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डिजिटल भुगतान के लिए बनेगा अलग नियामक, सरकार लाएगी विधेयक
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 22 Apr 2017 07:10 AM IST
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कैशलेस अर्थव्यवस्था को और रफ्तार मिले, इसके लिए सरकार एक अलग पेमेंट रेगुलेटर (भुगतान नियामक) बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में एक विधेयक पेश हो सकता है। देश में अभी तक डिजिटल भुगतान के नियमन का काम रिजर्व बैंक के जिम्मे है, जो कि बैंकिंग क्षेत्र का भी नियामक है।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नोटबंदी के समय जिस तरह से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला था, उसकी गति अब वैसी नहीं रही है। सरकार चाहती है कि आम जिंदगी में अधिकतर कामकाज डिजिटल भुगतान से ही हों। डिजिटल भुगतान को कैसे बढ़ावा दिया जाए, भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था कैसे बनाया जाए, इसके लिए बीते अगस्त में ही पूर्व वित्त सचिव एवं नीति आयोग के प्रधान सलाहकार रतन पी वाटल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 9 दिसंबर, 2016 को वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंप दी थी। इसी समिति ने एक अलग पेमेंट रेगुलेटर के गठन की सिफारिश की थी।
काम की अधिकता के चलते आरबीआई नहीं दे पाता ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक के पास पहले से ही इतने काम हैं, ऊपर से डिजिटल भुगतान के विनियमन की भी जिम्मेदारी इसी को मिल गई है। काम की अधिकता की वजह से रिजर्व बैंक इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता है। इसलिए वाटल समिति की रिपोर्ट को मानते हुए अलग पेमेंट रेगुलेटर बनाना आवश्यक है।
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वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नोटबंदी के समय जिस तरह से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला था, उसकी गति अब वैसी नहीं रही है। सरकार चाहती है कि आम जिंदगी में अधिकतर कामकाज डिजिटल भुगतान से ही हों। डिजिटल भुगतान को कैसे बढ़ावा दिया जाए, भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था कैसे बनाया जाए, इसके लिए बीते अगस्त में ही पूर्व वित्त सचिव एवं नीति आयोग के प्रधान सलाहकार रतन पी वाटल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 9 दिसंबर, 2016 को वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंप दी थी। इसी समिति ने एक अलग पेमेंट रेगुलेटर के गठन की सिफारिश की थी।
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काम की अधिकता के चलते आरबीआई नहीं दे पाता ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक के पास पहले से ही इतने काम हैं, ऊपर से डिजिटल भुगतान के विनियमन की भी जिम्मेदारी इसी को मिल गई है। काम की अधिकता की वजह से रिजर्व बैंक इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता है। इसलिए वाटल समिति की रिपोर्ट को मानते हुए अलग पेमेंट रेगुलेटर बनाना आवश्यक है।
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विधेयक बनाने पर चल रहा है काम
सूत्रों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान के लिए अलग रेगुलेटर बनाने के लिए विधेयक बनाने पर काम चल रहा है। सरकार की योजना है कि इस विधेयक को मानसून सत्र की शुरूआत में ही पेश कर दिया जाए ताकि सत्र खत्म होते-होते इसे पारित करा लिया जाए।
सरकार चाहती है डिजिटल भुगतान की लागत घटे
इस समय डिजिटल भुगतान की लागत अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ही है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद देशभर के पेट्रोल पंपों पर डेबिट कार्ड से भुगतान का मसला तो सुलझ गया है लेकिन क्रेडिट कार्ड से भुगतान का मसला अभी भी उलझा हुआ है। क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर पहले की तरह शुल्क लग रहा है। इसी तरह अन्य जगहों पर भी डिजिटल भुगतान की ऊंची लागत से ग्राहक डिजिटल मोड में भुगतान करने के बदले नकदी से भुगतान करना ज्यादा पसंद करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि डिजिटल भुगतान की लागत इतनी कम हो जाए कि औसत कारोबारी या ग्राहक इसे वहन करने में बोझ महसूस न करें। यदि एक अलग पेमेंट रेगुलेटर बन जाता है तो ऐसा होना आसान हो जाएगा। यही नहीं, भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियां एवं डिजिटल भुगतान की सेवा उपलब्ध कराने वाली फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज) कंपनियां भी नए नए प्रोडक्ट लेकर बाजार में आएंगी।
कौन-कौन थे वाटल समिति के सदस्य
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पूर्व वित्त सचिव रतन वाटल की अध्यक्षता में जो समिति बनी थी, उसमें रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान के अलावा विनिवेश सचिव, नैसकॉम के अध्यक्ष, भारतीय बैंक संघ के अध्यक्ष, पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष, यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के महानिदेशक, आरबीआई के कार्यकारी निदेशक और वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के संयुक्त सचिव सदस्य थे।
सरकार चाहती है डिजिटल भुगतान की लागत घटे
इस समय डिजिटल भुगतान की लागत अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ही है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद देशभर के पेट्रोल पंपों पर डेबिट कार्ड से भुगतान का मसला तो सुलझ गया है लेकिन क्रेडिट कार्ड से भुगतान का मसला अभी भी उलझा हुआ है। क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर पहले की तरह शुल्क लग रहा है। इसी तरह अन्य जगहों पर भी डिजिटल भुगतान की ऊंची लागत से ग्राहक डिजिटल मोड में भुगतान करने के बदले नकदी से भुगतान करना ज्यादा पसंद करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि डिजिटल भुगतान की लागत इतनी कम हो जाए कि औसत कारोबारी या ग्राहक इसे वहन करने में बोझ महसूस न करें। यदि एक अलग पेमेंट रेगुलेटर बन जाता है तो ऐसा होना आसान हो जाएगा। यही नहीं, भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियां एवं डिजिटल भुगतान की सेवा उपलब्ध कराने वाली फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज) कंपनियां भी नए नए प्रोडक्ट लेकर बाजार में आएंगी।
कौन-कौन थे वाटल समिति के सदस्य
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पूर्व वित्त सचिव रतन वाटल की अध्यक्षता में जो समिति बनी थी, उसमें रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान के अलावा विनिवेश सचिव, नैसकॉम के अध्यक्ष, भारतीय बैंक संघ के अध्यक्ष, पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष, यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के महानिदेशक, आरबीआई के कार्यकारी निदेशक और वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के संयुक्त सचिव सदस्य थे।