श्रीकृष्ण गोशाला विवाद: चंपत राय पर आरोप लगाने वाली अलका लाहोटी को अध्यक्ष पद से हटाया, 50 लाख का जुर्माना भी
अलका लाहोटी नाम की महिला ने श्री राम मंदिर तीर्थ निर्माण क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर अपने भाइयों के माध्यम से 50 करोड़ रूपये की जमीन कब्जा कराने का लगाया था आरोप
विस्तार
एक एनआरआई महिला अलका लाहोटी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर आरोप लगाना भारी पड़ गया। चंपत राय पर लगाए गए आरोप का संज्ञान लेते हुए उस गोशाला कमेटी ने अलका लाहोटी को संस्था के अध्यक्ष पद से हटा दिया है जिसकी जमीन के एक हिस्से पर उन्होंने चंपत राय पर भाइयों के जरिये कब्जा किए जाने का आरोप लगाया था। गोशाला कमेटी ने अलका लाहौटी पर 50 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है। लाहोटी पर गोशाला सोसाइटी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपने पद का दुरूपयोग कर लगभग तीन करोड़ रूपये का हेरफेर करने का भी आरोप है।
अलका लाहोटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर अपने चचेरे भाइयों के माध्यम से श्रीकृष्ण गोशाला की 50 करोड़ रूपये की भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया था। अलका लाहोटी के इस बयान और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज के आधार पर पत्रकार विनीत नारायण ने 17 जून को इस घटना को फेसबुक पर पोस्ट कर दिया था। चंपत राय का नाम जुड़ा होने के कारण यह राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया था।
हालांकि, इस आरोप को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए चंपत राय के छोटे भाई संजय बंसल ने 19 जून को नगीना थाने में एक एफआईआर दर्ज करा दी थी। इसमें उन्होंने अलका लाहोटी, पत्रकार विनीत नारायण और एक अन्य को आरोपी बनाया था।
श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी ने लिया फैसला
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद श्रीकृष्ण गोशाला की कमेटी के सदस्यों ने 22 जून को एक बैठक कर अलका लाहोटी को पद से हटाने और उन पर 50 लाख रूपये का जुर्माना करने का प्रस्ताव पास कर दिया। कमेटी के प्रस्ताव में चंपत राय पर लगे आरोप को झूठा मानते हुए उसकी निंदा भी की गई। श्रीकृष्ण गौशाला कमेटी में कुल 20 सदस्य हैं। कमेटी के 12 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है।
कमेटी के 20 सदस्यों में से एक पदेन सदस्य क्षेत्र का पशुचिकित्साधिकारी होता है, लेकिन उसे कमेटी के प्रस्तावों पर वोट देने का अधिकार नहीं होता है। कमेटी के दो सदस्यों का देहांत हो चुका है। बाकी बचे 17 सदस्यों में से 12 ने अलका लाहोटी के विरूद्ध मतदान किया है। जबकि दो सदस्य स्वयं अलका लाहोटी और उनकी मां मालती लाहोटी हैं। अन्य तीन सदस्य अंकित बंसल, विजय कुमार शर्मा और मनोज वाल्मीकी हैं। कथित तौर पर ये तीन सदस्य लाहोटी परिवार के करीबी हैं जिसके कारण उन्होंने अलका लाहोटी के विरुद्ध मतदान नहीं किया।
कमेटी की संरक्षक ने लगाए लाहोटी पर कई आरोप
श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी की संरक्षक रेणुका शर्मा भी इस कमेटी की एक सदस्य हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि अलका लाहोटी इस संस्था के अध्यक्ष के रूप में पिछले तीन साल से काम कर रही थीं। इस दौरान उनके विरुद्ध कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने गोशाला की एक भूमि से मिट्टी हटाने का सौदा बिना कमेटी की अनुमति के कर दिया था। रेणुका शर्मा का आरोप है कि इस मिट्टी बिक्री से उन्होंने लगभग एक करोड़ रूपये अपने नाम हड़प कर लिए हैं।
