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शुजात बुखारी केस: आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया सीबीआई का रुख
Wed, 03 Jul 2019 11:24 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 03 Jul 2019 11:24 AM IST
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फाइल फोटो
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पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के आरोपी सजाद गुल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस सीबीआई के पास पहुंची है। मंगलवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। गुल 2017 में पाकिस्तान चला गया था और उस पर पिछले साल बुखारी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
सीबीआई भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी है और दुनियाभर में इसी के जरिए अलर्ट जारी कराया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिले कागजातों पर काम चल रहा है। जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें इंटरपोल मुख्यालय भेज दिया जाएगा।
14 जून 2018 को रोजा खोलने दफ्तर से बाहर निकल रहे बुखारी की लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। गुल ने पत्रकार के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चला रखा था। माना जाता है कि उसी ने आतंकवादियों को बुखारी की हत्या के निर्देश दिए थे। राज्य पुलिस ने पिछले साल कहा था कि सोशल मीडिया पर सामग्री पाकिस्तान से पोस्ट की गई थी।
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श्रीनगर निवासी गुल को एक मामले में दिल्ली पुलिस ने 2003 में गिरफ्तार किया था और उसने सजा भी भुगती थी। 2016 में आतंकवाद से जुड़े मामले में कश्मीर पुलिस ने उसे फिर गिरफ्तार किया और बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया था।
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सीबीआई भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी है और दुनियाभर में इसी के जरिए अलर्ट जारी कराया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिले कागजातों पर काम चल रहा है। जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें इंटरपोल मुख्यालय भेज दिया जाएगा।
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14 जून 2018 को रोजा खोलने दफ्तर से बाहर निकल रहे बुखारी की लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। गुल ने पत्रकार के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चला रखा था। माना जाता है कि उसी ने आतंकवादियों को बुखारी की हत्या के निर्देश दिए थे। राज्य पुलिस ने पिछले साल कहा था कि सोशल मीडिया पर सामग्री पाकिस्तान से पोस्ट की गई थी।
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श्रीनगर निवासी गुल को एक मामले में दिल्ली पुलिस ने 2003 में गिरफ्तार किया था और उसने सजा भी भुगती थी। 2016 में आतंकवाद से जुड़े मामले में कश्मीर पुलिस ने उसे फिर गिरफ्तार किया और बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया था।