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लोकसभा चुनाव 2019 में नोटा की स्थिति : कहीं बढ़ा तो कहीं घटा
Fri, 24 May 2019 06:02 AM IST
Gaurav Pandey
कुलदीप पंवार, नई दिल्ली
कुलदीप पंवार, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Fri, 24 May 2019 06:02 AM IST
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नोटा
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सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में जब नोटा (नन ऑफ द अबव) की व्यवस्था ईवीएम मशीनों में करने के आदेश चुनाव आयोग को दिए थे, तब शायद ही किसी को अनुमान रहा होगा कि यह व्यवस्था चुनावों को कितना प्रभावित करने वाली है। लेकिन उसके एक ही साल बाद लोकसभा चुनाव-2014 में करीब 60 लाख यानी 1.08 फीसदी मतदाताओं के इस विकल्प को अपनाने से इस व्यवस्था की अहमियत दिखाई दे गई थी।
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लोकसभा चुनाव 2019 में करीब 0.98 फीसदी मतदाताओं ने ही ईवीएम में इस बटन को दबाने पर विश्वास दिखाया, लेकिन पिछले आम चुनावों के मुकाबले इस बार नोटा पर मतदाता का यकीन कुछ राज्यों में बढ़ता दिखाई दिया, तो कुछ राज्यों में 2014 के उलट इसकी हिस्सेदारी बेहद कम हो गई।
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हालांकि पूरे देश में 542 सीटों पर पड़े मत जब बृहस्पतिवार को ईवीएम से बाहर निकले तो तकरीबन 80 फीसदी सीटों पर नोटा का आंकड़ा तीसरे या चौथे स्थान पर दिखाई दिया। नतीजतन कई जगह जीत-हार के निर्णय में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। इस हिसाब से देखा जाए तो नोटा को आगामी भविष्य में चुनाव के दौरान मतदाता के अहम हथियार के तौर पर देखा जा सकता है।
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यहां नहीं दिखी दिलचस्पी
| राज्य | नोटा का फीसद |
| उत्तर प्रदेश | 0.88 |
| मध्य प्रदेश | 0.92 |
| प. बंगाल | 0.96 |
| हरियाणा | 0.33 |
| नगालैंड | 0.19 |
| दिल्ली | 0.53 |
| महाराष्ट्र | 0.90 |
| कर्नाटक | 0.71 |
| हिमाचल प्रदेश | 0.85 |
| जम्मू-कश्मीर | 0.65 |