फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   So, in the gift of the Quran, according to Indian culture?

तो क़ुरान उपहार में देना भारतीय संस्कृति के अनुरूप?

Mon, 10 Jul 2017 11:56 AM IST
bbc
bbc Updated Mon, 10 Jul 2017 11:56 AM IST
विज्ञापन
So, in the gift of the Quran, according to Indian culture?
ताज महल - फोटो : bbc
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों बिहार के दौरे पर कहा था। कि भारत आने वाले मेहमानों को उपहार में ताजमहल या अन्य मीनारों का नमूना देना भारतीय सभ्यता के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, "पहली बार हमने देखा है कि भारत के प्रधानमंत्री जब बाहर जाते हैं या किसी देश का प्रमुख भारत आता है तो वह उन्हें गीता और रामायण भेंट करते हैं"। 'रामायण' और 'गीता' हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ हैं. उन्होंने यह बात बिहार के दरभंगा शहर में एक भाषण के दौरान कही। बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज झा ने योगी आदित्यनाथ की इतिहास की समझ की आलोचना की और कहा, "यह उनकी संकीर्ण सोच है कि वह ताजमहल को ग़ैर भारतीय समझते हैं"। इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़, बिहार में दूसरी सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल (यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, "मेरे विचार में ताज़महल उतना ही सुंदर है। जितना बनारस या अमृतसर। योगी आदित्यनाथ अपने भड़काऊ बयानों से सांप्रदायिक धुव्रीकरण पैदा करना चाहते हैं"। यह सच है कि नरेंद्र मोदी ने पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत आगमन पर उन्हें गीता उपहार में दी थी और जब वह जापान गए थे तो राजा अकीहितो और प्रधानमंत्री शिंजो अबे के लिए गीता ले गए थे। लेकिन अगर एक नज़र उन उपहारों पर डालें तो योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री मोदी के उपहारों के चयन पर आश्चर्य हो सकता है। 
विज्ञापन

So, in the gift of the Quran, according to Indian culture?
कुरान - फोटो : bbc
इंडियन कौंसिल फॉर वर्ल्ड अफेयर्स के रिसर्च फेलो फ़ज़्जुर रहमान सिद्दीकी ने बीबीसी को बताया, "नरेंद्र मोदी अपने तोहफ़े बहुत गंभीरता के साथ चुनते हैं। लेकिन यहां यह ध्यान देने लायक है कि उनका देश के अंदर और बाहर अलग-अलग एजेंडा रहता है"। उन्होंने बताया, "जब मोदी सऊदी अरब गए थे तो वे सऊदी अरब के साथ भारत के संबंधों के मद्देनज़र चीरामन के जामा मस्जिद का मॉडल साथ ले गए थे"। इसी तरह जब नरेंद्र मोदी ने ईरान का दौरा किया तो वे सातवीं शताब्दी के क़ूफी लिपि में लिखी दुर्लभ क़ुरान की विशेष रूप से तैयार प्रति उपहार में ले गए थे। उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के लिए वह भारत के मशहूर सूफ़ी कवि अमीर ख़ुसरो की लिखी 'ख़मसा' की प्रति ले गए थे और उसे ख़ास तौर से तैयार किया गया था। इसी तरह जब वह चीन गए तो बुद्ध की एक पत्थर की मूर्ति के साथ कुछ और स्मृतिचिन्ह ले गए थे। ऑस्ट्रेलिया गए तो दूसरे उपहारों में महात्मा गांधी का एक चरखा भी शामिल था जबकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी की एक पेंटिंग उपहार में दी थी। तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर उन्होंने विशेष रूप से तैयार की गई घोड़े की एक ज़ीन दी थी जबकि किर्गिस्तान गए थे। तो उन्होंने एक कालीन उपहार में दिया। जामिया मिलिया इस्लामिया के डॉक्टर मोहम्मद सोहराब ने इस संबंध में बताया कि देश के अंदर और बाहर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को दिए जाने वाले उपहारों में यह बात समझाने की कोशिश की जा रही है। भारत एक बहु-धार्मिक धर्मनिरपेक्ष देश है। लेकिन भारत में हिंदुत्व का एजेंडा लागू किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed