New Laws: दिल्ली सेवा, डाटा संरक्षण समेत सात नए कानून लागू, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, देखें सूची
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023 अमल में आने के बाद उपराज्यपाल (एलजी) ही दिल्ली के बॉस होंगे। अफसरों की तैनाती-तबादले पर अंतिम फैसला वही करेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाया जाएगा।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण और डाटा संरक्षण समेत सात नए कानून लागू हो गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को इसे मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023 अमल में आने के बाद उपराज्यपाल (एलजी) ही दिल्ली के बॉस होंगे। अफसरों की तैनाती-तबादले पर अंतिम फैसला वही करेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाया जाएगा। सीएम अध्यक्ष और मुख्य सचिव व गृह सचिव इसके सदस्य होंगे। प्राधिकरण बोर्ड या आयोग की नियुक्ति के लिए नामों के पैनल की एलजी से सिफारिश करेगा। एलजी इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
ये कानून अमल में आए
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023
- डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023
- जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023
- भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023
- राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2023
- अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023
डाटा के दुरुपयोग पर 250 करोड़ रुपये तक जुर्माना
नागरिकों के व्यक्तिगत डाटा एकत्र करने और उनका उपयोग करने को लेकर कई अनुपालन आवश्यकताएं बनाई गई हैं। व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी अब कंपनियों की होगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निजी डाटा के दुरुपयोग पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। सरकार को कंपनियों से सामग्री के बारे में जानकारी मांगने व उन्हें ब्लॉक करने का निर्देश देने का अधिकार मिल गया है।
एकल दस्तावेज के रूप में जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम के लागू होने के बाद अब किसी शिक्षण संस्थान में दाखिले, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, मतदाता सूची तैयार करने, आधार, विवाह के पंजीकरण या सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए एकल दस्तावेज के रूप में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग हो सकेगा। इस कानून की मदद से पंजीकृत जन्म और मृत्यु का एक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय डाटाबेस तैयार होगा।
लोकसभा 43 फीसदी और राज्यसभा 55 फीसदी समय ही चलीं, पर विधायी कार्य हुए ज्यादा
संसदीय गतिविधियों का विश्लेषण करने वाले एक थिंक टैंक के मुताबिक इस बार मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही लगभग आधे ही समय चली, लेकिन विधायी गतिविधियां उच्च स्तर पर रहीं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, लोकसभा ने निर्धारित अवधि में से केवल 43 फीसदी और राज्यसभा ने 55 फीसद वक्त काम किया।
आंकड़े बताते हैं कि 23 विधेयक पारित होने के साथ विधायी गतिविधि जरूर उच्च स्तर पर रहीं। मानसून सत्र में पेश करीब 56 फीसदी विधेयकों को दोनों सदनों की मंजूरी मिली। इस दौरान एक विधेयक को औसतन आठ दिनों के भीतर पारित कर दिया गया। इस दौरान पेश किए गए कुल विधेयकों में से तीन को समितियों के पास भेजा गया है। इस बार लोकसभा में 17 फीसदी बिल समितियों को भेजे गए हैं, जो पिछली तीन लोकसभाओं की तुलना में कम है। पीआरएस ने बताया कि इस सत्र में पारित 23 विधेयकों में से सात की स्थायी समितियों ने जांच की है। विधेयकों में सबसे लंबी चर्चा दिल्ली सेवा विधेयक पर हुई, जिस पर लोकसभा में लगभग चार घंटे 54 मिनट और राज्यसभा में लगभग आठ घंटे चर्चा हुई।
विपक्ष की आवाज को दबाने की भाजपा ने की साजिश...
निचले सदन से अपने निलंबन के एक दिन बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए भाजपा ने जानबूझकर साजिश रची है। उन्होंने कहा इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी कई अरुचिकर साधनों को अपना रही है। चौधरी ने संकेत दिया कि वह सदन से अपने निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं और कहा कि इस मामले में परामर्श जारी है। उन्होंने अपने निलंबन को सत्तारूढ़ पार्टी का अनुचित कदम करार देते हुए कहा, मुझे अजीब स्थिति में डाल दिया गया है, जहां मुझे फांसी दे दी गई है और उसके बाद मुझे मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।