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सिंगूर जमीन विवाद: बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट से पहले बंगाल सरकार को झटका; जानें पूरा मामला और किसने-क्या कहा
Mon, 30 Oct 2023 10:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 30 Oct 2023 10:56 PM IST
सार
पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार ने टाटा को सिंगूर में लखटकिया नैनो कार कारखाना लगाने की अनुमति दी थी। तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं और वाममोर्चा सरकार पर सिंगूर में टाटा के लिए किसानों से जबरन कृषि भूमि का अधिग्रहण करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसके चलते टाटा मोटर्स को 2008 में सिंगूर से अपना निर्माणाधीन संयंत्र गुजरात में स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा था।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।
- फोटो : ट्विटर/अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस
विस्तार
अगले महीने कोलकाता में होने जा रहे बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट से पहले पश्चिम बंगाल सरकार को तड़गा झटका लगा है। सोमवार को बंगाल के बहुचर्चित सिंगूर जमीन विवाद में नैनो संयंत्र पर पूंजी निवेश के नुकसान को लेकर मुआवजा मामले में टाटा को बड़ी जीत हासिल हुई है। टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा मोटर्स लिमिटेड (टीएमएल) अब सिंगूर में परित्यक्त कार विनिर्माण संयंत्र में किए गए निवेश के नुकसान की भरपाई के रूप में बंगाल सरकार को 766 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
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टाटा ने सोमवार को दावा किया कि तीन सदस्यीय पंचाट न्यायाधिकरण (मध्यस्थता पैनल) ने सोमवार को मामले का निपटारा करते हुए उसके पक्ष में सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया है। टाटा ने एक बयान में कहा कि कंपनी अब प्रतिवादी पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआइडीसी) से 11 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ 765.78 करोड़ रुपये की राशि वसूलने की हकदार है। कंपनी ने एक नियामक फाइलिंग में ये जानकारी दी है।
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इसमें एक सितंबर, 2016 से वास्तविक वसूली तक 11 प्रति प्रति वर्ष की दर से ब्याज शामिल है। कंपनी इसके साथ ही कार्यवाही की लागत के लिए एक करोड़ रुपये भी वसूल करेगी। बयान में कहा गया है कि फैसले के बाद मध्यस्थता की कार्यवाही खत्म हो गई है।
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गौरतलब है कि पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार ने टाटा को सिंगूर में लखटकिया नैनो कार कारखाना लगाने की अनुमति दी थी। तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं और वाममोर्चा सरकार पर सिंगूर में टाटा के लिए किसानों से जबरन कृषि भूमि का अधिग्रहण करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसके चलते टाटा मोटर्स को 2008 में सिंगूर से अपना निर्माणाधीन संयंत्र गुजरात में स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा था। तब तक टाटा सिंगूर में 1,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश कर चुका था। 2011 में सत्ता में आने पर ममता बनर्जी सरकार ने सिंगूर में टाटा की जमीन को किसानों को वापस लौटाने का फैसला किया था। इसके बाद टाटा मोटर्स ने सिंगूर में हुए नुकसान के कारण मुआवजे की मांग को लेकर यह मामला किया था।
बंगाल समिट से पहले फैसला
इस फैसले ने बंगाल सरकार के लिए बहुत असहज स्थिति पैदा कर दी है क्योंकि कोलकाता में 21- 22 नवंबर को बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट होना है। इसमें बड़ी संख्या में उद्योगपतियों के आने की जानकारी मिल रही थी। इस समिट से पहले यह फैसला आया है, जिसके चलते सरकार असहज स्थिति में आ गई है।
किसने क्या कहा?
दूसरी तरफ न्यायाधिकरण के फैसले पर डब्ल्यूबीआइडीसी के कार्पोरेट रिलेशंस के प्रमुख सोमदत्त बसु ने कहा कि हमारे पास इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। वहीं, माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि राज्य के बेरोजगार लोगों के सपने तोड़ने की सजा राज्य सरकार को भुगतनी होगी। सिर्फ पैसा नहीं, 11 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। यह आंकड़ा 1,600 करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। सलीम ने यह भी कहा कि सिंगूर में जो तबाही हुई, उसके लिए भाजपा के साथ तृणमूल भी जिम्मेदार है।
वहीं, प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा बुनियादी तौर पर कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण के विरुद्ध है। सिंगूर में विकट स्थिति उत्पन्न हुई, भूमि का चरित्र बदल गया और वहां खेती करना संभव नहीं रह गया। जब वर्तमान सरकार ने सिंगूर की जमीन उसके मालिकों को वापस लौटाई तो बाजार मूल्य का कम से कम तीन गुना भुगतान करना चाहिए था। तृणमूल के अड़ियल आंदोलन और माकपा की अदूरदर्शिता ने एक बड़ी औद्योगिक क्षमता को खत्म कर दिया। जहां एक विश्व स्तरीय आटोमोबाइल हब बनाया जा सकता था, वहां अब श्मशान है। इससे देश और देश के बाहर के उद्योगपतियों में गलत संदेश गया है।
ममता ने किया था आमरण अनशन
बता दें कि सिंगूर में जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध विपक्ष के नेता के रूप में ममता बनर्जी ने तीन दिसंबर, 2006 से कोलकाता में आमरण अनशन शुरू किया था और यह काफी दिनों तक चला था। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ममता को 2008 में चर्चा के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। 24 अगस्त 2008 को ममता ने सिंगूर में नैनो साइट से सटे दुगार्पुर एक्सप्रेस हाईवे पर परियोजना के लिए अधिग्रहित 1,000 एकड़ जमीन में 400 एकड़ की वापसी की मांग करते हुए विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आखिर में तीन अक्टूबर, 2008 को दुर्गापूजा से दो दिन पहले रतन टाटा ने कोलकाता में नैनो परियोजना को सिंगूर से गुजरात स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। उन्होंने इस फैसले के लिए ममता बनर्जी के आंदोलन को जिम्मेदार ठहराया था।
...और टाटा ने सिंगूर छोड़ने का एलान किया
इस बीच मध्यस्थता की एक बैठक 12 सितंबर 2008 को हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिर में 3 अक्तूबर, 2008 की दोपहर दुर्गा पूजा उत्सव से दो दिन पहले रतन टाटा ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नैनो प्रोजेक्ट को सिंगूर से बाहर निकलने की घोषणा करते हुए इसके लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व में जारी तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद नैनो फैक्टरी का नया ठिकाना बना गुजरात का साणंद।
ममता बनर्जी ने सोने को राख में बदल दिया: सुवेंदु
बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं निश्चित रूप से तीन-सदस्यीय पंचाट न्यायाधिकरण के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करता हूं, जिसने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) को 1 सितंबर, 2016 से 11 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ टाटा मोटर्स को 768.78 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल के औद्योगीकरण की संभावनाओं को नष्ट कर दिया। नौकरी चाहने वालों की पीढ़ियों को घर के पास रोजगार से वंचित कर दिया गया। किसानों को लौटाई गई जमीन कृषि कार्यों के लिए किसी काम की नहीं है। उसने सोने को राख में बदल दिया। इस फैसला का असर दीर्घकालीक होगा, क्योंकि राज्य पहले ही कमजोर आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है।