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Goa: 'कभी-कभी जज भी गलतियां करते हैं..', कानून के छात्रों से बोले जस्टिस भरत पी देशपांडे

Sat, 16 Dec 2023 05:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 16 Dec 2023 05:53 PM IST
सार

Goa: बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति देशपांडे ने कहा कि वह न्यायाधीश के रूप में कभी यह दावा नहीं करेंगे कि वह हमेशा सही हैं। वह भी (कभी-कभी) गलतियां करते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि यह स्वीकार करने में स्पष्टता होनी चाहिए कि गलती हुई है।

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Sometimes even judges make mistakes: Justice Bharat P Deshpande
न्यायमूर्ति भरत पी. देशपांडे। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति भरत पी देशपांडे ने शनिवार को कहा कि प्रत्येक कानूनी मामला अलग होता है और कोई भी इसकी तुलना अन्य मौजूदा या पिछले मामलों से नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कभी-कभी न्यायाधीश भी गलतियां करते हैं। प्रत्येक विषय पर बहुत सारे फैसले होते हैं। वह मडगांव के जीआर करे कॉलेज ऑफ लॉ में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  

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'मामलों की तुलना नहीं कर सकते'
उन्होंने आगे कहा सत्र न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनका अनुभव यह है कि हरेक और प्रत्येक मामले में अपने आप में कुछ अलग होते हैं। आप प्रत्येक मामले या पहले के मामलों की तुलना मौजूदा मामलों से नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति देशपांडे ने कार्यक्रम में छात्रों से कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा तय कानून को लागू करते समय किसी न्यायाधीश को न केवल जाकर यह पता लगाना चाहिए कि अनुपात क्या है, बल्कि यह पता लगाना चाहिए तथ्य क्या हैं। 

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'हम भी गलतियां करते हैं..'
उन्होंने कहा, 'हमें संतुलन बनाने का काम करना होगा। कभी-कभी यह बहुत मुश्किल होता है। कभी-कभी आपको कुछ ऐसा पता लगाना पड़ता है जो पहले के मामलों में नहीं है और निष्कर्ष पर आना पड़ता है।' न्यायमूर्ति देशपांडे ने आगे कहा, 'हम न्यायाधीश के रूप में यह दावा नहीं करेंगे कि हम हमेशा सही हैं। हम भी (कभी-कभी) गलतियां करते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि यह स्वीकार करने में स्पष्टता होनी चाहिए कि गलती हुई है।' उन्होंने कहा कि इस दुनिया में कोई भी सभी पहलुओं में परिपूर्ण नहीं है।

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'गलती को मानें और सुधार करें'
उन्होंने कहा, 'हर कोई कभी न कभी गलतियां करता है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको अपनी गलतियों को स्वीकार करना होगा। उन्हें सुधारने की कोशिश करनी होगी और आगे बढ़ना होगा। यह जीवन का वह हिस्सा है जिसे हम अपने समाज में ही स्थापित करने का प्रयास करते हैं।' 

'टेक्नोलॉजी का गुलाम न बनें..'
न्यायमूर्ति देशपांडे ने छात्रों से कक्षाओं में सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करने के अलावा व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए अदालतों का दौरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कानून के छात्रों से कहा कि वे अपनी डिग्री का इस्तेमाल समाज और कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले लोगों को सेवा देने के लिए एक उपकरण के रूप में करें। न्यायमूर्ति देशपांडे ने कहा कि सैद्धांतिक ज्ञान आवश्यक है लेकिन अनुभव हासिल करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'अदालतों का दौरा करें, खासकर निचली अदालतों का। यह ज्ञान आपको भविष्य में अपने करियर के लिए प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करेगा।' न्यायाधीश ने छात्रों से यह भी कहा कि वे प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) का 'गुलाम' न बनें।

'किताबें देंगी कानून का पूरा ज्ञान'
उन्होंने कहा,'आपको इसका (प्रौद्योगिकी का) लाभ उठाना होगा लेकिन मामले की जड़ तक जाना होगा। ऐसी किताबें पढ़ें जो आपको प्रक्रियात्मक कानूनों और नियमों का पूरा ज्ञान देंगी।' इस मौके पर बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा के अध्यक्ष एडवोकेट पारिजात मधुसूदन पांडे भी मौजूद थे।

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