किसानों के लिए खुशखबरी: कृषि मंत्री ने लॉन्च की दो नई जीनोम-संपादित चावल की किस्में, लागत घटेगी और पानी बचेगा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में चावल की दो नई किस्में लॉन्च की है। जिनकी खासियत ये है कि इनकी पैदावार में लागत घटेगी और पानी भी बचेगा। शिवराज चौहान ने इस दौरान युवा किसानों से अपील की कि वे आधुनिक और उन्नत खेती की तकनीक अपनाएं। उन्होंने कहा, 'जब वैज्ञानिक और किसान मिलकर काम करेंगे, तब खेती में चमत्कार होगा।'
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए छह सूत्रीय रणनीति
इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए 6 बिंदुओं पर काम कर रही है। जिसमें उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन लागत घटाना, फसल का सही दाम दिलाना, नुकसान की भरपाई करना, खेती में विविधता लाना और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना शामिल है। उन्होंने कहा कि आज जो दो नई चावल की किस्में लॉन्च हुई हैं, वे उत्पादन लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी। इससे न सिर्फ किसानों को फायदा होगा, बल्कि आम जनता को भी सस्ते और पोषक अनाज मिलेंगे।
नई किस्मों से बढ़ेगी मुस्कान
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 4, 2025
समृद्ध होंगे देश के किसान
आज पूसा, नई दिल्ली में जीनोम-संपादित धान की दो किस्मों का लोकार्पण किया। pic.twitter.com/8uBGeNmiv4
पानी की बचत और फसल जल्दी तैयार होगी
मंत्री ने बताया कि इन नई किस्मों से फसल जल्दी तैयार होगी, जिससे अगली फसल की बुवाई समय पर हो सकेगी। साथ ही, चावल की खेती में सिंचाई का पानी भी कम लगेगा। उन्होंने कहा, 'इससे करीब 7500 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी। यह देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।'
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भारत को 'विश्व का अन्न भंडार' बनाने का सपना
कृषि मंत्री ने आगे कहा कि आने वाले समय में हमें भारत को दुनिया का फूड बास्केट यानी खाद्यान्न भंडार बनाना है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल 48,000 करोड़ रुपये का बासमती चावल विदेशों में बेचता है, जो हमारे किसानों की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि हम सोयाबीन, अरहर, मसूर, उड़द, तिलहन और दूसरी दालों का उत्पादन भी तेजी से बढ़ाएं।
क्या है जीनोम एडिटिंग तकनीक?
इन चावल की किस्मों को सीआरआईएसपीआर-सीएएस नाम की तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें पौधे के जीन में बेहद सूक्ष्म बदलाव किए जाते हैं, लेकिन कोई बाहरी (विदेशी) जीन नहीं डाला जाता। यह तकनीक सुरक्षित मानी जाती है और भारत में इसे खेती के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इस तकनीक के जरिए विकसित इन किस्मों में दो मुख्य फायदे हैं। जिसमें पहला ये है कि फसल जल्दी तैयार होती है। जबकि दूसरा फायदा ये है कि कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिलती है।
इन नई किस्मों से किसानों को दो बड़े फायदे होंगे:
- उत्पादन लागत घटेगी — क्योंकि कम सिंचाई और कम खाद में भी अच्छी फसल होगी।
- ज्यादा आमदनी — क्योंकि जल्दी फसल कटेगी, अगली फसल जल्दी बोई जा सकेगी और ज्यादा चक्र में खेती हो सकेगी।
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