महाराष्ट्र: ईडी की पूछताछ के दौरान शिवसेना नेता की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती कराया गया
आनंदराव अडसुल को आज मुंबई के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दफ्तर में पूछताछ के लिए तलब किया गया है। ईडी ने पिछले दिनों शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल को ऑफिस में पूछताछ के लिए समन जारी किया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महराष्ट्र में सीटी सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में शिवसेना नेता की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अमरावती से शिवसेना के पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल और उनके बेटे अभिजीत अडसुल को आज मुंबई के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दफ्तर में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। ईडी ने पिछले दिनों शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल को ऑफिस में पूछताछ के लिए समन जारी किया था।
सुबह आठ बजे आनंदराव और उनके बेटे अभिजीत को ईडी दफ्तर पहुंचना था, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आनंदराव अडसुल ईडी के सामने पेश नहीं हुए। इस बीच ईडी के अधिकारी आनंदराव के कांदिवली स्थित आवास पर पहुंचे और दोनों लोगों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान आनंदराव की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
#UPDATE Mumbai: Shiv Sena leader Anandrao Adsul taken to a hospital after his health condition deteriorated while an ED raid was taking place at his residence in connection with City Co-operative bank fraud.
— ANI (@ANI) September 27, 2021
विधायक की शिकायत पर ईडी की कार्रवाई
बडनेरा से भाजपा विधायक रवि राणा ने सिटी बैंक घोटाला मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत पर ईडी ने आनंदराव के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल पर सिटी बैंक से 900 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। भाजपा विधायक रवि राणा ने बताया कि कि यह भ्रष्टाचार तब हुआ जब आनंदराव अडसुल सिटी बैंक के अध्यक्ष थे।
हर जांच के लिए तैयार- अभिजीत अडसुल
अडसुल के रिश्तेदार बैंक के निदेशक मंडल में थे। साथ ही ऋण वितरण में अनियमितताएं और एनपीए में गिरावट आई थी। पिछले 2 साल से मंदी की वजह से बैंक की स्थिति खराब है। वहीं, आनंदराव का बेटा अभिजीत अडसुल ने कहा कि वह सभी जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि,अभिजीत ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो। राजनैतिक से प्रेरित होकर मामले की जांच नहीं होनी चाहिए।