रेणुका शर्मा के मुताबिक जब अलका लाहोटी को कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब इस गोशाला में 153 से अधिक गायें, बैल और कई अन्य गोवंश थे। इनमें से ज्यादातर गोवंश गौ तस्करों से बरामद किए गए थे। लेकिन अब मौके पर पाया गया है कि संस्था में केवल 92 गौवंश ही बचे हैं। बाकी गौवंश के गायब होने को लेकर अलका लाहोटी पर कई गंभीर आरोप हैं जिनकी जांच की जा रही है।
रेणुका शर्मा ने बताया कि अलका लाहोटी ने कमेटी के संविधान के अनुसार प्रत्येक जन्माष्टमी पर कमेटी की वार्षिक बैठक बुलाकर गौशाला की सालाना आय-व्यय रिपोर्ट पेश नहीं की। उन्होंने सभी सदस्यों के पास पत्र भेजकर उनके हस्ताक्षर लिए, जबकि संविधान के अनुसार इसकी बैठक बुलाना अनिवार्य था। इन्हीं कारणों से उन पर कार्रवाई की गई। अलका लाहोटी ने पिछले साल के अक्टूबर महीने में संरक्षक रेणुका शर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
ये तथ्य भी सामने आए
दरअसल, इस विवाद की परतें धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही हैं। कथित तौर पर अलका लाहोटी सबको यही बताती थीं कि यह श्रीकृष्ण गोशाला उनके पिता वीरेंद्र कुमार लाहोटी ने खुलवाया था। लेकिन अब सामने आया है कि 1953-54 में इस गोशाला के लिए स्थानीय लोगों ने भूदान किया था। अलका लाहोटी के पिता वीरेंद्र कुमार लाहोटी एक अग्रणी वकील और वरिष्ठ समाज सेवी थे। उन्होंने इस गोशाला के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन उन्होंने गोशाला के लिए पूरी भूमि दान नहीं की थी।
इस गोशाला के नाम पर बिजनौर के लोगों के द्वारा 450 बीघे की भूमि दान की गई थी। 280 बीघे भूमि गोशाला से लगभग 10 किलोमीटर दूर मिट्ठूपुर गांव में है। शेष 170 बीघे पर गोशाला बनी हुई है। इसी हिस्से में एक कृष्ण गोपाल महाविद्यालय बना दिया गया है, जिसकी भूमि को वापस पाने के लिए पूरा विवाद खड़ा हुआ।
गोपाल महाविद्यालय का विवाद ऐसे आया सामने
दरअसल, इस श्रीकृष्ण गोशाला के अध्यक्ष समय-समय पर कमेटी के सदस्यों के चुनाव के आधार पर बदलते रहते हैं। इसी क्रम में एक बार संतोष कुमार अग्रवाल को श्रीकृष्ण कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। आरोप है कि उन्होंने अध्यक्ष रहते हुए गोशाला की 70 बीघा जमीन कृष्ण गोपाल महाविद्यालय के लिए दे दी और स्वयं को ही इस महाविद्यालय का संरक्षक बना दिया। यानी एक तरह से उन्होंने यह भूमि कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर स्वयं अपने आप को ही दे दिया। इसी हिस्से को वापस पाने के लिए अलका लाहोटी लड़ाई लड़ रही थीं।
चंपत राय या उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं
अमर उजाला को श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी के गठन के समय प्रबंध कमेटी के सदस्यों की पूरी सूची मिल गई। इस कमेटी के किसी भी सदस्य के रूप में चंपत राय या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम नहीं है। इसी प्रकार, वर्तमान समय में बनी कमेटी में भी चंपत राय या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम शामिल नहीं है।
जहां तक चंपत राय के द्वारा कृष्ण गोपाल महाविद्यालय की मान्यता के लिए पत्र लिखे जाने का मामला है, बताया गया है कि चंपत राय ने यह पत्र एक सामाजिक कार्य समझकर लिख दिया था। उन्हें केवल इतनी सूचना दी गई थी कि चूंकि नगीना में कोई महाविद्यालय नहीं है और छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी परेशानी होती है, अगर यह महाविद्यालय नगीना में बन जाता है तो इससे स्थानीय छात्रों को काफी लाभ होगा। लेकिन बाद में विवादित भूमि का मामला सामने आ गया था।
बेहद पवित्र स्थल मानते हैं लोग
अमर उजाला ने इस पूरे प्रकरण पर अलका लाहोटी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थीं।