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बदलाव: पुरुलिया अब हथियार गिराने नहीं, नई वेधशाला के लिए जाना जाएगा; खगोलीय अध्ययन की कमी को दूर करेगी
Tue, 14 Jan 2025 05:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 14 Jan 2025 05:07 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के गरपंचकोट इलाके में एसएन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज की ओर से पंचेट पहाड़ी के ऊपर नई वेधशाला स्थापित की गई है। यह खगोलीय पिंडों के वैज्ञानिक अवलोकन में अहम भूमिका निभाएगी।
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पुरुलिया में स्थापित की गई नई वेधशाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल का पुरुलिया अब हथियार गिराने की घटना से नहीं, बल्कि अपनी नई वेधशाला के कारण जाना जाएगा। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के गरपंचकोट इलाके में एसएन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज की ओर से पंचेट पहाड़ी के ऊपर नई वेधशाला स्थापित की गई है।
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यह खगोलीय पिंडों के वैज्ञानिक अवलोकन में अहम भूमिका निभाएगी। एसएन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। 17 दिसंबर, 1995 को पुरुलिया जिले में एंटोनोव एएन-26 विमान से हथियार गिराए गए थे। इसके बाद पुरुलिया देशभर में चर्चित हुआ था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के मुताबिक, यहां पर छात्रों को दूरबीनों के संचालन और आंकड़ों को रिकॉर्ड करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस वेधशाला के माध्यम से खगोलीय अनुसंधान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शुरू किया जाएगा। सबसे अहम दो ध्रुवों के बीच इस क्षेत्र में खगोलीय अध्ययन की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। यह वेधशाला जमीन से 600 मीटर की ऊंचाई पर और लगभग 86 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित है। यह पूर्वी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की एक प्रमुख वेधशालाओं में से एक होगी। उत्तर में आर्कटिक महासागर से लेकर दक्षिण में अंटार्कटिका तक फैले 86 डिग्री पूर्वी देशांतर पर बहुत कम वेधशालाएं हैं। यह वेधशाला उस कमी को दूर करेगी।
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2018 से चल रही थी तैयारी...
एसएन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के खगोल भौतिकी विभाग के डॉ. रामकृष्ण दास, डॉ. सौमेन मंडल और डॉ. तपस बाग ने 2018 में औपचारिक रूप से भूमि के अधिग्रहण के बाद वेधशाला की अवधारणा को लेकर लेआउट और इसको शुरू करने का काम किया था।
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रणनीतिक रूप से सबसे अच्छी जगह पर स्थित
प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी और अशोका विश्वविद्यालय के कुलपति सोमक रायचौधरी का कहना है कि कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक चलने वाली अस्थायी खगोलीय घटनाओं के अवलोकन के लिए दुनिया के सभी देशांतरों पर अच्छी वेधशालाओं का होना जरूरी है। इसलिए, पंचेट वेधशाला रणनीतिक रूप से सबसे अच्छी जगह पर स्थित है। एसएन बोस सेंटर की निदेशक डॉ. तनुश्री साहा दासगुप्ता का कहना है कि यह इस केंद्र के लिए गौरव का पल है और उन्हें उम्मीद है कि यह केंद्र अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान देगा।