आखिर किसकी पसंद हैं राज्यसभा के लिए पंजाब से भाजपा उम्मीदवार?
- बिना किसी चर्चा के राज्यसभा के लिए तय हुआ मलिक का नाम
- मलिक के अप्रत्याशित चयन ने प्रदेश अध्यक्ष चयन के मामले को उलझाया
- राज्य इकाई के नेताओं के मन में एक ही सवाल आखिर किसकी पसंद हैं मलिक
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आखिर किसकी पसंद हैं पंजाब से राज्यसभा सीट के लिए भाजपा उम्मीदवार श्वेत मलिक? इस सवाल से पार्टी की पूरी पंजाब इकाई ही नहीं बल्कि कई नेता भी हैरान परेशान हैं। दरअसल इस एक सीट के लिए बीते तीन महीने से पार्टी में विभिन्न स्तरों पर जारी माथापच्ची में मलिक का नाम कहीं नहीं था।
चर्चा हर बार नवजोत सिंह सिद्घू, पार्टी के राज्यसभा सदस्य अविनाश राय खन्ना और प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा के नाम पर हुई। इसी बीच नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक एक दिन पहले अचानक मलिक के नाम को हरी झंडी दे दी गई। मलिक की ओर से नामांकन का पर्चा दाखिल किए जाने के बाद कोई उन्हें सिद्घू का नजदीकी बता रहा है तो कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। राज्य इकाई के नेताओं को डर है कि अगर यह पीएम मोदी की पसंद हैं तो अध्यक्ष पद का नाम भी सबको चौंका सकता है। इसके अलावा अगर मलिक सिद्घू की पसंद हैं तो संकेत साफ है। नेतृत्व ने सिद्घू की नई भूमिका की पटकथा तैयार कर ली है।
दरअसल बीते तीन महीने से पार्टी नेतृत्व अपने कोटे की राज्यसभा की एक सीट के मामले में तीन फार्मूले पर विचार कर रहा था। पहला तो यह कि सिद्घू को राज्यसभा में ला कर इसी बहाने उन्हें मना लिया जाए। दूसरा कमल शर्मा को राज्यसभा ला कर राज्य संगठन की कमान अविनाश को दी जाए और तीसरा यथास्थिति कायम रखते हुए अविनाश को राज्यसभा में एक और मौका तो कमल शर्मा को फिर से संगठन की कमान दी जाए।
अचानक बदल दिया गया नाम
पार्टी की राज्य की राजनीति की जिम्मेदारी संभालने वाले एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यहां तक कि मंगलवार को हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भी इन्हीं तीनों नेताओं के नाम की चर्चा हुई। मगर बृहस्पतिवार को अचानक मलिक का नाम तय कर दिया गया। उक्त नेता के मुताबिक यह निर्णय चुनाव समिति की बैठक के बाद उच्च स्तर पर लिया गया। इसलिए अब अध्यक्ष पद पर किसका चयन होगा इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है।
सच्चाई यह भी है कि अमृतसर के मेयर रहे मलिक सिद्घू के करीबियों में रहे हैं। अमृतसर से खुद की जगह वित्त मंत्री अरुण जेटली को टिकट दिए जाने के बाद जब सिद्घू ने पार्टी से दूरी बनाई, तब उन्हें मलिक का साथ मिला था।
ऐसे में अगर आलाकमान ने सिद्घू की पसंद को तरजीह दी है तब अध्यक्ष पद तय करने के मामले में भी उनकी पसंद को तरजीह दी जा सकती है। वैसे पार्टी के सूत्रों का यह भी कहना है कि संघ से अरसे से जुड़े रहे मलिक की पीएम मोदी से नजदीकी रही है। खासतौर पर हरियाणा में जिम्मेदारी संभालने के दौरान पीएम मोदी और मलिक का परिचय हुआ था।