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जलवायु परिवर्तन: मच्छर फैलने पर पेरिस में पहली बार किया गया धुआं, डेंगू का बढ़ा खतरा
Sat, 02 Sep 2023 06:16 AM IST
जलज मिश्रा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sat, 02 Sep 2023 06:16 AM IST
सार
यूरोप में तेजी से फैल रहे रोग फैलाने वाले टाइगर मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया था। विशेषज्ञों ने इनके प्रसार को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा है। यह फ्रांस की राजधानी में पहला धूम्र अभ्यास था।
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मच्छर
- फोटो : iStock
विस्तार
जलवायु परिवर्तन के चलते रोग फैलाने वाले मच्छरों के फैलने के कारण पेरिस में पहली बार धुआं किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने 31 अगस्त को शहर के दक्षिण-पूर्व में बगीचों और पेड़ों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कीटनाशकों का छिड़काव किया जो मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल हैं।
सड़कें बंद कर दी गईं
ऐसा यूरोप में तेजी से फैल रहे रोग फैलाने वाले टाइगर मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया था। विशेषज्ञों ने इनके प्रसार को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा है। यह फ्रांस की राजधानी में पहला धूम्र अभ्यास था। अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन नेटवर्क फ्रांस 24 की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़कें बंद कर दी गईं और लोगों को बृहस्पतिवार की सुबह घर पर रहने के लिए कहा गया। पेरिस में क्षेत्रीय स्वास्थ्य निकाय एआरएस इले-डी-फ्रांस ने बताया कि धूम्र ऑपरेशन का उद्देश्य डेंगू संचरण के जोखिम को कम करना है। इस इलाके में इक्का दुक्का डेंगू के मामले सामने आए हैं। फ्रांस में मच्छरों की 70 प्रजातियाँ हैं,लेकिन केवल टाइगर मच्छर मनुष्य के लिए खतरनाक है। वे डेंगू, जीका या चिकनगुनिया फैला सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब उन्होंने पहले किसी संक्रमित इंसान को काटा हो। फ्रांस में वह कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इस बीमारी के साथ किसी देश से यात्रा करके आया हो।
हालांकि दक्षिणी फ्रांस में धूम्रीकरण कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में टाइगर मच्छरों का खतरा बना हुआ है। टाइगर मच्छर ( एडीस एल्बोपिक्टस ) एक आक्रामक प्रजाति है और दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मूल निवासी है। इसे पहली बार 2004 में फ्रांस में देखा गया था। गर्म होती जलवायु के कारण अब धीरे-धीरे यह खतरा पेरिस तक पहुंचने लगा है।
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स्थानीय संक्रमणों की संख्या में वृद्धि
यूरोप के बाकी हिस्सों में भी मच्छर का प्रसार काफी तेजी से हुआ है। इस सदी की शुरुआत से ही यह बड़ी तेजी से उत्तर की ओर फैल रहे हैं और अब यह फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में भी पाए जाते है़ं। स्विट्जरलैंड तक इनका पहुंचाना काफी आश्चर्यजनक माना जा रहा है। स्विस हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार हमारे देश में कभी मच्छर पनपेंगे, ऐसा तो कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। यह सब जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है। महाद्वीप में मच्छरों से होने वाली बीमारियों के छिटपुट मामले सामने आए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन स्थानीय संक्रमणों की संख्या में वृद्धि हुई है। यूरोपीय रोग निवारण और नियंत्रण केंद्र के अनुसार 2022 में महाद्वीप में डेंगू के स्थानीय रूप से पकड़े गए मामलों की संख्या पिछले 11 वर्षों में दर्ज की गई संख्या के बराबर थे।
सर्दियां भी अब कड़ाकेदार नहीं रहीं
