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'हिंदी को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन कक्षा 1 से इसे अनिवार्य न करें', भाषा विवाद पर शरद पवार

Thu, 26 Jun 2025 04:51 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 26 Jun 2025 04:51 PM IST
सार

एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य किए जाने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी को कक्षा 5 के बाद पढ़ाया जा सकता है, लेकिन छोटी कक्षाओं में बच्चों पर भाषा का अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहिए। पवार ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात की और ठाकरे बंधुओं के इस मुद्दे पर रुख का समर्थन किया।
 

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sharad pawar on hindi language in schools maharashtra controversy
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से कहा कि महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नई भाषा को शिक्षा में शामिल करना है तो वह कक्षा 5 के बाद ही होनी चाहिए।
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शरद पवार ने कहा, 'प्राथमिक शिक्षा में हिंदी को अनिवार्य बनाना सही नहीं है। कक्षा 5 के बाद हिंदी पढ़ाई जाए, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। देश का एक बड़ा हिस्सा हिंदी बोलता है, इसलिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। लेकिन छोटे बच्चों पर नई भाषाओं का बोझ डालना उचित नहीं है।'
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मातृभाषा को सर्वोपरि बताया

पवार का यह बयान महाराष्ट्र सरकार के उस संशोधित आदेश के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि हिंदी को कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। पवार ने इसे लेकर चिंता जताते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और माता-पिता को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि बच्चे को हिंदी पढ़नी है या नहीं। उन्होंने कहा, "अगर हम बच्चों पर दूसरी भाषा थोपेंगे और उसकी वजह से मातृभाषा को नजरअंदाज करेंगे, तो यह उचित नहीं होगा। सरकार को हिंदी को पहली कक्षा से अनिवार्य बनाने का निर्णय वापस लेना चाहिए।"
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'मराठी समाज से एकजुटता की अपील'

शरद पवार ने इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रुख का समर्थन किया और कहा कि मराठी भाषी समाज को इस मुद्दे पर एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अच्छा संकेत होगा अगर मराठी समाज अपनी भाषा और संस्कृति के लिए एकजुट होकर खड़ा होता है। उल्लेखनीय है कि ठाकरे बंधु पहले ही बीजेपी सरकार पर भाषा के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगा चुके हैं। पवार ने कहा कि मातृभाषा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाना चाहिए।
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