10 दिन के लिए एनआईए की हिरासत में शब्बीर शाह, आसिया अंद्राबी और मसरत आलम
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अलगाववादी नेता मसरत आलम भट को आज दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एनआईए ने कोर्ट में कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी के मामलों को लेकर अलगाववादी नेताओं मसरत आलम भट, शब्बीर शाह और आसिया अंद्राबी से पूछताछ करने की मांग की। एनआईए ने इसके लिए 15 दिन की हिरासत की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने एनआईए को तीनों नेताओं को 10 दिन के लिए हिरासत में रखने की मंजूरी दी है।
मसरत आलम पर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी कराने का आरोप है, जिनमें कई सुरक्षाकर्मियों की मौत भी हुईं। मसरत पर संवेदनशील इलाकों में भड़काऊ भाषण के भी आरोप है। मसरत को 2015 में काफी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया गया था। गिलानी के करीबी माने जाने वाले मसरत आलम पर दस लाख रुपये का ईनाम भी रखा गया था। एनआईए तीनों से पत्थरबाजी के लिए पैसे और सिस्टम के बारे में जानना चाहती है।#Visuals: NIA gets 10-day custody of separatist Shabbir Shah, Asiya Andrabi, Masarat Alam Bhat. pic.twitter.com/YBx9nwPuUn
— ANI (@ANI) June 4, 2019विज्ञापन
जानकारी के अनुसार एनआईए और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को असिया और शब्बीर के बीच टेरर फंडिंग को लेकर लिंक मिले हैं। असिया और शब्बीर अभी तिहाड़ जेल में हैं। मसरत आलम को पेशी के लिए आज ही एनआईए कोर्ट लाया गया था।
बता दें कि यह मामला 2008 के मुंबई हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है। साल 2018 में एनआईए ने हाफिज सईद, एक और आतंकी सरगना सैयद सलाउद्दीन और 10 कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर धन मुहैया कराने (टेरर फंडिंग) और अलगाववादी गतिविधियों को लेकर आरोपपत्र दायर किया था।
आरोपियों के वकील एम एस खान ने बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू- कश्मीर से लाया गया था। आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत आरोपपत्र दायर किया गया है उनमें आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं। तीनों की 10 दिन की हिरासत मिलने के बाद एनआईए घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के मामले में तीनों को एक साथ बैठाकर पूछताछ करेगी।
30 मई 2017 को एनआईए ने अलगाववादी नेताओं और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कुछ अज्ञात सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 24 जुलाई 2018 को हुई थी। इनपर हिजबुल मुदाहिदीन, दुख्तरन-ए-मिल्लत और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंक के लिए धन जुटाने (टेरर फंडिंग) का आरोप है। इसमें शब्बीर शाह सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत गुट का सदस्य था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और कुछ अन्य अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटा ली थी।
आसिया अंद्राबी पर घाटी में हाफिज सईद के इशारे पर पत्थरबाजी करवाने का आरोप है। एनआईए ने पिछले साल दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में अंद्राबी या गिलानी का नाम नहीं लिया था। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अंद्राबी की जमानत खारिज कर दी थी, जिसके बाद अंद्राबी को पिथले साल दिल्ली लाया गया था।