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इसमें जलवायु परिवर्तन की भूमिका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्म मौसम ने इनके अंडों के लिए ऊष्मायन अवधि को कम कर दिया है। सर्दियां भी अब वैसी कड़ाकेदार नहीं रहीं जो कीटों को मारने के लिए पर्याप्त होती थीं। यूरोपीय सेंटर फार डिवीजन प्रीवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चिकनगुनिया और डेंगू वायरस के ज्ञात वाहक, मच्छर की प्रजाति एडीज अल्बोपिक्टस, यूरोप में उत्तर और पश्चिम की ओर खुद को स्थापित कर रही है। यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने मच्छर जनित बीमारियों को एक बढ़ते खतरे के रूप में पहचाना है और निवासियों से मच्छर देखे जाने की रिपोर्ट करने में अधिक सक्रिय होने का आग्रह किया है।
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सड़कें बंद कर दी गईं
ऐसा यूरोप में तेजी से फैल रहे रोग फैलाने वाले टाइगर मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया था। विशेषज्ञों ने इनके प्रसार को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा है। यह फ्रांस की राजधानी में पहला धूम्र अभ्यास था। अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन नेटवर्क फ्रांस 24 की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़कें बंद कर दी गईं और लोगों को बृहस्पतिवार की सुबह घर पर रहने के लिए कहा गया। पेरिस में क्षेत्रीय स्वास्थ्य निकाय एआरएस इले-डी-फ्रांस ने बताया कि धूम्र ऑपरेशन का उद्देश्य डेंगू संचरण के जोखिम को कम करना है। इस इलाके में इक्का दुक्का डेंगू के मामले सामने आए हैं। फ्रांस में मच्छरों की 70 प्रजातियाँ हैं,लेकिन केवल टाइगर मच्छर मनुष्य के लिए खतरनाक है। वे डेंगू, जीका या चिकनगुनिया फैला सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब उन्होंने पहले किसी संक्रमित इंसान को काटा हो। फ्रांस में वह कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इस बीमारी के साथ किसी देश से यात्रा करके आया हो।
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हालांकि दक्षिणी फ्रांस में धूम्रीकरण कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में टाइगर मच्छरों का खतरा बना हुआ है। टाइगर मच्छर ( एडीस एल्बोपिक्टस ) एक आक्रामक प्रजाति है और दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मूल निवासी है। इसे पहली बार 2004 में फ्रांस में देखा गया था। गर्म होती जलवायु के कारण अब धीरे-धीरे यह खतरा पेरिस तक पहुंचने लगा है।
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स्थानीय संक्रमणों की संख्या में वृद्धि
यूरोप के बाकी हिस्सों में भी मच्छर का प्रसार काफी तेजी से हुआ है। इस सदी की शुरुआत से ही यह बड़ी तेजी से उत्तर की ओर फैल रहे हैं और अब यह फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में भी पाए जाते है़ं। स्विट्जरलैंड तक इनका पहुंचाना काफी आश्चर्यजनक माना जा रहा है। स्विस हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार हमारे देश में कभी मच्छर पनपेंगे, ऐसा तो कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। यह सब जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है। महाद्वीप में मच्छरों से होने वाली बीमारियों के छिटपुट मामले सामने आए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन स्थानीय संक्रमणों की संख्या में वृद्धि हुई है। यूरोपीय रोग निवारण और नियंत्रण केंद्र के अनुसार 2022 में महाद्वीप में डेंगू के स्थानीय रूप से पकड़े गए मामलों की संख्या पिछले 11 वर्षों में दर्ज की गई संख्या के बराबर थे।
सर्दियां भी अब कड़ाकेदार नहीं रहीं
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इसमें जलवायु परिवर्तन की भूमिका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्म मौसम ने इनके अंडों के लिए ऊष्मायन अवधि को कम कर दिया है। सर्दियां भी अब वैसी कड़ाकेदार नहीं रहीं जो कीटों को मारने के लिए पर्याप्त होती थीं। यूरोपीय सेंटर फार डिवीजन प्रीवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चिकनगुनिया और डेंगू वायरस के ज्ञात वाहक, मच्छर की प्रजाति एडीज अल्बोपिक्टस, यूरोप में उत्तर और पश्चिम की ओर खुद को स्थापित कर रही है। यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने मच्छर जनित बीमारियों को एक बढ़ते खतरे के रूप में पहचाना है और निवासियों से मच्छर देखे जाने की रिपोर्ट करने में अधिक सक्रिय होने का आग्रह किया है।