{"_id":"5ddc999f8ebc3e548b2b091e","slug":"shivsena-attacks-governor-through-saamna-saya-bhagat-choose-to-be-hanged-and-other-killed-democracy","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक भगत सिंह फांसी पर झूले दूसरे ने रात के अंधेरे में लोकतंत्र को सूली से लटकाया: शिवसेना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एक भगत सिंह फांसी पर झूले दूसरे ने रात के अंधेरे में लोकतंत्र को सूली से लटकाया: शिवसेना
Tue, 26 Nov 2019 08:48 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 26 Nov 2019 08:48 AM IST
विज्ञापन
देवेंद्र फडणवीस-भगत सिंह कोश्यारी-अजित पवार
- फोटो : Twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब से महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के परिणाम आए हैं तब से शिवसेना अपने मुखपत्र सामना के जरिए लगातार भाजपा पर निशाना साध रही है। पार्टी ने अब सामना में केंद्र और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर हमला बोला है। जिसमें लिखा है कि सत्ताधीशों ने महाराष्ट्र के स्वाभिमान और प्रतिष्ठा का बाजार लगा रखा है।
विज्ञापन
सामना में लिखा है, 'ऐसे लोग जिनका महाराष्ट्र से किसी भी प्रकार का भावनात्मक संबंध नहीं है, वे लोग शिवराय के महाराष्ट्र की इज्जत धूल में मिला सकते हैं। महाराष्ट्र के गठन और निर्माण में इन लोगों ने खून तो छोड़ो पसीने की एक भी बूंद नहीं बहाई होगी, ऐसे लोगों ने यह राजनीतिक घोटाला किया है। शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी इन तीनों पार्टियों ने मिलकर राजभवन में 162 विधायकों का पत्र प्रस्तुत किया है। ये सभी विधायक राजभवन में राज्यपाल के समक्ष खड़े रहने को तैयार हैं। इतनी साफ तस्वीर होने के बावजूद राज्यपाल ने किस बहुमत के आधार पर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई?'
विज्ञापन
राज्यपाल पर निशाना साधते हुए सामना में लिखा है, 'इन लोगों ने जाली कागज पेश किए और संविधान के रक्षक भगतसिंह नामक राज्यपाल ने आंख बंद करके उन पर विश्वास किया। फिर तीनों पार्टियों के विधायकों ने अपने हस्ताक्षरवाला पत्र सौंपा, इस पर भगतसिंह राज्यपाल महोदय का क्या कहना है? एक भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था, यह तो हम जानते हैं। वहीं दूसरे भगतसिंह के हस्ताक्षर से रात के अंधेरे में लोकतंत्र और आजादी को वध स्तंभ पर चढ़ा दिया गया।'
विज्ञापन
शिवसेना का कहना है कि अजित पवार का खेल खत्म हो गया है। यह उनकी हार की मानसिकता है। पार्टी ने लिखा, 'महाराष्ट्र में जो कुछ भी हुआ उसे ‘चाणक्य-चतुराई’ या ‘कोश्यारी साहेब की होशियारी’ कहना भूल होगी। विधायकों का अपहरण करना और उन्हें दूसरे राज्य में ले जाकर कैद रखना, ये कैसी चाणक्य नीति है? अजीत पवार का सारा खेल खत्म हो गया तब उन्होंने कहा कि ‘शरद पवार ही हमारे नेता हैं और मैं राष्ट्रवादी का हूं।’ ये हार की मानसिकता है। अगर तुम शरद पवार के भतीजे के रूप में घूमते हो तो पहले बारामती से, विधायक पद से और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर तुम्हें अपनी अलग राजनीति करनी चाहिए थी। लेकिन जो कुछ चाचा ने कमाया उसे चोरी करके ‘मैं नेता, मेरी पार्टी’ कहना पागलपन की हद है।'