फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sinking of Joshimath: INSA emeritus scientist says Construction of four-lane highways making whole system wea

विकास या विनाश: जोशीमठ में क्यों बने ऐसे हालात और इसके लिए जिम्मेदार कौन? INSA के वैज्ञानिक ने दी यह चेतावनी

Sun, 08 Jan 2023 08:40 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 08 Jan 2023 08:40 PM IST
सार

जोशीमठ मध्य हिमालय का एक हिस्सा है। यहां की चट्टानें प्रीकैम्ब्रियन युग से हैं और क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र-4 का है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ की मूलभूत समस्या यह है कि यह बहुत कमजोर जमीन पर स्थित है। जोशीमठ में आई इस आपदा के पीछे कहीं ना कहीं यहां हुआ विकास भी जिम्मेदार है।

विज्ञापन
Sinking of Joshimath: INSA emeritus scientist says Construction of four-lane highways making whole system wea
इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के साइंटिस्ट डीएम बनर्जी ने जोशीमठ में आ रही दरारों के लिए गिनाए कारण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। बताया जा रहा है कि जोशी मठ के बाद अब जमीन में हो रही दरारें कर्णप्रयाग तक पहुंच गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ लगातार मामले की निगरानी कर रहा है। अब तक कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है। पीएम ने इसे लेकर आज एक हाईलेवल मीटिंग भी की। इस बीच, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के साइंटिस्ट डीएम बनर्जी ने जोशीमठ की इस स्थिति को के पीछे वहां हो रहे विकाल को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जैसे फोर लेन हाईवे निर्माण पूरे सिस्टम को कमजोर कर रहा है।

विज्ञापन


बहुत कमजोर जमीन पर स्थित है जोशीमठ 
उन्होंने कहा कि जोशीमठ मध्य हिमालय का एक हिस्सा है। यहां की चट्टानें प्रीकैम्ब्रियन युग से हैं और क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र-4 का है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ की मूलभूत समस्या यह है कि यह बहुत कमजोर जमीन पर स्थित है। जोशीमठ में आई इस आपदा के पीछे कहीं ना कहीं यहां हुआ विकास भी जिम्मेदार है। इसके अलावा लोगों को इस भूमि पर 3-4 मंजिल वाले घर नहीं बनाने चाहिए थे। 
विज्ञापन


बना रहना चाहिए था छोटा गांव
इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के साइंटिस्ट डीएम बनर्जी ने जोशीमठ की भौगोलिक स्थिति के बारे में बताया कि उत्तराखंड का आपदा झेल रहा शहर एक प्रमुख ढलान पर स्थित है। जोकि लगभग 6000-7000 साल पहले हुए भूस्खलन से निर्मित है। यहां तक की ये पूरी पर्वत श्रृंखला जहां भी माउंट हाउस है, वे उचित स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि यह श्रंखला अपनी मूल स्थिति से फिसल जाता है। शुरुआत में जब लोग वहां रह रहे थे तो वे एक अस्थिर क्षेत्र में रह रहे थे। जोशीमठ को एक बड़े शहर की तरह विकसित नहीं होना चाहिए था। जैया यह आज हो गया है। जोशीमठ को पहले की तरह एक छोटा गांव जैसा ही रहना चाहिए था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दी यह चेतावनी
ऐसी स्थितियों से बचने के लिए चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पर धार्मिक स्थलों जैसे बदरीनाथ और केदारनाथ को सुलभ बनाने का भारी दबाव है। लोग बद्रीनाथ और केदारनाथ जाते रहे हैं, लेकिन उन्हें पैदल यात्रा करनी होती थी। अब सरकार चाहती है कि इन सभी जगहों तक पहुंचना आसान हो ताकि वे वहां कार और बस से जा सकें। यह एक गलत कदम है। हिमालय का यह इलाका नाजुक, मुलायम और संरचनात्मक रूप से कमजोर है। ऐसे में हिमालय और अलग-अलग जगहों तक चार लेन वाली सड़कें नहीं बनानी चाहिए थीं क्योंकि ये पूरे सिस्टम को कमजोर बनाती हैं। 


इसके अलावा सड़क निर्माण के लिए पहाड़ों से निकाली गई सामग्री को नदी में फेंक दिया जाता है, जिसके कारण नदी संकरी हो गई है। इस स्थिति के लिए हर कोई ग्लेशियर को दोष देता है, लेकिन ग्लेशियर एक कारण है। इसका मुख्य कारण बांध बनाना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed