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Analysis: INDIA गठबंधन का गेम बिगाड़ सकती हैं मायावती? 2024 के लिए एक तीर से साध दिए तीन निशाने!
Sat, 20 Jan 2024 02:26 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sat, 20 Jan 2024 02:26 PM IST
सार
मायावती ने 15 जनवरी को अपने 68वें जन्मदिवस पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। वह लगातार इंडिया गठबंधन की बैठकों से दूरी बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर वरिष्ठ पत्रकार समीर स्व गांवकर ने बात की।
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वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर ने अमर उजाला से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि मायावती ने जिस तरह इंडिया गठबंधन की बैठकों से लगातार दूरी बनाकर रखी और समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के बीच जिस तरह आरोप प्रत्यारोप का दौर चला वह बताने के लिए पर्याप्त था कि कांग्रेस की तमाम खुशियों के बाद भी सपा और बसपा 2019 की तरह 2024 में फिर साथ आएंगे, इसकी संभावना कम ही है।
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सपा और बसपा साथ आएंगे इसकी संभावना कम
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 15 जनवरी को अपने 68वें जन्मदिवस पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। मायावती ने जिस तरह इंडिया गठबंधन की बैठकों से लगातार दूरी बनाकर रखी और समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी ने जिस तरह आरोप प्रत्यारोप का दौर चला वह बताने के लिए पर्याप्त था कि कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बाद भी सपा और बसपा 2019 की तरह 2024 में फिर साथ आएंगे, इसकी संभावना बेहद कम है।
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2019 में हुआ था ये
चौगांवकर ने कहा कि 2019 के आम चुनाव में 35 साल एक दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे मायावती और अखिलेश यादव ने हाथ मिलाया था। सबसे ज्यादा अच्छे सांसद देने वाला उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में दुरी की भूमिका निभाता है। अब तक 14 प्रधानमंत्री में से नौ इसी उत्तर प्रदेश ने दिए हैं। 2019 में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश के 22 फीसदी, दलित, 45 अन्य और 19 मुसलमान एकतरफा सपा बसपा गठबंधन को वोट करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2019 में बसपा को 10 और समाजवादी पार्टी को पांच सीट मिली थीं।
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इन पार्टियों को लगा था झटका
उन्होंने आगे कहा कि बसपा को 19 फीसदी, समाजवादी पार्टी को 18 फीसदी, कांग्रेस को छह फीसदी और जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोकदल को डेढ़ प्रतिशत के आसपास वोट मिले थे। इन सभी विपक्षी दलों के सम्मिलित वोट प्रतिशत को अगर देखा जाए तो 45 फीसदी का और वहीं भारतीय जनता पार्टी अकेले को 50 फीसदी के करीब वोट मिले थे। मायावती के अकेले चुनाव लड़ने से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को झटका लगा है। लेकिन ऐसा नहीं है कि मायावती के अकेले जाने का फैसला बसपा के लिए फायदेमंद होगा।
बसपा के पास नौ सांसद
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के इस समय लोकसभा में नौ सांसद है। मायावती ने अमरोहा से अपने सांसद दानिश अली को पार्टी से निकाल दिया है। समाजवादी पार्टी रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा हारने के बाद समाजवादी पार्टी के भी तीन सांसद लोकसभा में बच्चे हैं। मायावती अखिलेश दोनों जानते हैं कि 2019 में दोनों के मिलकर लड़ने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी को 62 सीटें मिली थीं। ऐसे में अखिलेश का मायावती से दूरी बनाना और मायावती का अकेले लड़ने का फायदा भारतीय जनता पार्टी को होना लाजमी है। मायावती के 12 फीसदी वोट बैंक को नजरअंदाज करना इंडिया गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा। इस बात को कांग्रेस भी जानती है। इसी कारण कांग्रेस मायावती को इंडिया के प्रबंधन का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
सीट हराने में निभा सकती है भूमिका
समाजवादी पार्टी भी इस बात को जानती है कि मायावती अगर सीट जितवा नहीं सकती है तो सीट हराने में बड़ी भूमिका जरूर निभा सकती हैं। अखिलेश यादव के लिए भी यह लोकसभा चुनाव एक महत्वपूर्ण चुनाव होने जाने वाला है। समाजवादी पार्टी और बसपा का साथ में ना आना, भारतीय जनता पार्टी के लिए एक प्रकार से उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव में जीत के समान होगा। 80 लोकसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी 75 से ज्यादा लोकसभा सीट जीतने की तैयारी कर रही है। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपना वोट बैंक 60 फीसदी तक ले जाने का टारगेट सेट किया है।
डबल इंजन की सरकार को रोकना आसान नहीं
गांवकर ने कहा, 'मुझे लग रहा है। भारतीय जनता पार्टी का संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक लगातार उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं और देखिए उत्तर प्रदेश के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी और जिस हिसाब से प्रधानमंत्री ने नौ साल कामकाज किया है। 2017 के बाद जिस तरह से उत्तर प्रदेश के अंदर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति संभली है, उससे योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में मोदी और योगी का जो डबल इंजन की सरकार उत्तर प्रदेश में है। उसे 2024 में रोक पाना फिलहाल कांग्रेस और सपा के अकेले के बस की बात नहीं है।'
तीनों मिलकर भी जीत जाएं, तो बड़ी बात
उन्होंने कहा, 'बहुजन समाज पार्टी के मिलने के बाद भी यह तीनों (कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी) मिलकर भारतीय जनता पार्टी के रोक सके, इसकी संभावना कम है। मुझे लग रहा है 2024 का यह लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में मोदी और राम में होने वाला है, जिसे रोक पाना किसी भी गठबंधन के लिए संभव नहीं होगा। मुझे ऐसा लगता है कि मायावती ने फिलहाल गठबंधन से दूरी बनाकर रख कर अपने लिए सभी रास्ते खुले रखे हैं। इस बात की संभावना है कि 2024 के चुनाव परिणाम के बाद मायावती किसी भी गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। लेकिन फिलहाल वह गठबंधन से दूरी बनाकर चुनाव में जाने की घोषणा कर चुकी है।
गठबंधन का हिस्सा बन...
उन्होंने कहा कि इस बात की भी संभावनाएं हैं कि चुनाव के कुछ दिन पूर्व मायावती इंडिया गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। फिलहाल कोशिश इंडिया गठबंधन से जारी है कि मायावती गठबंधन का हिस्सा बने। मायावती का रुख आने वाले दिनों में क्या होगा ये देखना दिलचस्प होगा। लेकिन फिलहाल मायावती का जो निर्णय है वो भारतीय जनता पार्टी के लिए राहत का निर्णय है।