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सेना में महिलाओं स्थायी कमीशन पर न्यायालय के फैसले की शिवसेना ने की प्रशंसा, केंद्र पर साधा निशाना

Wed, 19 Feb 2020 03:18 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: देव कश्यप Updated Wed, 19 Feb 2020 03:18 PM IST
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Shiv Sena praises Supreme court verdict on Permanent Commission for Women in Army
उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए केंद्र को अपने नजरिए और मानसिकता में बदलाव लाने को कहा था। इस मामले पर भाजपा की कभी सहयोगी रही शिवसेना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शिवसेना ने ऐतिहासिक करार देते हुए बुधवार को इस मामले में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। शिवसेना ने केंद्र सरकार के रुख को प्रतिगामी और महिलाओं का अपमान करने वाला करार दिया।
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शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महिला शक्ति की जीत करार दिया गया है और कहा गया है कि केंद्र सरकार को अपने व्यवहार और दृष्टि में बदलाव करने की जरूरत है। मुखपत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि केंद्र सरकार की सोच में दिक्कत है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना में लैंगिक समानता के मार्ग में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिला अधिकारियों के कमान संभालने का मार्ग प्रशस्त कर दिया और कहा कि सैन्य बलों में लैंगिक दुराग्रह खत्म करने के लिये सरकार को अपनी सोच बदलनी होगी।

इस फैसले का हवाला देते हुए शिवसेना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब बहादुरी और कुर्बानी की बात आती है तो उसमें कोई लैंगिक दुराग्रह नहीं रखा जा सकता है। यह फैसला महिला शक्ति की जीत है।

मुखपत्र में कहा गया है कि यह स्तब्ध करनेवाला है कि केंद्र सरकार ने महिलाओं की शारीरिक क्षमता और मानसिक शक्ति पर सवाल उठाया। उसने कहा कि केंद्र का रुख प्रतिगामी सोच दिखाता है और यह महिलाओं का अपमान है।


सेना ने अपने मुखपत्र में रानी लक्ष्मीबाई, महारानी ताराबाई, रानी चेन्नम्मा, अहिल्याबाई होल्कर की बहादुरी और वीरता का भी हवाला दिया और कहा कि केंद्र ने महिलाओं की क्षमता पर सवाल उठाया। केंद्र सरकार का इतिहास कमजोर लगता है। संपादकीय में कहा गया है कि आजाद हिंद फौज की कप्तान लक्ष्मी सहगल को कौन भूल सकता है? केंद्र सरकार को अपने व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है।

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