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Tharoor: मुस्लिम क्षेत्र में ईसाई तो हिंदू इलाके में जीता मुसलमान उम्मीदवार, शशि थरूर ने बताई असली केरल स्टोरी

Thu, 07 May 2026 04:58 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 07 May 2026 04:58 PM IST
सार

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सांप्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश की है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बताया कि कैसे मुस्लिम बहुल इलाकों ने हिंदू और ईसाई उम्मीदवारों को चुना, जबकि हिंदू बहुल क्षेत्रों ने मुस्लिम नेताओं को जीत दिलाई। थरूर ने इसे असली 'केरल स्टोरी' बताया।

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shashi Tharoor on Christian wins in a Muslim area while Muslim wins in Hindu region says real kerala story
कांग्रेस सांसद शशि थरूर - फोटो : ANI

विस्तार

केरल की राजनीति से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो पूरे देश के लिए भाईचारे का संदेश दे रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने हाल ही में आए केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों को सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि केरल के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि वे वोट देते समय धर्म या जाति नहीं, बल्कि इंसानियत देखते हैं। थरूर ने सोशल मीडिया पर उन लोगों को जवाब दिया है जो केरल की छवि को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश करते हैं।
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थरूर ने 'केरल स्टोरी' पर क्या दावा किया?
शशि थरूर ने चुनाव नतीजों के जरिए एक नई 'केरल स्टोरी' पेश की है, जो फिल्म में दिखाए गए दावों से बिल्कुल अलग है। थरूर ने बताया कि केरल की जनता ने नफरत फैलाने वालों को कड़ा सबक सिखाया है। थरूर ने आगे बाताया कि थवनूर एक ऐसा इलाका है, जहां मुस्लिमों की संख्या सबसे ज्यादा है, लेकिन वहां के लोगों ने वीएस जॉय नाम के ईसाई उम्मीदवार को अपना नेता चुना।
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कलमसेरी क्षेत्र में हिंदू आबादी ज्यादा है, मगर वहाँ के मतदाताओं ने वीई अब्दुल गफूर को भारी वोटों से जिताया। कोच्चि जहां ईसाइयों का दबदबा है, वहाँ से मोहम्मद शियास ने जीत हासिल की। इतना ही नहीं, थरूर ने बाद में स्पष्ट किया कि त्रिकारपुर जैसी मुस्लिम बहुल सीट से संदीप वारियर जैसे हिंदू नेता ने जीत दर्ज कर सद्भाव की इस कहानी को पूरा कर दिया है।
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केरल की राजनीति पर और क्या बोले थरूर?
आज के दौर में जहां देश के कई हिस्सों में धर्म और पहचान के नाम पर राजनीति हो रही है, वहीं केरल एक अलग मॉडल बनकर उभरा है। थरूर का मानना है कि भले ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान की राजनीति का असर दिख रहा हो, लेकिन केरल के मतदाता आज भी इंसान को पहले और उसकी जाति या धर्म को बाद में देखते हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि केरल की यह जीत उन लोगों के लिए एक आईना है जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक, केरल का हर नागरिक पहले एक मलयाली है और फिर कुछ और।

कांग्रेस और सहयोगियों का कैसा रहा प्रदर्शन?
केरल विधानसभा की 140 सीटों पर हुए इस मुकाबले में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने शानदार जीत दर्ज की है। इस गठबंधन ने कुल 102 सीटों पर कब्जा जमाया है, जो बताता है कि जनता ने उनके विकास और भाईचारे के एजेंडे पर मुहर लगाई है। थरूर द्वारा बताए गए सभी विजेता उम्मीदवार इसी गठबंधन का हिस्सा हैं। इसमें वीई अब्दुल गफूर आईयूएमएल पार्टी से हैं, जो कांग्रेस की एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है। यह जीत न केवल राजनीतिक है, बल्कि सामाजिक एकता की भी जीत मानी जा रही है।

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