फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   shankaracharya said, women should stay away from shani

शंकराचार्य बोले, 'शनि देवता नहीं ग्रह हैं, उनसे दूर रहें महिलाएं'

Thu, 07 Apr 2016 04:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Thu, 07 Apr 2016 04:40 AM IST
सार

  • मंदिरों में सबसे अधिक जाती हैं महिलाएं 
  • लगातार बढ़ रहे शनि मंदिरों पर भी उठाए सवाल
  • शनि से ज्यादा हनुमान की उपासना करनी चाहिए

विज्ञापन
shankaracharya said, women should stay away from shani
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती - फोटो : pti

विस्तार

महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश न दिए जाने को लेकर मच रहे घमासान के बीच बुधवार को ज्योतिष एवं द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शनि देवता नहीं, ग्रह हैं। इनकी छाया से महिलाओं को दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में नारी को सबसे अधिक सम्मान दिया गया है। अधिकतर देव मंदिरों में महिलाएं ही सबसे अधिक होती हैं। ऐसे में शनि ग्रह के पास महिलाओं के पहुंचने को लेकर ज्यादा शोरशराबा ठीक नहीं है।
विज्ञापन


यहां श्री भैरव मंदिर में हुए एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे स्वामी स्वरूपानंद ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगातार बढ़ते शनि मंदिरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शनि से ज्यादा बजरंग बली हनुमान की उपासना करनी चाहिए क्योंकि वे शनि के दुष्प्रभाव से बचाते हैं। सनातन धर्म में गौ माता और गंगा की महिमा पर कहा कि न तो अपेक्षा के अनुरूप गौ सुरक्षा हो पाई है और न ही बड़े दावों के बीच अब गंगा निर्मल हो सकी है। इसके लिए सरकार और जनमानस दोनों को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
विज्ञापन


देश से लेकर विश्व में लगातार बढ़ते आतंकवाद और इसे धर्म से जोड़ने के मुद्दे पर जगद्गुरु शंकराचार्य बोले कि आतंकी का कोई धर्म नहीं होता। वह चाहे जो हो। उन्होंने आतंक को धर्म से न जोड़ने और सभी को इसका मिलकर मुकाबला करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंटरनेट पर शादियां तोड़ रही पवित्र बंधन
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती नए दौरान में इंटरनेट या सोशल साइटों के माध्यम से होने वाली शादियों को लेकर भी चिंतित नजर आए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के जरिये होने वाली शादियां कम सफल हो रही हैं। युवक या युवती के परिवार, व्यवहार को जाने बिना होने वाले ऐसे विवाह दो तीन साल में ही टूट रहे हैं। सामाजिक व्यवस्था के लिए यह चिंता का विषय है। इससे बचना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed