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Assam: भारत-भूटान सीमा पर सौर बाड़ से कम हुआ ग्रामीणों और जंगली हाथियों के बीच संघर्ष, मौतों में आई कमी

Sun, 05 Mar 2023 06:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 05 Mar 2023 06:54 PM IST
सार

बोरनाडी नदी अंतरराष्ट्रीय सीमा को चिह्नित करती है। इस नदी के भारतीय तट पर लगाए गए बैरियर से जंगली जानवरों के गांवों में भटकने की घटनाओं में कमी आई है और मानव-हाथी संघर्ष के कारण होने वाली मौतों में कमी आई है।

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Solar fence along India-Bhutan border mitigates human elephant conflict
हाथी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-भूटान सीमा पर लगाई गई 18 किलोमीटर लंबी सौर बाड़ (सोलार फेन्स) मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में मदद कर रही है। यह सोलार बाड़ असम के बक्सा जिले के 11 गांवों के दस हजार से ज्यादा लोगों की रक्षा करती है। 

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बोरनाडी नदी अंतरराष्ट्रीय सीमा को चिह्नित करती है। इस नदी के भारतीय तट पर लगाए गए बैरियर से जंगली जानवरों के गांवों में भटकने की घटनाओं में कमी आई है और मानव-हाथी संघर्ष के कारण होने वाली मौतों में कमी आई है।
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पब गुआबारी गांव के निवासी भीम बहादुर छेत्री बताते हैं, हाथियों ने पहले बड़े पैमाने पर तबाही मचाई, हमारे खेतों और खाद्य भंडार को नष्ट कर दिया था। भोजन की तलाश में भूटान से आने वाले इन जानवरों द्वारा सालाना औसतन छह से सात लोगों को कुचलकर मार दिया जाता था।
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उन्होंने कहा, हम डर में जिदंगी बिताते थे और जब ये हाथी हमारे गांवों में आते थे, तो हमारी रातों की नींद हराम कर जाते थे। लोग शाम के बाद घरों में ही रहते थे। यह गंभीर चिंता का विषय बन गया था। सरंक्षणवादिोयं, वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन ने काफी विचार-विमर्स किया जिसके बाद एक सौर बाड़ लगाने का फैसला किया गया। यह बाड़ हाथियों को कमजोर बिजली के झटके देती है, जिससे हाथियों की मौत नहीं होती है। 
 
जैव-विविधता संगठन 'आरण्यक' द्वारा फरवरी 2021 में एलिफेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के वित्त पोषण के साथ सौर बाड़ को बनाया गया था। वन विभाग ने पूरी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया। वन विभाग के अलावा ग्रामीण भी परियोजना में हितधारक हैं।

एक वन अधिकारी ने कहा कि हाथियों के आवासों का सिकुड़ना भोजन के लिए मानव बस्तियों में भटकने का प्रमुख कारण था, जिससे मनुष्यों के साथ उनका संघर्ष हो रहा था।

'आरण्यक' के वरिष्ठ पदाधिकारी अंजन बरुआ ने कहा कि ग्रामीण पहले हाथियों को दूर रखने के लिए बिजली की बाड़ लगाते थे, लेकिन इससे न केवल हाथियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था, बल्कि क्षेत्र में मनुष्यों और उनके पशुधन के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया था।


प्रख्यात संरक्षण वैज्ञानिक विभूति प्रसाद लाहकर ने बताया कि बाड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले हाथियों की आवाजाही पर एक वैज्ञानिक अध्ययन किया गया।

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