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कोरोना का कहर: हर दूसरे सैंपल की सीक्वेंसिंग में मिला वायरस का गंभीर रूप
Mon, 28 Jun 2021 06:37 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 28 Jun 2021 06:37 AM IST
सार
- अल्फा से चार गुना अधिक मिला डेल्टा, स्वस्थ हुए लोगों को भी ले रहा चपेट में
- 45 में से 21 हजार से ज्यादा सैंपल में अब तक गंभीर वैरियंट मिला
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कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोरोना वायरस में लगातार हो रहे बदलाव नई चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे है। गंभीर वैरिएंट एंटीबॉडी पर हमला करने के साथ तेजी से फैलने की क्षमता रखते हैं। स्थिति यह है कि देश में अब तक हर दूसरे सैंपल की सीक्वेंसिंग में इन गंभीर वैरिएंट की मौजूदगी का पता चल चुका है।
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इतना ही नहीं पिछले साल दिसंबर से इस साल मई के बीच 10.31 फीसदी सैंपल में ही गंभीर स्वरूप मिल रहे थे, लेकिन दूसरी लहर का पीक गुजरने के बाद जैसे ही नए मामले सामने आना कम हुए। गंभीर स्वरूप की मौजूदगी 20 जून तक 51 फीसदी हो गई। अब हर दूसरा सैंपल गंभीर स्वरूप से संक्रमित मिल रहा है।
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नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के एक वैज्ञानिक ने कहा कि अधिकतर सैंपल में गंभीर स्वरूप का पता चलना भविष्य की चुनौतियों को बढ़ा रहा है, क्योंकि दूसरी लहर का अनुभव डेल्टा स्वरूप के रूप में मिल चुका है। यह न सिर्फ तेजी से फैला बल्कि उसने वैक्सीन लेने वाले या फिर पहली लहर के दौरान संक्रमित हुए लोगों को भी दोबारा से चपेट में लिया। इसका एक नतीजा यह भी रहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक 45 हजार सैंपल की जांच हुई है और उनमें से 21 हजार से अधिक सैंपल में गंभीर स्वरूप की मौजूदगी का पता चला है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि हर दूसरे सैंपल की सीक्वेंसिंग में अल्फा, बीटा, डेल्टा, डेल्टा प्लस जैसे गंभीर वैरिएंट देश में तेजी से फैले हैं।
इतना ही नहीं एल्फा की तुलना में डेल्टा स्वरूप चार गुना तेजी से फैला है। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के पूर्व निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि पहली लहर के दौरान अल्फा वैरिएंट सबसे ज्यादा मिल रहा था।
दिसंबर 2020 से देश में जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू हुई थी। जबकि दूसरी लहर के दौरान डेल्टा ही सबसे ज्यादा मिला और अब जब दूसरी लहर कम होने लगी है तो डेल्टा प्लस और एवाई 2.0 म्यूटेशन मिलने लगे हैं।
45 हजार में से 16 हजार में मिले डेल्टा वैरिएंट
आंकड़ों के अनुसार अब तक 45 हजार में से 4544 सैंपल में अल्फा, 266 में बीटा और 16297 में डेल्टा वैरिएंट मिला है। जबकि गामा वैरिएंट का केवल दो ही केस भारत में इस साल जनवरी में मिले।
चूंकि कोरोना वायरस विदेशों से भारत में आया था। इसलिए गौर करने वाली बात है कि अल्फा वैरिएंट भारत आए 575 यात्रियों में मिला था और फिर उनके जरिए यह समुदाय से लिए 3969 सैंपल में मिला। जबकि डेल्टा वैरिएंट विदेशों से आए केवल 59 लोगों में मिला था, लेकिन समुदाय के 16238 लोगों में यह फैला।
वजह यह भी है कि डेल्टा वैरिएंट सबसे पहले भारत में मिला था। बीटा 117 यात्रियों के जरिए भारत में आया था लेकिन यह 149 अन्य लोगों में मिला। इनमें से ज्यादातर लोग संक्रमित यात्रियों के करीबी थे।
डेल्टा प्लस जैसा एवाई 2.0 का राजस्थान में मिला पहला मामला
डेल्टा वैरिएंट में भी दो म्यूटेशन हुए हैं इनमें से एक डेल्टा प्लस निकला है और दूसरे का नाम एवाई 2.0 है। अभी तक देश में डेल्टा प्लस के 56 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि पिछले सप्ताह तक एवाई 2.0 के दो ही मामले सामने आए थे लेकिन सात दिन में 14 और मामले पता चले हैं।
राजस्थान में एवाई 2.0 का पहला मामला मिला है। इसके अलावा महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह मामले मिले हैं। डेल्टा प्लस और एवाई 2.0 दोनों के ही बारे में वैज्ञानिकों को अभी ज्यादा जानकारी नहीं है। एवाई 2.0 अभी तक अमेरिका में सबसे ज्यादा मिला है लेकिन अब यह भारत में भी मिलने लगा है।