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शंकर सिंह वाघेला ने छोड़ी एनसीपी की सदस्यता, पार्टी महासचिव पद से दिया इस्तीफा
Mon, 22 Jun 2020 04:55 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 22 Jun 2020 04:55 PM IST
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शंकर सिंह वाघेला (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शंकर सिंह वाघेला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी की सक्रिय सदस्यता भी छोड़ दी है। वाघेला गुजरात में एनसीपी अध्यक्ष के पद पर जयंत पटेल उर्फ बोस्की की नियुक्ति के बाद से ही पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। माना जा रहा है कि यह इस्तीफा उसी नाराजगी का परिणाम है।
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Shankersinh Vaghela tenders his resignation from the post of national general secretary of Nationalist Congress Party (NCP) as well as active membership of the party. pic.twitter.com/9hWt0XBq77
— ANI (@ANI) June 22, 2020विज्ञापन
गुजरात की राजनीति में दिग्गज नेता माने जाने वाले वाघेला कांग्रेस का साथ छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए थे। शुरुआत में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सक्रिय सदस्य रहे वाघेला इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी के टिकट पर कपडवंज से पहली बार सांसद बने थे। हालांकि, साल 1980 के चुनाव में उन्हें हार का सामवना करना पड़ा था। साल 1980 से 1991 तक वाघेला गुजरात में भाजपा के महासचिव और अध्यक्ष रहे। साल 1984 से 1989 तक वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। साल 1989 में वह गांधीनगर लोकसभा सीट से और साल 1991 में वह गोधरा लोकसभा सीट से जीते थे।
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साल 1995 में जब गुजरात में भाजपा ने 182 में से 121 सीटों पर जीत हासिल की को विधायकों ने वाघेला को ही नेता चुना था। लेकिन, पार्टी ने केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी थी। इससे नाराज वाघेला ने सितंबर 1995 में 47 विधायकों के साथ भाजपा से विद्रोह कर दिया था। हालांकि, बाद में समझौता हुआ और वाघेला के साथी सुरेश मेहता को सीएम बना दिया गया। साल 1996 का लोकसभा चुनाव वाघेला हार गए और उन्होंने भाजपा का साथ भी छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता पार्टी नाम से अपने राजनीतिक दल का गठन किया और अक्तूबर 1996 में कांग्रेस के समर्थन के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे।
हालांकि, अक्तूबर1997 में उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उनके साथी दिलीप पारिख सीएम बने। लेकिन, साल 1998 में गुजरात की राजनीतिक स्थिति ऐसी बनी कि विधानसभा चुनाव फिर से कराना पड़ा। वाघेला ने यह चुनाव नहीं लड़ा और अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया। इस चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ फिर सत्ता में आई और केशुभाई पटेल दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे।
साल 2014 में वाघेल कांग्रेस के टिकट से फिर कपजड़वंज लोकसभा सीट से जीते। यूपीए सरकार में वह केंद्रीय मंत्री बने। बाद में कपड़वंज सीट परिसीमन के चलते पंचमहस सीट में तब्दील हुई और 2009 के लोकसभा चुनाव में वाघेला को पंचमहल सीट से हार का सामना करना पड़ा। साल 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में वह कपड़वंज से जीते। 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने साबरकांठा सीट से लड़ा लेकिन भाजपा प्रत्याशी दीपसिंह शंकरसिंह राठौर ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद जुलाई 2017 में 13 विधायकों के साथ उन्होंने कांग्रेस का हाथ भी छोड़ दिया और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से हट गए।
इसके तुरंत बाद उन्होंने साल 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले जन विकास मोर्चा नाम से नया संगठन तैयार किया। चुनाव आयोग में पंजीकृत न होने के चलते उन्होंने अखिल भारतीय हिंदुस्तान कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 95 प्रत्याशियों को उतारा। हालांकि, वह एक भी सीट नहीं जीत सके। इसके बाद वह शरद पवान की एनसीपी में शामिल हो गए थे।