फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Senthil Balaji Case: ED can't seek police custody beyond 15 days from arrest, Kapil Sibal tells Madras HC

Senthil Balaji Case: 'ED का काम मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करना, हिरासत मांगना नहीं,' कोर्ट में बोले कपिल सिब्बल

Tue, 11 Jul 2023 08:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 11 Jul 2023 08:01 PM IST
सार

Senthil Balaji Case: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर ईडी उनसे पूछताछ करना चाहती है तो वह न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी ऐसा कर सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत मांगने की कोई जरूरत नहीं है।

विज्ञापन
Senthil Balaji Case: ED can't seek police custody beyond 15 days from arrest, Kapil Sibal tells Madras HC
सेंथिल बालाजी (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

तमिलनाडु सरकार के मंत्री सेंथिल बालाजी की पत्नी की ओर से मद्रास उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गिरफ्तारी की तारीख से 15 दिन की अवधि से अधिक पुलिस हिरासत की मांग नहीं कर सकता है।    

विज्ञापन

द्रमुक मंत्री बालाजी की पत्नी मेगला की ओर से पेश सिब्बल ने न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय सेंथिल बालाजी को पुलिस हिरासत में लेने के उद्देश्य से उनके इलाज की अवधि को हटाने की मांग नहीं कर सकता।उन्होंने कहा कि सेंथिल बालाजी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उसके बाद ईडी ने आठ दिन की पुलिस हिरासत का आदेश हासिल किया। लेकिन उन्होंने आदेश को निष्पादित (एक्सेक्युट) नहीं किया। इसलिए, वे 15 दिनों की अवधि के बाद फिर से पुलिस हिरासत की मांग नहीं कर सकते। सेंथिल बालाजी अब न्यायिक हिरासत में हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सिब्बल ने दलील दी कि अगर ईडी उनसे पूछताछ करना चाहती है तो वह न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी ऐसा कर सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत मांगने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा कि ईडी के पास पुलिस हिरासत मांगने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि ईडी अधिकारी, पुलिस अधिकारी नहीं हैं। धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करनी होती है, अगर हिरासत में लिए गए व्यक्ति के पास संपत्ति है। इस मामले में यह दिखाने के लिए कोई प्रथम दृष्टया सामग्री नहीं है कि सेंथिल बालाजी के कब्जे में संपत्ति है। इसलिए ईडी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। 

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि पीएमएलए एक अनूठा कानून है जो ईडी को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है, लेकिन इस शर्त पर कि उनके पास ठोस सबूत हैं और यह मानने के कारण हैं कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति किसी अपराध का दोषी है। इसके अलावा, मौखिक रूप से गिरफ्तारी के आधार को बताना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि किस आधार पर गिरफ्तार किया जा रहा है, यह आरोपी बताया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि 15 जून, 2023 को उच्च न्यायालय ने कहा कि सेंथिल बालाजी अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि, उसी दिन ईडी ने सत्र न्यायाधीश का रुख किया और पुलिस हिरासत का आदेश प्राप्त किया, जो कानूनन गलत था। उन्होंने कहा कि ईडी अस्पताल में उनसे पूछताछ करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकती थी, जहां वह इलाज करा रहे थे। उन्होंने कहा कि ईडी अस्पताल को सेंथिल बालाजी को अगले कमरे में स्थानांतरित करने और सुरक्षा गार्डों को हटाने और उनसे पूछताछ करने के लिए कह सकती थी।  यहां तक कि डॉक्टरों ने भी अस्पताल में ही पूछताछ पर आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने केवल इतना कहा कि ईडी उनसे पूछताछ कर सकती है लेकिन जब वह थक जाएं तो उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए। लेकिन ईडी ने ऐसा करने का विकल्प नहीं चुना।  
 

वहीं, बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एनआर इलांगो ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (एचसीपी) विचार योग्य है। इलांगो ने कहा कि गिरफ्तारी अपने आप में अवैध थी क्योंकि ईडी अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया था कि सेंथिल बालाजी तलाशी के दौरान सहयोग कर रहे थे, लेकिन बाद में ईडी ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और वह अधिकारियों को डरा रहे थे। 
 

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, इस मामले में गिरफ्तारी के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि रिमांड इसलिए भी अवैध है क्योंकि सत्र न्यायाधीश उन्हें रिमांड पर भेजते समय अपना दिमाग लगाने में विफल रहीं। बालाजी को रिमांड पर भेजे जाने से पहले एक आपत्ति याचिका दायर की गई थी। लेकिन इस पर विचार किए बिना सत्र न्यायाधीश ने उसे रिमांड पर भेज दिया और उसके बाद आपत्ति याचिका को खारिज कर दिया। इसके अलावा, आपत्ति याचिका पर सुनवाई का अवसर दिए बिना रिमांड आदेश पारित किया गया था और इसलिए रिमांड अवैध है। इसलिए, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका बनाए रखने योग्य है।  ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बुधवार को अपनी दलीलें रखेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed