मुंबई: शिवसेना पार्षद के खिलाफ आयकर छापेमारी पर बोले राउत, आगामी निकाय चुनावों को देखते हुए की गई कार्रवाई
शिवसेना के पार्षद और बीएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव के परिसरों पर हुई आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने केंद्र पर आरोप लगाए हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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शिवसेना के फायर ब्रांड नेता संजय राउत ने रविवार को आरोप लगाया कि पार्टी के पार्षद यशवंत जाधव के परिसरों पर आयकर विभाग की छापेमारी मुंबई में आगामी निकाय चुनावों को देखते हुए की गई है। राउत ने कहा कि यह छापेमारी शिवसेना की छवि धूमिक करने के उद्देश्य से हुई है।
राउत ने कहा, 'हम ये सब नोट कर रहे हैं। जनता भी सब देख रही है। उन्हें यह सब करने दीजिए और देखिए कि वह क्या खोज रहे हैं।' शिवसेना सांसद ने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां केवल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में ही व्यस्त हैं जहां पर भाजपा की सरकार नहीं है।
आयकर विभाग ने कर चोरी के कथित आरोपों में शुक्रवार को यशवंत जाधव के परिसरों पर छापेमारी की थी। वह शिवसेना शासित बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की शक्तिशाली स्थायी समिति के प्रमुख हैं। बता दें कि बीएमसी चुनावों के लिए कार्यक्रम का एलान अभी नहीं किया गया है।
दानवे का दावा, एमवीए सरकार में कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं
केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने भी रविवार को दावा किया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में एक भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है।
जालना में मीडिया से बात करते हुए दानवे ने इस आरोप को भी सिरे से खारिज किया कि भाजपा केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल एमवीए के नेताओं के खिलाफ कर रही है। बता दें कि एमवीए गठबंधन में शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं।
दानवे ने कहा, '(उद्धव) ठाकरे पिछले छह महीने से अपने घर से बाहर नहीं निकले हैं। वह किसी से नहीं मिले हैं। एमवीए सरकार में एक भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है।' महाराष्ट्र सड़क परिवन निगम (एमएसआरटीसी) के कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर भी उन्होंने आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि जब ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद संभाला था, तब उन्होंने कहा था कि राज्य में कोई हलचल नहीं होगी। लेकिन एमएसआरटीसी कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं और राज्य सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है।