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सौर विस्फोट: पहली बार सूर्य पर तीन अनदेखे विस्फोटों का खुलासा
Thu, 10 Jun 2021 07:06 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 10 Jun 2021 07:06 AM IST
सार
- विस्फोटों के सहारे वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष का मौसम समझने में मिलेगी मदद
- यह विस्फोट 12 और 13 मार्च 2016 को दर्ज हुए थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
वैज्ञानिकों ने पहली बार सूर्य पर तीन अनदेखे विस्फोटों का खुलासा किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी और यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसी नासा की संयुक्त हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी ने इसके आंकड़े जुटाए हैं।
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नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कैद की तस्वीरें, अंतरिक्ष का मौसम समझने में करेंगे मदद
इनके सहारे वैज्ञानिक सूर्य की सतह पर होने वाले सभी विस्फोटों और अंतरिक्ष के मौसम को समझ सकेंगे। इन विस्फोट में अंतरिक्ष के मौसम में बदलाव लाने की क्षमता होती है वैज्ञानिकों ने मौजूदा विस्फोटों को 'सोलर रोजेटा स्टोन' नाम दिया है। यह विस्फोट 12 और 13 मार्च 2016 को दर्ज हुए थे। तीनों विस्फोट अलग-अलग प्रकार के हैं और इन्हें विभिन्न चरणों में भी दर्ज करने में वैज्ञानिक सफल रहे।
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1 लाख डिग्री तापमान पर कोरोनल वर्षा
सूर्य की सतह पर मौजूद प्लाज्मा का तापमान करीब 1 लाख डिग्री तक रहता है। यह सूर्य के वातावरण में ऊपर जाकर ठंडे होते हैं और फिर नीचे गिरते हैं इस प्रक्रिया में जो चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होता है इसे कोरोनल वर्षा कहा जाता है। सूरज पर तीन तरह के विस्फोट होते हैं।
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सूर्य पर होने वाले विस्फोटों को कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) जेट और पार्षियल इरेक्शन श्रेणियों में बांटा जाता है। नासा के अनुसार, सीएमई और जेट विस्फोट से ऐसी ऊर्जा और तत्व निकलते हैं जो अंतरिक्ष में फैलते हैं। इनका असर हमारी पृथ्वी के वातावरण पर भी हो सकता है।
- ये कृत्रिम उपग्रह से लेकर इलेक्ट्रिक उपकरणों और फ्रीक्वेंसी पर भी असर डालते हैं। अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को भी इनसे खतरा माना जाता है। मौजूदा रोजेटा स्टोन इरेक्शन को सीएमई और जेट के बीच की श्रेणी में रखा गया है।