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Sikkim: बाढ़ के कारण करीब 85 हजार लोग प्रभावित, मंगन के डीसी ने बताया- 4353 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
Fri, 13 Oct 2023 11:00 PM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक
अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:00 PM IST
सार
पूर्वोत्तर की प्राकृतिक आपदा में फंसे सभी पर्यटकों को निकाल लिया गया है। सिक्किम में फंसे हुए लगभग सभी पर्यटकों को निकाले जाने की जानकारी मंगन के डीसी ने दी। उन्होंने कहा पर्यटकों के अलावा बाकी लोगों को भी निकालने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
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sikkim flood
- फोटो : ANI
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विस्तार
सिक्किम में खराब मौसम के कारण 100 गांवों के करीब 85 हजार लोग प्रभावित हैं। अब तक 4353 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। भीषण बाढ़ से प्रभावित उत्तरी सिक्किम के चार जिलों में पिछले 10 दिनों से राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मंगन के डीसी ने बताया कि शुक्रवार तक चार जिलों में फंसे 4353 लोगों को निकाला जा चुका है।
गोला-बारूद बरामद होने पर हाथ न लगाने की अपील
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिले के डीसी ने कहा, लगभग सभी पर्यटकों को निकाल लिया गया है, लाचेन में कुछ लोग फंसे हैं, शनिवार को अगर मौसम ठीक हुआ तो बचे हुए कुछ लोगों को भी निकालने का लक्ष्य है। इस बीच, सेना के जवान स्थानीय लोगों को बता रहे हैं कि इस बाढ़ में सेना के गोला-बारूद या कुछ सामान बह कर आए हो सकते हैं। लोग उन सामानों को हाथ नहीं लगाएं। ऐसा कोई भी सामान बरामद होने पर इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को देने की अपील की गई है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिला
सिक्किम राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष (एसएसडीएमए) की तरफ से बताया गया कि शुक्रवार को भी फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया। भारतीय सेना के जवानों के साथ-साथ अन्य एजेंसियों और नागरिक प्रशासन ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा पर्यटकों को निकालने में मदद की।
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एसएसडीएमए के मुताबिक शुक्रवार को बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिले से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से 2640 लोगों को निकाला गया। इनमें 1872 पर्यटकों के साथ 336 स्थानीय लोग शामिल थे।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक 37 लोगों की मौत केवल सिक्किम में हुई है। 78 लोग अभी भी लापता हैं और 30 लोग घायल हैं। इसमें 2 लोग भारतीय सेना के जवान हैं। इस बाढ़ से 1983 घरों और 591 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। राज्य में इस समय 19 रिलीफ कैंप चल रहे हैं। राहत और बचाव कैंप में 3024 लोग रह रहे हैं। बाढ़ में प्रदेश के 33 पुलों को नुकसान पहुंचा है।
सेना के जवान हालात सामान्य बनाने में जुटे
भारतीय सेना, भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ), एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अन्य सरकारी एजेंसियों और स्थानीय लोगों की टुकड़ियां बाढ़ के बाद अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए कई कार्रवाई कर रही हैं। सैनिक रबोम गांव के लिए नया पैदल मार्ग बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
शनिवार तक फंसे हुए सभी को निकालने का लक्ष्य: डीसी
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मंगन के डीसी हेम कुमार क्षेत्री ने अमर उजाला को बताया कि शुक्रवार तक मंगन में फंसे लगभग सभी पर्यटकों को निकाल दिया गया है। लाचे और चुंगथांग में अगर कोई बचा है तो उन्हें शनिवार को निकाल लेंगे। उन्होंने कहा, राहत और बचाव कार्य के लिए मौसम का ठीक रहना जरूरी है।
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गोला-बारूद बरामद होने पर हाथ न लगाने की अपील
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिले के डीसी ने कहा, लगभग सभी पर्यटकों को निकाल लिया गया है, लाचेन में कुछ लोग फंसे हैं, शनिवार को अगर मौसम ठीक हुआ तो बचे हुए कुछ लोगों को भी निकालने का लक्ष्य है। इस बीच, सेना के जवान स्थानीय लोगों को बता रहे हैं कि इस बाढ़ में सेना के गोला-बारूद या कुछ सामान बह कर आए हो सकते हैं। लोग उन सामानों को हाथ नहीं लगाएं। ऐसा कोई भी सामान बरामद होने पर इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को देने की अपील की गई है।
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बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिला
सिक्किम राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष (एसएसडीएमए) की तरफ से बताया गया कि शुक्रवार को भी फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया। भारतीय सेना के जवानों के साथ-साथ अन्य एजेंसियों और नागरिक प्रशासन ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा पर्यटकों को निकालने में मदद की।
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एसएसडीएमए के मुताबिक शुक्रवार को बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित मंगन जिले से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से 2640 लोगों को निकाला गया। इनमें 1872 पर्यटकों के साथ 336 स्थानीय लोग शामिल थे।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक 37 लोगों की मौत केवल सिक्किम में हुई है। 78 लोग अभी भी लापता हैं और 30 लोग घायल हैं। इसमें 2 लोग भारतीय सेना के जवान हैं। इस बाढ़ से 1983 घरों और 591 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। राज्य में इस समय 19 रिलीफ कैंप चल रहे हैं। राहत और बचाव कैंप में 3024 लोग रह रहे हैं। बाढ़ में प्रदेश के 33 पुलों को नुकसान पहुंचा है।
सेना के जवान हालात सामान्य बनाने में जुटे
भारतीय सेना, भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ), एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अन्य सरकारी एजेंसियों और स्थानीय लोगों की टुकड़ियां बाढ़ के बाद अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए कई कार्रवाई कर रही हैं। सैनिक रबोम गांव के लिए नया पैदल मार्ग बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
शनिवार तक फंसे हुए सभी को निकालने का लक्ष्य: डीसी
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मंगन के डीसी हेम कुमार क्षेत्री ने अमर उजाला को बताया कि शुक्रवार तक मंगन में फंसे लगभग सभी पर्यटकों को निकाल दिया गया है। लाचे और चुंगथांग में अगर कोई बचा है तो उन्हें शनिवार को निकाल लेंगे। उन्होंने कहा, राहत और बचाव कार्य के लिए मौसम का ठीक रहना जरूरी है।