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Maharashtra Politics: तीरकमान मुद्दे पर हाईकोर्ट का सवाल, पूछा- EC के फैसले का इंतजार क्यों ना किया जाए?

Mon, 14 Nov 2022 06:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 14 Nov 2022 06:20 PM IST
सार

शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के खिलाफ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई की। इस दौरान, अदालत ने पूछा कि उसे पार्टी गुटों के बीच विवाद पर पोल पैनल के अंतिम फैसले का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए। 

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Shiv Sena row: delhi high court asks Why not await EC decision on bow and arrow election symbol
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

महाराष्ट्र में शिवसेना में हुए विद्रोह के बाद शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब तक थमा नहीं है। दो धड़ों में बंटी शिवसेना अब चुनाव निशाना 'तीरकमान' को लेकर एक दूसरे के सामने है। फिलहाल मामला चुनाव आयोग के पाले में है। हालांकि अंधेरी उपचुनाव और निकाय चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों धड़ों को अस्थायी रूप से नया नाम और नया चुनाव निशान जारी किया था। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट ने दिल्ली हाईकोर्ट में तीरकमान वाले चुनाव निशान पर अपना दावा करते हुए एक याचिका दाखिल कर रखी है। जिसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि इस मामले में उसे चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए? 

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गौरतलब है कि सोमवार को शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के खिलाफ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई की। इस दौरान, अदालत ने पूछा कि उसे पार्टी गुटों के बीच विवाद पर पोल पैनल के अंतिम फैसले का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए। 
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अदालत ने कहा कि पहले का  चुनाव आयोग का आदेश उपचुनाव के उद्देश्य से था। वह कोई अंतिम निर्णय नहीं है? जब उपचुनाव पहले ही हो चुके हैं, ऐसे में अंतरिम आदेश का अब कोई अस्तित्व ही नहीं बचता। ऐसे में अदालत को चुनाव आयोग का अंतिम विचार का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए?"  सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि अदालत चुनाव आयोग से समयबद्ध तरीके से 'धनुष और तीर' चिन्ह आवंटित करने के मुद्दे पर फैसला करने के लिए कहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों गुट चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलील रख सकते हैं।
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वहीं, इस पर चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील सिद्धांत कुमार ने तर्क दिया कि आयोग एक संवैधानिक निकाय है और किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए एक विशिष्ट समयरेखा निर्देशित नहीं की जा सकती है। फिलहाल अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 15 नवंबर को सूचीबद्ध किया है।  साथ ही सभी पक्षों से सबमिशन का एक संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा है। 

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