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शिवसेना ने माना: अनिल देशमुख का विश्वासपात्र और दुलारा पुलिस अधिकारी था सचिन वाजे

Mon, 29 Mar 2021 02:12 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 29 Mar 2021 02:12 AM IST
सार

  • तिलमिलाई एनसीपी ने किया पलटवार
  • राउत ने पत्र में लिखा कि गृहमंत्री देशमुख ने मुंबई पुलिस के अधिकारियों को उनकी जानकारी के बिना 100 करोड़ की वसूली का टार्गेट दिया था।

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Shiv Sena spokesperson Sanjay Raut targets Anil Deshmukh sachin vaje
संजय राउत और अनिल देशमुख - फोटो : पीटीआई

विस्तार

एंटीलिया मामले पर शिवसेना प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक लेख से महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में खलबली मच गई है।

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राउत ने रविवार को पार्टी के मुखपत्र सामना में अपने साप्ताहिक कॉलम लिखा कि मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक से लदी कार खड़ी करने के मामले में गिरफ्तार सचिन वाजे गृहमंत्री अनिल देशमुख का विश्वासपात्र और दुलारा पुलिस अधिकारी था। इतना ही नहीं, उन्होंने लिखा, वाजे वसूली कर रहा था और गृहमंत्री को पता न हो, यह कैसे हो सकता है। इस पर एनसीपी ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से गठबंधन में संकट पैदा होता है।
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राउत ने लिखा है कि एंटीलिया मामले और मनसुख हिरेन की हत्या के बाद सरकार ने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का तबादला कर दिया। सिंह एक महत्वाकांक्षी अधिकारी हैं। होमगार्ड महानिदेशक पद पर किया गया तबादला उन्हें सहन नहीं हुआ।
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इसी बीच अनिल देशमुख ने तेल डाला और कहा कि परमबीर ने गलतियां की, इसलिए उन्हें जाना पड़ा। उनके इस बयान के बाद परमबीर ने 100 करोड़ की वसूली के लक्ष्य वाली चिट्ठी बम फोड़ दिया।

उन्होंने पत्र में लिखा कि गृहमंत्री देशमुख ने मुंबई पुलिस के अधिकारियों को उनकी जानकारी के बिना 100 करोड़ की वसूली का टार्गेट दिया था। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। सवाल यह है कि यह लक्ष्य किसको दिया गया सचिन वाजे को। मुंबई पुलिस आयुक्तालाय में बैठकर वाजे वसूली कर रहा है और गृहमंत्री को पता नहीं है।

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देशमुख दुर्घटनावश बने गृहमंत्री
शिवसेना नेता ने लिखा कि देशमुख को दुर्घटनावश गृहमंत्री का पद मिल गया क्योंकि दिलीप वलसे पाटिल और जयंत पाटिल ने यह पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। देशमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बिना वजह पंगा ले लिया।

गृहमंत्री का बर्ताव सौ सुनार की एक लोहार की होनी चाहिए। पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ सैल्यूट लेने के लिए नहीं होता। प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है और प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है। यह भूलने से कैसे चलेगा।

गृहमंत्री, पुलिस आयुक्त और मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा व विश्वासपात्र रहा सचिन वाजे महज एक सहायक पुलिस निरीक्षक था। लेकिन उसे सरकार में असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया। यह जांच का विषय है।

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सरकार में डैमेज कंट्रोल का अभाव
उन्होंने लिखा कि परमबीर सिंह ने जब आरोप लगाया तब गृह विभाग और सरकार की धज्जियां उड़ गई लेकिन सरकार के बचाव में तुरंत कोई महत्वपूर्ण मंत्री सामने नहीं आया। चौबीस घंटे गड़बड़ी का माहौल बना रहा। लोगों को शुरू में परमबीर सिंह का आरोप सही लगा। इसकी वजह से सरकार के पास डैमेज कंट्रोल की कोई व्यवस्था नहीं थी।

अजीत पवार की राउत को नसीहत, जख्म पर नमक न डालें

एनसीपी नेता व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने संजय राउत पर पलटवार किया कि वह जख्मों पर नमक डालने का काम न करें। जब तीन पार्टियों की सरकार अच्छे से चल रही है तो किसी को कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहिए।

इस तरह के बयान से गठबंधन में संकट पैदा होता है। राज्य में एनसीपी कोटे से कौन मंत्री बनेगा, यह पार्टी अध्यक्ष शरद पवार तय करते हैं। इसी तरह कांग्रेस में सोनिया गांधी और शिवसेना में उद्धव ठाकरे तय करते हैं। किसी दूसरे को इस पर सवाल करने का अधिकार नहीं है।

वहीं, पार्टी प्रवक्ता व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि अनिल देशमुख दुर्घटनावश गृहमंत्री नहीं बने हैं। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने सोच समझकर उन्हें जिम्मेदारी दी है। अगर, गृहमंत्री में कुछ कमियां हैं तो उसे वह दूर करेंगे।

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