कश्मीर में सुधर रहे हालात, पर जम्मू में पटरी पर नहीं आ रहा कारोबार
- घाटी के हालात से जम्मू में 50 फीसदी कारोबार हुआ चौपट, कारोबारियों के अरबों रुपये फंसे
- पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों पर रोजी-रोटी का संकट, ड्राई फ्रूट्स का कारोबार भी तोड़ रहा दम
- बदले हालात से नुकसान के आकलन के लिए समिति बनाने को उपराज्यपाल से मिले कारोबारी
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब बेशक कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं, लेकिन सौ से ज्यादा दिन बीतने पर भी जम्मू में कारोबार पटरी पर नहीं आ पा रहा है। हालांकि, जम्मू में परिस्थितियां सामान्य हैं लेकिन कश्मीर बंद होने से साढ़े तीन माह में यहां पचास फीसदी कारोबार चौपट हो गया है। उद्योगों से लेकर विभिन्न कारोबार से जुड़े छोटे-बड़े तमाम व्यापारी मुश्किल दौर से जूझ रहे हैं।
पर्यटन कारोबार पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। शहर के 85 फीसदी होटल खाली पड़े हैं। कश्मीर में कारोबार न होने से जम्मू के व्यवसायियों के अरबों रुपये घाटी में फंसे हैं। घाटी से जुड़ा ड्राई फ्रूट का व्यापार जम्मू में भी दम तोड़ रहा है। कारोबार में लंबी सुस्ती के चलते व्यापारी संगठन सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर बदते हालात से नुकसान के आकलन के लिए कमेटी गठित करने की मांग उठाई है।
तीन हजार करोड़ का फल कारोबार प्रभावित, 250 करोड़ अटके
जम्मू के फल कारोबारियों ने कश्मीर में फल उत्पादकों को एडवांस में करीब 250 करोड़ रुपये दिए थे। बदले हालात में फसल जम्मू नहीं पहुंच सकी। ऐसे में कारोबारियों की यह रकम घाटी में ही फंस गई है। जम्मू फल मंडी से सीजन के दौरान करीब तीन हजार करोड़ का कारोबार होता है। फल मंडी एसोसिएशन जम्मू के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता के अनुसार कश्मीर के बागवान जम्मू के कारोबारियों से एडवांस लेते हैं। इस बार सीजन के शुरुआत में ही सप्लाई रुकने से करोड़ों रुपये फंस गए हैं।
पंद्रह फीसदी रह गई ऑक्यूपेंसी, एडवांस बुकिंग भी नहीं
जम्मू शहर में छोटे-बड़े करीब 300 होटल हैं। कश्मीर जाने वाले सैलानी जम्मू में भी रुकते हैं। पिछले तीन महीनों में न के बराबर सैलानी कश्मीर गए हैं। बीते साल अगस्त से नवंबर तक यहां 60 फीसदी आक्यूपेंसी थी, जो इस वर्ष घटकर 15 फीसदी रह गई है। आल जम्मू होटल एंड लॉजेस एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन गुप्ता का कहना है कि अगस्त से पहले जम्मू के छोटे होटलों में 75-80 फीसदी बुकिंग थी। अब बाहर से पर्यटक न के बराबर आ रहे हैं। स्टाफ की तनख्वाह निकालना मुश्किल हो गया है। होटल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
कश्मीर नहीं जा रहीं टैक्सियां, 90 फीसदी काम ठप
जम्मू में करीब 1250 टैक्सियां हैं। टैक्सी ऑपरेटरों का ज्यादातर काम कश्मीर से जुड़ा है। पिछले तीन महीनों से घाटी के लिए टूर पैकेज नहीं मिला है। रेजीडेंसी रोड पर टूर एंड ट्रेवल एजेंसी के संचालक तरसेम के अनुसार काम न मिलने पर बंदी के हालात हें। टैक्सी चालक रशपाल सिंह के अनुसार इतने बुरे हालात पहली बार देख रहे हैं। टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन जम्मू के अध्यक्ष अंचल सिंह कहते हैं- कश्मीर के लिए टैक्सी की मांग नहीं है। ज्यादातर वाहन लोन लेकर चल रहे हैं। किस्तें भी नहीं निकल पा रहीं।
पहले का भुगतान अटका, तैयार माल डंप
कश्मीर घाटी के लिए ज्यादातर सामान जम्मू से सप्लाई होता है। बड़े आर्डर की आपूर्ति उधार पर ही होती है। पाबंदियां लगने के बाद पहले हुई सप्लाई का भुगतान अटक गया है। जो माल आर्डर पर तैयार किया गया, वो पाबंदियों के चलते सप्लाई ही नहीं हो पाया। इससे एक तरफ जहां अरबों का भुगतान अटक गया है, वहीं तैयार माल भी डंप है। चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राकेश गुप्ता कहते हैं कि पिछले साढ़े तीन माह में केवल आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई हुई है। जम्मू का 50 फीसदी से ज्यादा कारोबार चौपट गया है। बाजार में नकदी का संकट है।
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद काफी समय गुजर चुका है। अब कारोबारी हालात को पटरी पर लाने के लिए पुख्ता कदम उठाने होंगे। एलजी प्रशासन से समन्वय समिति गठित करने की मांग की गई है। नुकसान के आकलन, भरपाई और हालात सुधारने के लिए समिति में कारोबारियों को शामिल किया जाना चाहिए।
- नीरज आनंद, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन
हालात पर नजर रखी जा रही है। सरकार की ओर से फ्रूट सीजन में नेफेड से खरीद करवाई गई है। फिलहाल, नुकसान का कोई आकलन नहीं किया गया है। सरकार से निर्देश मिलने पर सर्वे करवाया जा सकता है।
- नवीन चौधरी, प्रमुख सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, जेएंडके