फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Shashi Tharoor Said That Dont sacrifice intellectual freedom on altar of party politics In Kannur University Syllabus Cotroversy

कन्नूर यूनिवर्सिटी: गोलवलकर-सावरकर को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विवाद, पर थरूर बोले- उन्हें पढ़ेंगे नहीं, तो विचारों का खंडन कैसे करेंगे

Sun, 12 Sep 2021 07:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 12 Sep 2021 07:40 PM IST
सार

थरूर के इस बयान को कन्नूर यूनिवर्सिटी के उस फैसले के समर्थन में देखा जा रहा है, जिसके तहत संघ के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर और हिन्दू महासभा के नेता विनायक दामोदर सावरकर की पुस्तकों के अंश को ग्रैजुएशन के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

विज्ञापन
Shashi Tharoor Said That Dont sacrifice intellectual freedom on altar of party politics In Kannur University Syllabus Cotroversy
शशि थरूर - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने रविवार को कहा कि दलगत राजनीति की वेदी पर बौद्धिक स्वतंत्रता की बलि नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मानना मूर्खतापूर्ण है कि किसी के विचारों की अनदेखी कर आप उन्हें हरा सकते हैं। थरूर के इस बयान को कन्नूर यूनिवर्सिटी के उस फैसले के समर्थन में देखा जा रहा है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर और हिन्दू महासभा के नेता विनायक दामोदर सावरकर की पुस्तकों के अंश को शासन और राजनीति के ग्रैजुएशन के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

विज्ञापन


कई छात्र संगठनों ने आलोचना की
बता दें कि कन्नूर यूनिवर्सिटी के इस निर्णय की कई छात्र संगठनों ने आलोचना की है। इन संगठनों का आरोप है कि यह यूनिवर्सिटी के भगवाकरण किए जाने की कोशिश है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा था कि उनकी सरकार उन नेताओं और विचारों को महिमामंडित नहीं करेगी, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को पीठ दिखाई थी।
विज्ञापन


फेसबुक पोस्ट के जरिए कही बात
थरूर ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “बौद्धिक स्वतंत्रता का हमारे समाज में इतना महत्व है कि दलगत राजनीति की वेदी पर उसकी बलि नहीं दी जा सकती। यह मानना मूर्खतापूर्ण है कि किसी के विचारों की अनदेखी कर आप उन्हें हरा सकते हैं। मैंने अपनी पुस्तकों में सावरकर और गोलवलकर को उद्धृत किया है और उनका खंडन किया है।”
विज्ञापन
विज्ञापन


थरूर ने बताया कि कुछ दोस्तों ने उनके इस रुख की आलोचना भी की थी। उन्होंने कहा, "अकादमिक स्वतंत्रता हमें पढ़ने, समझने और हर दृष्टिकोण पर चर्चा करने का अवसर देती है, उनसे भी जिनसे हम सहमत नहीं होते।" थरूर ने आगे लिखा, “अगर हम सावरकर और गोलवलकर को पढ़ेंगे नहीं, तो किस आधार पर उनके विचारों का खंडन करेंगे? कन्नूर विश्वविद्यालय में (रवींद्रनाथ) टैगोर और (महात्मा) गांधी के बारे में भी पढ़ाया जाता है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed