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नैसकॉम: इंजीनियरिंग स्नातकों में रोजगार के लिए जरूरी कौशल कम, फ्रेशर्स के प्रशिक्षण पर समय-संसाधन हो रहा खर्च

Thu, 02 Mar 2023 05:03 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 02 Mar 2023 05:03 AM IST
सार

तकनीकी उद्योगों की लॉबी कहे जाने वाले नैसकॉम की पहली महिला अध्यक्ष देबजानी घोष ने कहा कि आईटी कंपनियों को आज फ्रेशर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों का बुनियादी कौशल चाहिए।

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Skills required for employment in engineering graduates are less, time-resources spent on freshers training
नैसकॉम की अध्यक्ष देबजानी घोष। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

24,500 करोड़ डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम की अध्यक्ष देबजानी घोष का कहना है कि अधिकतर भारतीय इंजीनियरिंग स्नातकों में रोजगार कौशल की कमी है। इस वजह से फ्रेशर्स को काम पर रखने से पहले प्रशिक्षण पर आईटी कंपनियों का काफी समय व संसाधन खर्च हो रहा है।

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एक कार्यक्रम में घोष ने कहा कि देश की शिक्षण प्रणाली को मजबूत बुनियादी और पेशेवर कौशल विकसित करने पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि बीते दो दशक से भारतीय आईटी कंपनियां पूरे विश्व में सेवाएं दे रही हैं। इसकी दो प्रमुख वजहें हैं, कम खर्च में उपलब्ध कार्य-शक्ति और हर साल बड़ी संख्या में तैयार हो रहे इंजीनियरिंग स्नातक।  लेकिन सेक्टर की जरूरतें लगातार बदलती हैं, जिससे कई बार निराशाजनक स्थिति बन जाती है।
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आज इंजीनियर बैक-ऑफिस में काम नहीं कर रहे, बल्कि कंपनियों के कस्टमर्स के साथ बैठकों में भी शामिल होते हैं। अब आईटी कंपनियां भी केवल सेवाएं नहीं दे रहीं, बल्कि अपने कस्टमर्स को नए बदलाव कर डिजिटल बना रही हैं। लेकिन हमारी मौजूदा शिक्षण प्रणाली संवाद कौशल, स्पष्टता से विचार करने, भीड़ से हटकर नजरिया रखने, समस्याओं को हल करने क्षमताओं पर जोर नहीं दे रही।
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एआई, साइबर सुरक्षा जरूरी
तकनीकी उद्योगों की लॉबी कहे जाने वाले नैसकॉम की पहली महिला अध्यक्ष घोष ने कहा कि आईटी कंपनियों को आज फ्रेशर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों का बुनियादी कौशल चाहिए। अपने विचार को रख पाने, दूसरों से समन्वय करने और कस्टमर की जरूरतों व समस्याओं को सुलझाने के लिए विशेष ढंग से सोचने जैसे पेशेवर कौशल की भी जरूरत है। हमारी शिक्षण प्रणाली यह सब दे सकती है, लेकिन इसकी कमी नजर आ रही है। उन्होंने नई शिक्षा नीति से उम्मीद जताई कि यह कमियों को दूर करने में मदद करेगी। हालांकि कहा कि नई पहल को तेजी से लागू करना जरूरी है।


बच्चों को सवाल पूछने से रोकना शिक्षा नहीं: भाटिया
हॉटमेल बनाने वाले उद्यमी समीर भाटिया ने भी निराशा जताते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली में अगर विद्यार्थियों को आलोचनात्मक ढंग से सोचने और सवाल पूछने जैसे कौशल नहीं सिखाए, तो यह बड़ी कमी साबित होंगे। कहा, केवल ज्यादा अंक हासिल करना या नौकरी पाना ही पढ़ाई का लक्ष्य नहीं होना चाहिए।

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