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Sankarshan Thakur: वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर का निधन, 63 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
Tue, 09 Sep 2025 07:10 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 09 Sep 2025 07:10 AM IST
सार
वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर का 63 वर्ष की उम्र में गुरुग्राम में निधन हो गया। उन्होंने द टेलीग्राफ, इंडियन एक्सप्रेस और तहलका जैसे संस्थानों में काम किया। बिहार व कश्मीर पर उनकी रिपोर्टिंग व लेखन चर्चित रहे। उन्होंने कई चर्चित राजनीतिक किताबें भी लिखीं।
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वरिष्ठ संपादक और जाने-माने पत्रकार संकर्षण ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
द टेलीग्राफ के वरिष्ठ संपादक और जाने-माने पत्रकार संकर्षण ठाकुर का सोमवार को गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 63 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। ठाकुर का जन्म 1962 में पटना में हुआ था। उनके पिता जनार्दन ठाकुर भी पत्रकार थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई सेंट जेवियर्स पटना और फिर दिल्ली में हुई।
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इसके बाद दिल्ली विवि के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में डिग्री ली। संकर्षण ने 1984 में संडे मैगजीन से कॅरिअर शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, तहलका और दो बार द टेलीग्राफ में काम किया। वह तीखी राजनीतिक टिप्पणियों और संवेदनशील लेखन के लिए मशहूर रहे। खासकर बिहार और कश्मीर पर उनकी रिपोर्टिंग बेहद सराही गई। ठाकुर ने बिहार के नेताओं पर चर्चित किताबें भी लिखीं।
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने संकर्षण ठाकुर के देहावसान पर जताया शोक
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक समाचार पत्र के संपादक संकर्षण ठाकुर के देहावसान पर शोक जताया है। उनका लंबी बीमारी के बाद सोमवार 8 सितंबर को निधन हो गया था। इसके बाद से ही समाचार जगत में लोग संकर्षण ठाकुर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। लोग उन्हें आम आदमी की आवाज उठाने वाले एक बेहद गंभीर पत्रकार के तौर पर याद कर रहे हैं। गिल्ड ने कहा है कि संकर्षण ठाकुर का असमय जाना भारतीय पत्रकारिता के लिए गंभीर क्षति है, लेकिन उनकी लेखनी आने वाले समय में युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
गिल्ड ने अपने शोक संदेश में उन्हें एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि एक लेखक के तौर पर भी याद किया है। संकर्षण ठाकुर ने लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर कई पुस्तकें लिखकर ख्याति बटोरी थी। पत्रकार के तौर पर भी उन्होंने कई प्रसिद्ध समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या, 1984 के सिख दंगों से लेकर कारगिल युद्ध तक के दौरान बेहद गंभीर रिपोर्टिंग की थी।
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इसके बाद दिल्ली विवि के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में डिग्री ली। संकर्षण ने 1984 में संडे मैगजीन से कॅरिअर शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, तहलका और दो बार द टेलीग्राफ में काम किया। वह तीखी राजनीतिक टिप्पणियों और संवेदनशील लेखन के लिए मशहूर रहे। खासकर बिहार और कश्मीर पर उनकी रिपोर्टिंग बेहद सराही गई। ठाकुर ने बिहार के नेताओं पर चर्चित किताबें भी लिखीं।
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने संकर्षण ठाकुर के देहावसान पर जताया शोक
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक समाचार पत्र के संपादक संकर्षण ठाकुर के देहावसान पर शोक जताया है। उनका लंबी बीमारी के बाद सोमवार 8 सितंबर को निधन हो गया था। इसके बाद से ही समाचार जगत में लोग संकर्षण ठाकुर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। लोग उन्हें आम आदमी की आवाज उठाने वाले एक बेहद गंभीर पत्रकार के तौर पर याद कर रहे हैं। गिल्ड ने कहा है कि संकर्षण ठाकुर का असमय जाना भारतीय पत्रकारिता के लिए गंभीर क्षति है, लेकिन उनकी लेखनी आने वाले समय में युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
गिल्ड ने अपने शोक संदेश में उन्हें एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि एक लेखक के तौर पर भी याद किया है। संकर्षण ठाकुर ने लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर कई पुस्तकें लिखकर ख्याति बटोरी थी। पत्रकार के तौर पर भी उन्होंने कई प्रसिद्ध समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या, 1984 के सिख दंगों से लेकर कारगिल युद्ध तक के दौरान बेहद गंभीर रिपोर्टिंग की थी।