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Bangladesh: अगस्त से ही भारत को था बांग्लादेश में कुछ होने का अंदेशा? हसीना की सत्ता पर पकड़ ढीली हो रही थी
सार
विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अभी तो केवल हालात पर नजर रखी जा रही है। सही समय आने पर विदेश मंत्रालय बांग्लादेश के हालात को लेकर कोई बयान जारी करेगा। फिलहाल अभी वहां रह रहे भारतीय नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने, घर से न निकलने और जरूरत पड़ने पर उच्चायोग के संपर्क में रहने के लिए कहा गया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
विस्तार
बांग्लादेश की निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना गाजियाबाद के हिंडन हवाई अड्डे पर आ चुकी हैं। प्रधानमंत्री कार्यालाय और राष्ट्रीय सुरक्षा सचिवालय हसीना के भारत आने के पहले से हाई अलर्ट पर है। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि पड़ोसी देश के हालात पर पूरी नजर रखी जा रही है। फिलहाल बांग्लादेश से सटी सीमा पर सतर्कता और निगरानी दोनों बढ़ाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सचिवालय लगातार केन्द्र सरकार के संपर्क में है।
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विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अभी तो केवल हालात पर नजर रखी जा रही है। सही समय आने पर विदेश मंत्रालय बांग्लादेश के हालात को लेकर कोई बयान जारी करेगा। फिलहाल अभी वहां रह रहे भारतीय नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने, घर से न निकलने और जरूरत पड़ने पर उच्चायोग के संपर्क में रहने के लिए कहा गया है।
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बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन और इसकी उग्रता भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगाह में था। बताते हैं कि आंदोलनकारियों की अपील का जनसमर्थन काफी तेजी से बढ़ने के कारण अनहोनी की आशंका सताने लगी थी। पूर्व राजनयिक का कहना है कि हालात की गंभारता को देखते हुए विदेश मंत्रालय लगातार बांग्लादेश में रह रहे अपने नागरिकों को सचेत कर रहा था। 04 अगस्त को इसके बाबत एक फिर एडवाइजरी जारी की गई और इसमें नागरिकों से विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई।
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भारतीय नागरिकों से कहा गया कि वह सावधानी बरतें, घरों से न निकलें और आवश्यकता पड़ने पर उच्चायोग के संपर्क में रहें। बताते हैं कि सोमवार को घटनाक्रम तेजी से बदले। वहां के हिंसक प्रदर्शन को काबू में करने के लिए शेख हसीना की सरकार ने सेना से कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने आंदोलनकारियों पर सख्त कार्रवाई(गोली चलाने जैसी स्थिति) से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के पास कोई और चारा नहीं था। उन्होंने पद से इस्तीफा देकर बांग्लादेश को छोड़ना उचित समझा।
गौरतलब है कि शेख हसीना बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की पुत्री भी हैं। शेख हसीना का भारत से खास नाता रहा है। इसलिए उन्होंने अपनी बहन के साथ ढाका से निकलने से पूर्व नई दिल्ली से संपर्क साधा और सेना के हेलीकाप्टर से गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट पर उतरी हैं। उन्हें यहां भारतीय वायुसेना के विमान सी-130 जे हरक्युलिस से लाया गया। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। इसके आगे के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
भारत के लिए कितने संवेदनशील हैं बांग्लादेश के हालात?
बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है। कभी भारत का हिस्सा था। फिर पूर्वी पाकिस्तान बना और 1971 में भारत के प्रयास से बांग्लादेश एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य बना। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में संस्कृतिक स्तर पर काफी समानता है। बांग्लादेश में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक हिन्दू समाज भी है। ऐसे में अस्थिर बांग्लादेश भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बांग्लादेश में जिस तरह से मुजीबुर्रहमान की प्रतिमा पर प्रदर्शनकानियों ने हमला बोला, उससे भी भारत सरकार चौकन्ना है। बांग्लादेश में कोई भी अस्थिरता भारतीय सीमा पर शरणार्थियों की संख्या भी बढ़ा सकती है। इसलिए भारत की निगाह लगातार पड़ोसी देश के हालात पर टिकी है। भारत लगातार वहां की बनने वाली अंतरिम सरकार को लेकर चौकन्ना है। बांग्लादेश में कट्टरपंथ का बढ़ावा भारत के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए भारत की पहली कोशिश बांग्लादेश में शांति और स्थिरता की स्थापना है।