमित रहने वाला है। इसके अलावा सोनिया गांधी राहुल गांधी की सहायता करने के साथ-साथ उनके और पार्टी के हित में अन्य राजनीतिक दलों तथा पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच में सेतु का काम कर सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के विभागों तथा पदों पर नये चेहरों के जिम्मेदारी संभालने के बाद पुराने, वरिष्ठ और घुटे राजनीतिक नेताओं को पार्टी इस तरह से साध सकती है।
भरपूर दिया संदेश
राहुल कांग्रेस मुख्यालय बाद में आए। उनसे पहले पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पहुंच गई। लेकिन सोनिया गांधी ने राहुल के आने के बाकायदा इंतजार किया। स्टीयरिंग कमेटी की बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन ने डा. मनमोहन सिंह को विदा किया। इसके बाद सोनिया गांधी कांग्रेस मुख्यालय से अपने आवास दस जनपथ जाने वाले रास्ते पर खड़ी होकर कांग्रेस अध्यक्ष के आने का इंतजार करती रही। राहुल के आने के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष उनके साथ अपने आवास में चली गई। मकसद साफ है कि कोई मुगालता न पाले। यहां तक कि अब पार्टी के भीतर पुराने ड्रामे, मठाधीशी के दिन भी लद गए हैं। यह अब युवाओं की भविष्य की कांग्रेस है।