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Hindi News ›   India News ›   Seven agreements signed between India and China on border related issues in 31 years

India-China: बॉर्डर से जुड़े मुद्दों पर 31 साल में भारत-चीन के बीच हुए सात करार, गत 12 वर्ष में हुआ एक समझौता

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 07 Feb 2025 05:41 PM IST
सार

भारत और चीन ने 21 अक्तूबर 2024 को देपसांग व डेमचोक में भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में एलएसी पर गश्त व्यवस्था संबंधी करार संपन्न किया है। इसके चलते 2020 के सभी टकराव वाले बिंदुओं से सेना पीछे हटाई गई।

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Seven agreements signed between India and China on border related issues in 31 years
भारत-चीन संबंध। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा सत्र में सवाल पूछे गए हैं। लोकसभा में तीन सांसदों ने तीन सवाल किए हैं। इनमें से एक सवाल यह था कि क्या वार्ताओं के बाद भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा 'एलएसी' पर स्थिति अभी संवदेनशील बनी हुई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने बताया कि दोनों देशों के बीच अभी तक कई समझौते/करार हुए हैं। भारत और चीन ने 21 अक्तूबर 2024 को देपसांग व डेमचोक में भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त व्यवस्था संबंधी करार संपन्न किया है। इसके परिणामस्वरूप 2020 के सभी घर्षण बिंदुओं से सेना पीछे हटाई गई है। विदेश राज्य मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले 31 वर्षों में अभी तक भारत और चीन के बीच में सात करार हुए हैं। इस सूची में वर्ष 2013 और 2024 के दौरान दोनों देशों के मध्य में एक करार हुआ है। 

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लोकसभा सांसद लवली आनंद, सुनील कुमार और रामप्रीत मंडल ने शुक्रवार को संसद में तीन सवाल पूछे हैं। भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अब तक हस्ताक्षर किए गए समझौतों का ब्यौरा क्या है। सीमा विवाद, देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और चीन के साथ व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। क्या वार्ताओं के बाद भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। 
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विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने बताया, 

  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अमन और शांति बनाए रखने के लिए सात सितंबर 1993 को करार पर हस्ताक्षर किए गए। 
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  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य क्षेत्र में विश्वास बहाली के उपायों के लिए 29 नवंबर 1996 को करार पर हस्ताक्षर किए गए।
     
  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य क्षेत्र में विश्वास बहाली के उपायों के कार्यान्वयन के तौर तरीकों के संबंध में प्रोटोकॉल पर 11 अप्रैल 2005 को हस्ताक्षर किए गए। 
     
  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमा संबंधी समाधान के लिए राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के संबंध में 11 अप्रैल 2005 को करार पर हस्ताक्षर किए गए। 
     
  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों के संबंध में परामर्श और समन्वय के लिए एक कार्य तंत्र की स्थापना के मकसद से 17 जनवरी 2012 को करार पर हस्ताक्षर किए गए। 
     
  • भारत गणराज्य और चीन जनवादी गणराज्य सरकार के बीच भारत चीन सीमा संबंधी रक्षा सहयोग के लिए 23 अक्तूबर 2013 को करार पर हस्ताक्षर किए गए। 


इनके अलावा अप्रैल मई 2020 से चीनी पक्ष ने पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को एकपक्षीय रूप से परिवर्तित करने के अनेक प्रयास किए हैं। इन प्रयासों का हमारे सशस्त्र बलों द्वारा समुचित जवाब दिया गया। इन कार्रवाइयों से पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर अमन और शांति भंग हुई है। तभी से भारत सरकार ने सभी घर्षण बिंदुओं से सेना पीछे हटाने और भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन शांति की पूर्ण बहाली सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक और सैन्य माध्यमों द्वारा चीनी पक्ष के साथ वार्ता की है। 

भारत और चीन ने 21 अक्तूबर 2024 को देपसांग व डेमचोक में भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में एलएसी पर गश्त व्यवस्था संबंधी करार संपन्न किया है। इसके चलते 2020 के सभी घर्षण बिंदुओं से सेना पीछे हटाई गई। इस करार में सहमति हुई है कि इन दोनों क्षेत्रों में घर्षण शुरु होने से पहले लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, गश्त गतिविधियां और, जहां भी लागू हो, चराई फिर से प्रारंभ की जाए। तदनुसार इस करार को प्रभावी किया गया है। सहमती के तौर तरीकों एवं समय सीमा के अनुसार इसे लागू किया गया है। 21 अक्तूबर 2024 से पहले सेना पीछे हटाने के संबंध में संपन्न करार की शर्तें पूर्वी लद्दाख के संबंधित क्षेत्रों में लागू रहेंगी।

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