फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sedition law be retained, guidelines may be laid to prevent misuse, AG to SC

अहम सुनवाई: राजद्रोह कानून की वैधता मामले को बड़ी पीठ को सौंपने पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

Thu, 05 May 2022 11:15 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 05 May 2022 11:15 PM IST
सार

वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि 1962 में केदारनाथ मामले में पांच-न्यायाधीशों की पीठ फैसले को बरकरार रखा था।

विज्ञापन
Sedition law be retained, guidelines may be laid to prevent misuse, AG to SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ को भेजने पर विचार करने पर सहमति जताई। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा, वह 10 मई को इस मामले में सुनवाई करेगी तब तक केंद्र और याचिकाकर्ता लिखित दलीलें दाखिल करें। सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने गौर किया कि केदारनाथ सिंह मामले (1962) में आईपीसी की धारा-124 ए(राजद्रोह) की वैधता को बरकरार रखने का पिछला फैसला पांच जजों की संविधान पीठ द्वारा दिया गया था।

विज्ञापन


उस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि हिंसा भड़काने की भावना के बिना सरकार के काम के प्रति अस्वीकृति दिखाने वाली कड़े शब्दों की टिप्पणियां दंडनीय अपराध को आकर्षित नहीं करेंगी। इसलिए अब इस मामले में बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया। लेकिन तीन जजों की पीठ ने फैसला किया कि वह इस पर 10 मई को विचार करेगी। पीठ ने केंद्र और याचिकाकर्ताओं से लिखित दलीलें भी मांगी हैं।
विज्ञापन


केदार नाथ मामले के फैसले में राजद्रोह कानून वैध : वेणुगोपाल
अटॉर्नी जनरल ने केके वेणुगोपाल कहा, केदार नाथ सिंह मामले के फैसले के मद्देनजर राजद्रोह कानून वैध है। अदालत इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित कर सकती है। उन्होंने मामले को बड़ी बेंच को भेजने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा, कानून का दुरुपयोग नियंत्रित है। बड़ी पीठ के पास भेजने का प्रश्न ही नहीं उठता। बोलने की स्वतंत्रता और राज्य की सुरक्षा को देखते हुए केदारनाथ फैसला बहुत संतुलित है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसकी इजाजत है किसकी नहीं यह सबसे महत्वपूर्ण
वेणुगोपाल ने पीठ से यह भी कहा, आप देख रहे हैं कि देश में क्या हो रहा है। किसी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वे हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते थे। उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है। एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसकी इजाजत है और किसकी नहीं है। उनका इशारा सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा के मामले की ओर था।


सरकार की आलोचना को असंतोष पैदा करने के रूप में नहीं मान सकते: सिब्बल
वहीं सिब्बल ने कहा, सरकार की आलोचना को असंतोष पैदा करने के रूप में नहीं माना जा सकता है। यह प्रावधान बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। केदार नाथ सिंह के फैसले के बाद काफी बदलाव हुए हैं। सिब्बल ने कहा, औपनिवेशिक स्वामी चले गए हैं। हम अपने भाग्य के स्वामी हैं। हम स्वतंत्र हैं और अब क्राउन (राजा) के अधीन नहीं हैं।

पीठ ने केंद्र से एक साल से लंबित याचिकाओं पर भी जवाब मांगा  
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को करीब एक साल से लंबित याचिकाओं के समूह पर सोमवार तक लिखित जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका भी दिया है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed