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Tamil Nadu: अगले चुनावों में 'एक राष्ट्र एक चुनाव' लागू होने के दावों का खंडन, निर्मला सीतारमण ने बताया झूठ
Sat, 05 Apr 2025 05:53 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 05 Apr 2025 05:53 PM IST
सार
Tamil Nadu: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक देश, एक चुनाव को लेकर फैलाए जा रहे झूठ का खंडन किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि- एक साथ चुनाव 2034 के बाद ही कराए जाने की योजना है।
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निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' अवधारणा को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में इसे लागू नहीं किया जाएगा। चेन्नई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा- 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और एक साथ चुनाव कराकर इतने बड़े खर्च को बचाया जा सकता है।
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'एक साथ चुनाव होने पर जीडीपी में होगी बढ़ोतरी'
उन्होंने कहा, 'अगर संसद और विधानसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो देश की जीडीपी में करीब 1.5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। मूल्य के लिहाज से अर्थव्यवस्था में 4.50 लाख करोड़ रुपये जुड़ेंगे। यह 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' अवधारणा का एक काला और सफेद उदाहरण है।' निर्मला सीतारमण ने कुछ पार्टियों पर 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पहल पर झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया।
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'2034 के बाद एक साथ चुनाव कराए जाने की योजना'
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साथ चुनाव 2034 के बाद ही कराए जाने की योजना है और तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा अपनी मंजूरी देने के लिए अभी से आधार तैयार किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'इस अवधारणा पर कई मौकों पर व्यापक चर्चा हुई। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुरू की गई कोई चीज नहीं है। यह 'एक राष्ट्र एक चुनाव' 1960 के दशक तक अस्तित्व में था। इसका आंख मूंदकर विरोध करने के बजाय, अगर इसके लाभ को देखते हुए इसका समर्थन किया जाता, तो 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा देश को आगे ले जाती।'
यह भी पढ़ें - Pune Pregnant Death: CM फडणवीस का वादा- ऐसी घटनाएं रोकने को बनाएंगे SOP, अस्पताल ने 'नो डिपॉजिट नीति' घोषित की
'करुणानिधि ने किया था एक साथ चुनाव कराने का समर्थन'
निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि दिवंगत डीएमके संरक्षक एम करुणानिधि ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा का समर्थन किया था, लेकिन उनके बेटे और मौजूदा मुख्यमंत्री (एम के स्टालिन) अपने पिता के नक्शेकदम पर नहीं चल रहे हैं और इसके बजाय इसका विरोध कर रहे हैं। सीतारमण ने दोहराया कि 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा किसी की 'पसंदीदा' परियोजना नहीं है, बल्कि देश के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना बनाई गई है।
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'एक साथ चुनाव होने पर जीडीपी में होगी बढ़ोतरी'
उन्होंने कहा, 'अगर संसद और विधानसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो देश की जीडीपी में करीब 1.5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। मूल्य के लिहाज से अर्थव्यवस्था में 4.50 लाख करोड़ रुपये जुड़ेंगे। यह 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' अवधारणा का एक काला और सफेद उदाहरण है।' निर्मला सीतारमण ने कुछ पार्टियों पर 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पहल पर झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया।
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'2034 के बाद एक साथ चुनाव कराए जाने की योजना'
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साथ चुनाव 2034 के बाद ही कराए जाने की योजना है और तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा अपनी मंजूरी देने के लिए अभी से आधार तैयार किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'इस अवधारणा पर कई मौकों पर व्यापक चर्चा हुई। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुरू की गई कोई चीज नहीं है। यह 'एक राष्ट्र एक चुनाव' 1960 के दशक तक अस्तित्व में था। इसका आंख मूंदकर विरोध करने के बजाय, अगर इसके लाभ को देखते हुए इसका समर्थन किया जाता, तो 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा देश को आगे ले जाती।'
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'करुणानिधि ने किया था एक साथ चुनाव कराने का समर्थन'
निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि दिवंगत डीएमके संरक्षक एम करुणानिधि ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा का समर्थन किया था, लेकिन उनके बेटे और मौजूदा मुख्यमंत्री (एम के स्टालिन) अपने पिता के नक्शेकदम पर नहीं चल रहे हैं और इसके बजाय इसका विरोध कर रहे हैं। सीतारमण ने दोहराया कि 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा किसी की 'पसंदीदा' परियोजना नहीं है, बल्कि देश के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना बनाई गई है।
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