दर्जन भर सीटों पर सपा-बसपा, कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं शिवपाल सिंह यादव
जौनपुर की सीटगठबंधन में बसपा के हिस्से आई है। यहां से बसपा श्यामलाल यादव को मैदान में उतारा है, लेकिन प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) की प्रत्याशी संगीता यादव श्यामलाल के दांत खट्टे करने मेंजुटी है।
धौरहरा, बरेली, अलीगढ़, इटावा, फिरोजाबाद, गोंडा में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस और गठबंधन के प्रत्याशी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। महराजगंज में शिवपाल सिंह यादव ने तनुश्री त्रिपाठी को टिकट दिया है। तनुश्री पहले कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित हो चुकी थीं, लेकिन बाद में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया।
तनुश्री पूर्व बसपा नेता अमरमणि त्रिपाठी की पुत्री और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी की बहन हैं। अमरमणि का महराजगंज में एक आधार है और तनुश्री को इसका भी लाभ मिलेगा। इस तरह से तनुश्री त्रिपाठी कांग्रेस प्रत्याशी को बड़ा नुकसान पहुंचाती नजर आ रही हैं।
जारी है लड़ाई
धौरहरा में जितिन प्रसाद के जनाधार में बड़ी सेंध कभी दस्यु सरगना रहे मलखान सिंह यादव लगा रहे हैं। बरेली में कु. समन ताहिर, मिश्रिख में अरुण कोरी को 50 हजार तक मत मिलने की उम्मीद है। अकबरपुर में महेंद्र सिंह यादव लड़ रहे हैं तो सुल्तानपुर में कमला यादव भाजपा प्रत्याशी मेनका यादव की राह आसान बना रही हैं।
यही स्थिति बस्ती में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बालगोपाल यादव की भी है। वह वहां गठबंधन के प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाते नजर आ रहे हैं। प्रतापगढ़ में जयसिंह यादव राजकुमारी रत्ना सिंह के लिए परेशानी का सबब बने हैं। गोरखपुर में श्यामनारायण यादव ने भाजपा के रवि किशन की राह आसान बना दी है। इलाहाबाद में अभिमन्यु सिंह पटेल भी 50 हजार मत पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उदय ही समाजवादी झगड़े से हुआ है
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के मीडिया प्रभारी रुपेश पाठक हैं। रुपेश पाठक वोट कटवा के सवाल के जवाब में कहते हैं कि हमारा जन्म ही इसलिए हुआ है। रूपेश के अनुसार समादवादी पार्टी में झगड़े के बाद ही प्रगतिशील समाजवादी पार्टी है। इसलिए हम दो पहचान वाले लोगों के बीच में विवाद से ही अपनी जगह बना सकेंगे। वह हम कर रहे हैं और चार महीने पुरानी पार्टी के प्रत्याशी करीब 12-15 सीटों पर अच्छा लड़ रहे हैं।
रुपेश को यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उनके प्रत्याशी सपा-बसपा और कांग्रेस की जीत की राह को मुश्किल कर रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस की पहचान का विरोध करके समाजवादी पार्टी खड़ी हुई, समाजवादी पार्टी (पिछड़ों) और कांग्रेस, भाजपा का विरोध करके बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपना आधार बनाया।
भाजपा ने हिंदू और मुसलमान के बीच में विवाद खड़ा करके धर्म के आधार अपनी जगह बनाई। रूपेश का कहना है कि यह हमारी सफलता है कि हमारे प्रत्याशी 50 हजार से एक लाख तक वोट लाने में सक्षम दिखाई दे रहे हैं। अब कोई वोट कटवा कहे तो यह उसका अपना मत है।